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अक्तूबर में भी बरसेंगे बदरा: अगले महीने के लिए IMD का अनुमान; इस साल सामान्य से आठ प्रतिशत अधिक हुई वर्षा

Tue, 30 Sep 2025 05:53 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 30 Sep 2025 05:53 PM IST
सार

मौसम विभाग ने मानसून के बाद भारत में अक्तूबर महीने में सामान्य से 15 प्रतिशत अधिक वर्षा होने की संभावना जताई है। यह अनुमान भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को जारी किया। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि अक्तूबर में पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।

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Weather IMD says above-normal rain expected in India in October
मानसून - फोटो : पीटीआई

विस्तार

चार महीने का मानसून का मौसम मंगलवार को समाप्त हो गया और इस दौरान देश में सामान्य से आठ प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। यह जानकारी भारत मौसम विज्ञान विभाग आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि देश में मानसून का मौसम बहुत सफल रहा, हालांकि इस दौरान बादल फटने, भूस्खलन जैसी कई आपदाएं भी आईं। भारत में पूरे चार महीने के मानसून के दौरान 868.6 मिलीमीटर की सामान्य बारिश की तुलना में 937.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो आठ प्रतिशत अधिक है।

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अक्तूबर में भी बारिश का अनुमान
मौसम विभाग ने मानसून के बाद भारत में अक्तूबर महीने में सामान्य से 15 प्रतिशत अधिक वर्षा होने की संभावना जताई है। यह अनुमान भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को जारी किया। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि अक्तूबर में पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। जबकि देश के अन्य हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से कम या सामान्य के आसपास रहेगा। उन्होंने कहा कि अक्तूबर से दिसंबर तक चलने वाले उत्तर-पूर्व मानसून (पोस्ट-मानसून सीजन) के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा की उम्मीद है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम या सामान्य रह सकती है।
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पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 1089.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य बारिश 1367.3 मिलीमीटर से 20 प्रतिशत कम है। महापात्र ने बताया कि बिहार, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में मानसून के चार महीनों में से तीन महीनों में कम बारिश हुई। उन्होंने कहा, इस मानसून में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश 1901 के बाद से दूसरी बार सबसे कम रही। इस क्षेत्र में मानसून के दौरान सबसे कम बारिश (1065.7 मिलीमीटर) 2013 में दर्ज की गई थी।
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उन्होंने कहा, हाल के समय में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में कई वर्षों से कम बारिश होती रही है। वर्ष 2020 से इस क्षेत्र में कम वर्षा हुई है। अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि पिछले 20 वर्षों में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में वर्षा कम हुई है। महापात्र ने कहा कि उत्तर-पश्चिम भारत में 747.9 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य बारिश (587.6 मिलीमीटर) से 27.3 प्रतिशत अधिक है। महापात्र ने कहा कि यह 2001 के बाद से सबसे अधिक और 1901 के बाद से छठी सबसे अधिक बारिश है। उन्होंने बताया कि उत्तर-पश्चिम भारत के सभी जिलों में जून, अगस्त और सितंबर में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई।

उन्होंने कहा कि मध्य भारत में 1125.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो 978 मिलीमीटर की सामान्य बारिश से 15.1 प्रतिशत अधिक है, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीप में 716.2 मिलीमीटर की सामान्य वर्षा से 9.9 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि उत्तर-पश्चिम के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर भारत के अधिकांश भागों में अक्टूबर से दिसंबर तक सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि भारत में अक्टूबर में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है, जो दीर्घावधि औसत 75.4 मिलीमीटर से 115 प्रतिशत अधिक है।

आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, दक्षिण भारत के पांच मौसमीय उपविभागों, तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, केरल और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में अक्तूबर से दिसंबर के दौरान होने वाली उत्तर-पूर्व मानसून वर्षा सामान्य से अधिक (112% से ज्यादा) रहने की संभावना है। 1971 से 2020 तक के आंकड़ों के आधार पर दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में इस मौसम की सामान्य दीर्घकालिक औसत वर्षा 334.13 मिमी है। वहीं, देशभर में अक्तूबर माह के दौरान सामान्य वर्षा का औसत 75.4 मिमी है, जिसके मुकाबले इस बार 115% से अधिक वर्षा की संभावना जताई गई है।


महापात्र ने कहा कि इसका कारण बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में निम्न दबाव प्रणालियों का विकास, साथ ही मौसमी उतार-चढ़ाव और अन्य बड़े वायुमंडलीय कारक हैं। हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाके, दक्षिण प्रायद्वीप और पूर्वोत्तर भारत के छिटपुट हिस्सों में सामान्य से कम या सामान्य बारिश हो सकती है।

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