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Supreme Court: बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, आयोग को तार्किक विसंगति सूची वाले मतदाताओं का नाम बताने को कहा

Mon, 19 Jan 2026 03:31 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 19 Jan 2026 03:31 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को 1.25 करोड़ मतदाताओं की ‘तार्किक विसंगति’ सूची को सार्वजनिक करन के निर्देश दिया है।

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Supreme Court directs EC display names persons logical discrepancies list gram panchayat bhavans  West Bengal
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान तार्किक विसंगति के आधार पर नोटिस पाने वाले सवा करोड़ मतदाताओं के नाम प्रकाशित करने का निर्देश चुनाव आयोग को दिया है। इन सभी के नाम ग्राम पंचायत, ब्लॉक कार्यालय और वार्ड कार्यालयों में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के लिए कहा गया है। शीर्ष अदालत ने आयोग से कहा, पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को बेवजह परेशानी न हो। नोिटस मिलने से लोग तनाव में हैं।

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, दस्तावेज सत्यापन के लिए करीब दो करोड़ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। ये नोटिस तीन श्रेणियों मैप्ड, अनमैप्ड और तार्किक विसंगति के आधार पर दिए गए हैं। तार्किक विसंगति के तहत पिता के नाम में अंतर, माता-पिता और बच्चों की उम्र में कम अंतर तथा दादा-दादी की उम्र से संबंधित विसंगतियों को आधार बनाया गया है।
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पीठ ने निर्देश दिया कि तार्किक विसंगति सूची में शामिल मतदाताओं को 10 दिन के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाए और दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया जाए। यदि प्रस्तुत दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए जाते तो संबंधित व्यक्ति को स्वयं या अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से मौके पर ही सुनवाई का अवसर दिया जाए।
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सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सुनवाई केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में कर्मियों को तैनात करे और यह सुनिश्चित करे कि कानून व्यवस्था बनी रहे। स्थानीय अधिकारियों को दस्तावेज मिलने की रसीद देने और आपत्तियों पर अंतिम निर्णय का कारण लिखित रूप में दर्ज करने का आदेश भी दिया गया है। वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि मतदाताओं की प्रोफाइलिंग की जा रही है। आयोग ने इन आरोपों से इन्कार किया।

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व्हाट्सएप से निर्देश जारी करने पर आपत्ति
पीठ ने चुनाव आयोग की ओर से व्हाट्सएप के माध्यम से निर्देश जारी करने पर आपत्ति जताई। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हर व्यवस्था व्हाट्सएप से नहीं चलाई जा सकती। इसके लिए औपचारिक सर्कुलर जारी किया जाना जरूरी है। कोर्ट ने कहा, मतदाता सूची में सुधार जरूरी है, लेकिन यह प्रक्रिया संवेदनशील, पारदर्शी और नागरिकों के मताधिकार का सम्मान करने वाली होनी चाहिए।


नाम में मामूली अंतर पर भी भेजे जा रहे नोटिस: सिब्बल
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि नामों की वर्तनी में मामूली अंतर या उम्र के अंतर जैसे आधारों पर नोटिस भेजकर मतदाताओं को सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, गांगुली, दत्ता जैसे नाम अलग-अलग तरह से लिखे जा सकते हैं। आयोग ने कहा कि अब वर्तनी में अंतर पर नोटिस नहीं भेज रहे। कुछ नोटिस भेजे गए हैं कि माता-पिता के साथ बच्चे की उम्र का अंतर 15 साल से कम है।

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मां और बच्चे की उम्र में 15 वर्ष का अंतर तार्किक विसंगति कैसे?
आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने पीठ को बताया कि ऐसे मामले जहां माता-पिता के साथ बच्चे की उम्र का अंतर 15 साल या कम है, उन्हें तार्किक विसंगति के रूप में चिह्नित किया जाता है। पीठ ने कहा, यह तार्किक विसंगति क्यों है? मां और बेटे के बीच उम्र का 15 साल का अंतर तार्किक विसंगति कैसे हो सकता है? जस्टिस बागची ने कहा, ऐसा नहीं है कि हमारे देश में बाल विवाह नहीं होते हैं।

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