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वेदांता-तूतीकोरिन संयंत्र मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

Tue, 04 Sep 2018 04:44 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 04 Sep 2018 04:44 PM IST
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Supreme Court denies immediate hearing in vedanta sterlite plant case
supreme court

उच्चतम न्यायालय ने खनन क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख कंपनी वेदांता समूह को तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्थित उसके बंद पड़े स्टरलाइट तांबा संयंत्र की प्रशासनिक इकाई तक पहुंच की इजाजत देने वाले राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की अर्जी पर तत्काल सुनवाई से मंगलवार को इनकार कर दिया।

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प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर एवं न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि वह अगले सप्ताह याचिका पर सुनवाई करेगी। राज्य सरकार ने 14 अगस्त को एनजीटी के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था। 
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प्रशासनिक खंड तक जाने की अनुमति देने से किसी तरह का पर्यावरणीय नुकसान नहीं होने का आंकलन करते हुये एनजीटी ने नौ अगस्त को वेदांता को उसके स्टरलाइट तांबा संयंत्र के अंदर प्रशासनिक इकाई तक प्रवेश की अनुमति दी थी। प्रदूषण की चिंताओं को लेकर हिंसक प्रदर्शनों के बाद तमिलनाडु सरकार ने 28 मई को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को खनन समूह के तांबा संयंत्र को सील करने और स्थायी तौर पर बंद करने का आदेश दिया था।
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स्टरलाइट का कारखाना मार्च 2013 में उस वक्त सुर्खियों में आया था जब गैस रिसाव के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गयी थी और कई अन्य घायल हो गये थे। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने इसे बंद करने का आदेश दिया। इसके बाद कंपनी ने एनजीटी में अपील की जिसने सरकार के फैसले को पलट दिया।

इसके बाद इसके खिलाफ राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय गयी और यह मामला अभी तक लंबित है। उस समय उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाते हुये कंपनी को पर्यावरण को प्रदूषित करने के लिए मुआवजे के तौर पर 100 करोड़ रूपया मुआवजा देने का आदेश दिया था।


स्टरलाइट के तूतीकोरिन संयंत्र का विस्तार करने की घोषणा के बाद स्थानीय लोगों ने फिर से आंदोलन शुरू किया जो 100 से अधिक दिन तक चला। 22 मई को प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की गई थी जिसमें 13 लोग मारे गये कई लोग घायल हो गये।

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