फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court directs Commission for Air Quality Management to start considering long-term solutions

Air Pollution: सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण पर CAQM को लगाई फटकार, कहा- कर्तव्य निभाने में रहे असफल

Tue, 06 Jan 2026 03:36 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 06 Jan 2026 03:36 PM IST
सार

दिल्ली-एनसीआर में जारी वायु प्रदूषण से संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। जिसमें शीर्ष अदालत ने दिल्ली बॉर्डर पर टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने या हटाने के मुद्दे पर 2 महीने की मोहलत मांगने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को फटकार लगाई।
 

विज्ञापन
Supreme Court directs Commission for Air Quality Management to start considering long-term solutions
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से संबंधित याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को कर्तव्य निभाने में असफल रहने पर फटकार लगाई है। वहीं सीएक्यूएम की दिल्ली की सीमाओं पर मौजूद टोल प्लाजा को हटाने या अस्थायी रूप से बंद करने की मांग को ठुकरा दिया है। 

विज्ञापन


सीएक्यूएम को 'सुप्रीम' फटकार
मंगलवार को शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) दिल्ली बॉर्डर पर टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने या हटाने के मुद्दे पर 2 महीने का समय मांगा था। जिस पर फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को ठुकरा दिया और कहा कि आयोग अपना कर्तव्य निभाने में असफल रहा है। वहीं अदालत ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को चरणबद्ध तरीके से लंबे समय के समाधानों पर विचार करना शुरू करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन


कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिए हैं कि वह विभिन्न हितधारक के रुख से प्रभावित हुए बिना टोल प्लाजा के मुद्दे पर विचार करेगा। इसी के साथ दो हफ्ते में विशेषज्ञों की बैठक बुलाने और बढ़ते प्रदूषण के मुख्य कारणों पर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मुख्य कारणों पर रिपोर्ट जमा कराने के निर्देश
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्य बागची की पीठ ने आयोग को दो हफ्ते में एक्सपर्ट्स की एक मीटिंग बुलाने और बढ़ते प्रदूषण के मुख्य कारणों पर एक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सख्त लहजे में पूछा कि क्या आप प्रदूषण के कारणों की पहचान कर पाए हैं? इन सभी दिनों में बहुत सारा मटेरियल पब्लिक डोमेन में आ रहा है, एक्सपर्ट्स आर्टिकल लिख रहे हैं, लोगों की राय है, वे हमें मेल पर भेजते रहते हैं।

ये भी पढ़ें: Delhi: शरजील-उमर को जमानत न मिलने के बाद JNU में आधी रात प्रदर्शन, पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी

टोल प्लाजा के मुद्दे पर भी विचार करने का निर्देश
पीठ ने आगे कहा कि भारी वाहन इसमें (वायु प्रदूषण) बड़ा योगदान दे रहे हैं, इसलिए पहला सवाल यह है कि हम इससे कैसे निपटें। 2 जनवरी को मीटिंग करके और हमें यह बताना कि हम दो महीने बाद आएंगे, यह हमें मंजूर नहीं है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अपनी ड्यूटी निभाने में नाकाम हो रहा है।  सुप्रीम कोर्ट ने सीएक्यूएम को चरणबद्ध तरीके से लंबे समय के समाधानों पर विचार करना शुरू करने और विभिन्न हितधारक के रुख से प्रभावित हुए बिना टोल प्लाजा के मुद्दे पर भी विचार करने का निर्देश दिया है।

कार बनती जा रही है स्टेटस सिंबल
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि आज कार जरूरत नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गई है। लोग साइकिल छोड़कर चारपहिया खरीदने के लिए पैसे बचा रहे हैं। इसका सीधा असर हवा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। कोर्ट का संकेत साफ है कि बढ़ती कार संस्कृति ने प्रदूषण बढ़ाया है और जीवनशैली में बदलाव किए बिना हवा साफ करना मुश्किल होगा।


वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि वायु प्रदूषण कम करने के लिए लोगों द्वारा एक से अधिक कार रखने पर रोक जैसे कदम जरूरी हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने सहमति जताते हुए कहा कि लोग साइकिल छोड़ चुके हैं और कार खरीदना प्राथमिकता बन गई है। अदालत का मानना है कि जब तक निजी वाहनों की संख्या कम नहीं होगी, तब तक प्रदूषण पर काबू पाना संभव नहीं है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि संपन्न वर्ग को भी बलिदान देना होगा। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि महंगी और हाई-एंड गाड़ियों की जगह लोगों को अच्छी इलेक्ट्रिक गाड़ियां अपनानी चाहिए। कोर्ट का साफ संदेश है कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी सभी वर्गों की है और अमीरों को इसमें आगे आकर उदाहरण पेश करना चाहिए।


अन्य वीडियो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed