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दिल्ली तक दौड़ेगी हाइड्रोजन ट्रेन: जींद-सोनीपत के बाद आजादपुर तक विस्तार की तैयारी, रेलवे ने क्या बताई वजह?
Thu, 17 Sep 2026 09:21 PM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 17 Sep 2026 09:21 PM IST
सार
भारतीय रेलवे जींद-सोनीपत के बीच चल रही हाइड्रोजन ट्रेन को दिल्ली के आजादपुर तक बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, विस्तार से पहले सुरक्षा और परिचालन पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। मौजूदा रूट पर कम यात्रियों के कारण ट्रेन रोजाना एक फेरा लगा रही है।
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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
- फोटो : amarujala.com
विस्तार
भारतीय रेलवे अपनी इकलौती हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन की सेवा को दिल्ली तक बढ़ाने की योजना बना रहा है। फिलहाल यह ट्रेन हरियाणा के 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रूट पर चल रही है। अधिकारियों के मुताबिक, इस रूट पर यात्रियों की संख्या बेहद कम है। ट्रेन में अधिकतम 2,600 यात्रियों के बैठने की क्षमता है, लेकिन जींद से सोनीपत के पूरे सफर के दौरान केवल 40 से 60 यात्री ही इसमें सफर करते हैं। कम यात्रियों की वजह से ट्रेन फिलहाल रोजाना सिर्फ एक फेरे लगा रही है। शुरुआती घोषणा के अनुसार, इसे जींद और सोनीपत के बीच रोजाना दो फेरे लगाने थे।
आजादपुर तक बढ़ाने की तैयारी
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, उत्तर रेलवे पिछले दो महीने से इस ट्रेन का सफल संचालन कर रहा है। अब विशेषज्ञों की टीम इसे दिल्ली के आजादपुर स्टेशन तक बढ़ाने के लिए जरूरी उपायों पर काम कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन के संचालन और दिल्ली तक विस्तार के ट्रायल रन की नियमित निगरानी विशेषज्ञों का एक समूह कर रहा है। यह नई तकनीक है, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। विस्तार का फैसला सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद लिया जाएगा।
17 जुलाई को शुरू हुई थी ट्रेन
भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को 17 जुलाई को शुरू किया गया था। रेलवे के अनुसार, यह अगली पीढ़ी की स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन तकनीक अपनाने की दिशा में एक पायलट परियोजना है। इस पहल के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हुआ है, जो हाइड्रोजन से चलने वाली रेल परिवहन तकनीक पर काम कर रहे हैं। इनमें जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका शामिल हैं।
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रेलवे कर्मचारियों के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन ने पहले इस रूट पर चलने वाली डेमो ट्रेन की जगह ली थी। उस ट्रेन में भी यात्रियों की संख्या काफी कम रहती थी। फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन के अलावा रूट पर तीन अन्य डेमो ट्रेनें भी चल रही हैं और उनमें भी ज्यादा यात्री नहीं हैं। कर्मचारियों के अनुसार, जींद और सोनीपत के बीच कार्यालय जाने वाले लोगों या औद्योगिक कर्मचारियों की संख्या कम है।
ये भी पढ़ें: 'हैप्पी बर्थ डे माई फ्रेंड': मेलोनी ने पीएम मोदी को दी जन्मदिन की बधाई, भारत-इटली के संबंधों पर क्या कहा?
दिल्ली विस्तार में कुछ चुनौतियां
दिल्ली तक ट्रेन बढ़ाने में कुछ चुनौतियां भी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह 10 कोच की ट्रेन है और इसमें 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं। वहीं, दिल्ली से चलने वाली ट्रेनों में रेलवे ट्रैक की क्षमता को देखते हुए 18 से 20 या उससे ज्यादा कोच की जरूरत होती है। हालांकि, ट्रेन में ईंधन की समस्या नहीं है। एक बार पूरा टैंक भरने पर यह करीब 250 से 300 किलोमीटर तक चल सकती है। फिलहाल इसकी रिफ्यूलिंग सुविधा केवल जींद में है। ट्रेन एक दिशा में करीब 150 किलोमीटर तक जा सकती है, जबकि दिल्ली से जींद की दूरी करीब 130 किलोमीटर है।
स्थानीय यात्रियों ने भी ट्रेन को दिल्ली तक बढ़ाने का सुझाव दिया है। वहीं, अगर इसमें परिचालन संबंधी दिक्कत आती है तो सोनीपत से पानीपत और सफीदों होते हुए जींद तक इसका रूट बनाने का सुझाव भी दिया गया है। इस तरह करीब 180 किलोमीटर का सर्किट बन सकता है। स्थानीय यात्रियों के मुताबिक, पानीपत औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण इस रूट पर रोजाना यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है।
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आजादपुर तक बढ़ाने की तैयारी
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, उत्तर रेलवे पिछले दो महीने से इस ट्रेन का सफल संचालन कर रहा है। अब विशेषज्ञों की टीम इसे दिल्ली के आजादपुर स्टेशन तक बढ़ाने के लिए जरूरी उपायों पर काम कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन के संचालन और दिल्ली तक विस्तार के ट्रायल रन की नियमित निगरानी विशेषज्ञों का एक समूह कर रहा है। यह नई तकनीक है, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। विस्तार का फैसला सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद लिया जाएगा।
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17 जुलाई को शुरू हुई थी ट्रेन
भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को 17 जुलाई को शुरू किया गया था। रेलवे के अनुसार, यह अगली पीढ़ी की स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन तकनीक अपनाने की दिशा में एक पायलट परियोजना है। इस पहल के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हुआ है, जो हाइड्रोजन से चलने वाली रेल परिवहन तकनीक पर काम कर रहे हैं। इनमें जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका शामिल हैं।
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रेलवे कर्मचारियों के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन ने पहले इस रूट पर चलने वाली डेमो ट्रेन की जगह ली थी। उस ट्रेन में भी यात्रियों की संख्या काफी कम रहती थी। फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन के अलावा रूट पर तीन अन्य डेमो ट्रेनें भी चल रही हैं और उनमें भी ज्यादा यात्री नहीं हैं। कर्मचारियों के अनुसार, जींद और सोनीपत के बीच कार्यालय जाने वाले लोगों या औद्योगिक कर्मचारियों की संख्या कम है।
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दिल्ली विस्तार में कुछ चुनौतियां
दिल्ली तक ट्रेन बढ़ाने में कुछ चुनौतियां भी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह 10 कोच की ट्रेन है और इसमें 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं। वहीं, दिल्ली से चलने वाली ट्रेनों में रेलवे ट्रैक की क्षमता को देखते हुए 18 से 20 या उससे ज्यादा कोच की जरूरत होती है। हालांकि, ट्रेन में ईंधन की समस्या नहीं है। एक बार पूरा टैंक भरने पर यह करीब 250 से 300 किलोमीटर तक चल सकती है। फिलहाल इसकी रिफ्यूलिंग सुविधा केवल जींद में है। ट्रेन एक दिशा में करीब 150 किलोमीटर तक जा सकती है, जबकि दिल्ली से जींद की दूरी करीब 130 किलोमीटर है।
स्थानीय यात्रियों ने भी ट्रेन को दिल्ली तक बढ़ाने का सुझाव दिया है। वहीं, अगर इसमें परिचालन संबंधी दिक्कत आती है तो सोनीपत से पानीपत और सफीदों होते हुए जींद तक इसका रूट बनाने का सुझाव भी दिया गया है। इस तरह करीब 180 किलोमीटर का सर्किट बन सकता है। स्थानीय यात्रियों के मुताबिक, पानीपत औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण इस रूट पर रोजाना यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है।