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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: सड़कों पर रहने वाले बच्चों के लिए पुनर्वास नीति तैयार करने के सुझाव लागू करें राज्य

Mon, 21 Feb 2022 08:48 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 21 Feb 2022 08:48 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में निर्देश दिया था कि बाल तस्करी के पीड़ित बच्चों के बयान या तो जिस जिले में बच्चा रह रहा है, उसके जिला कानूनी सेवा प्राधिकारण के कार्यालय या जिला अदालत परिसर में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दर्ज किए जाएं।
 

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Supreme Court directs states and UTs to implement suggestions for formulation of rehabilitation policy for street children
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि सड़क पर रहने वाले बच्चों के लिए पुनर्वास नीति तैयार करने के लिए जारी किए गए सुझावों को लागू करें। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह केवल कागजों पर ही नहीं रह जाना चाहिए। 

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न्यायाधीश एल नागेश्वर राव और बीआर गवई की पीठ ने कहा कि इस संबंध में अभी तक प्राप्त हुई सूचना के अनुसार सड़क पर रहने वाले केवल 17,914 बच्चों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है। जबकि, उनकी अनुमानित संख्या 15 से 20 लाख है। 
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पीठ ने यह दोहराया कि संबंधित अधिकारियों को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के वेब पोर्टल पर आवश्यक सामग्री को बिना किसी चूक के अपडेट करना होगा। पीठ ने यह भी कहा कि बच्चों को बचाना एक अस्थाई कार्य नहीं है। 
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शीर्ष अदालत ने कहा कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे बच्चों का पुनर्वास हर स्थिति में हो। हमने सुझावों की समीक्षा की है। ये समग्र हैं और इनमें हर संभव परिस्थिति को ध्यान में रखा गया है। राज्य सरकारें इनमें कुछ सुधारों को लेकर सुझाव दे सकती हैं। 


पीठ ने इसके बाद राज्यों को एनसीपीसीआर को सहयोग करने का निर्देश देते हुए सुझाव लागू करने के लिए कहा। एनसीपीसीआर की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने आरोप लगाया कि राज्यों के अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं।

मामले में आगे की सुनवाई चार सप्ताह बाद की जाएगी।

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