फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court directs Rajasthan Trial Court to restore criminal proceedings in a cheque bounce case setting aside High Court order

सुप्रीम कोर्ट: चेक बाउंस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश खारिज, आपराधिक कार्यवाही फिर शुरू करने का निर्देश

Sun, 27 Feb 2022 03:49 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 27 Feb 2022 03:49 PM IST
सार

राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से चेक बाउंस के एक मामले में आपराधिक कार्यवाही खारिज कर दी गई थी। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है और ट्रायल कोर्ट को कार्यवाही फिर से शुरू करने के लिए कहा है।

विज्ञापन
Supreme Court directs Rajasthan Trial Court to restore criminal proceedings in a cheque bounce case setting aside High Court order
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की एक ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया है कि चेक बाउंस के एक मामले में आपराधिक कार्यवाही फिर से शुरू की जाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि चेक इस टिप्पणी के साथ वापस हो गया था कि  संबंधित खाता फ्रीज है। 

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण, न्यायाधीश एएस बोपन्ना और हिमा कोहली की पीठ ने यह आदेश राजस्थान हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दाखिल की गई याचिका पर सुनाया। हाईकोर्ट ने मामले में आपराधिक कार्यवाही खारिज कर दी थी।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को मानने से इनकार कर दिया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत आरोपी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। बैंक मैनेजरों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ऐसा कोई खाता बैंक में नहीं खुला था।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने कहा, हैरत की बात है कि एक ओर बैंक मैनेजरों ने गवाही दी कि ऐसा कोई खाता बैंक में नहीं खुला। वहीं, दूसरी ओर प्रतिवादी की ओर से अपीलकर्ता के पक्ष में आहरित चेक को खाता फ्रीज की टिप्पणी के साथ लौटा दिया गया था। 

किसी भी स्थिति में कार्यवाही खारिज नहीं होनी चाहिए थी
पीठ ने आगे कहा कि चेक वापसी पर जो टिप्पणी की गई है उससे माना जा सकता है कि बैंक में खाता मौजूद था। यह ऐसा मामला है जिसे ट्रायल कोर्ट को गंभीरता से विचार करना होगा। सभी पक्षों को एक पूर्ण ट्रायल का सामना करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसे केवल बैंक मैनेजरों के सबूतों पर नहीं देखा जाना चाहिए। किसी भी स्थिति में यह ऐसा मामला नहीं था जिसकी कार्यवाही खारिज कर दी जाए। ऐसे में हम हाईकोर्ट की ओर से पारित आदेश को खारिज करते हैं।


हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने के साथ आदेश में ट्रायल कोर्ट को यह निर्देश भी दिया गया कि वह मामले की सुनवाई फिर से शुरू करे और इसे कानून के अनुसार तेजी से और संभव हो तो छह महीने की अवधि के भीतर समाप्त किया जाए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed