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केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला: इस नौकरशाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में किसने और क्यों दायर की थी 'अवमानना' याचिका'
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केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला
- फोटो :
ट्विटर
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई बंद कर दी है। सर्वोच्च अदालत ने उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि डीओपीटी सचिव के रूप में वरिष्ठ अधिकारी ने अदालत के आदेश का पालन नहीं किया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, अवमानना याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं दिखता।'केंद्रीय सचिवालय सेवा' के अधिकारियों के संगठन 'सीएसएस फोरम' के महासचिव मनमोहन वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। बता दें कि केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला के पास कुछ समय के लिए डीओपीटी सचिव का अतिरिक्त कार्यभार रहा था। उस वक्त राजभाषा विभाग और आईबी के कर्मियों को पदोन्नति दी गई, लेकिन केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों को पदोन्नति से वंचित रखा गया। फोरम ने अजय भल्ला से मिलकर आग्रह किया कि उनकी पदोन्नति के बारे में भी सोचा जाए। सीएसएस अधिकारियों को लंबे समय से पदोन्नति नहीं दी जा रही। अजय भल्ला ने फोरम को आश्वासन दिया कि वे इस मामले में कुछ सकारात्मक करेंगे। इसके बाद उन्होंने कानूनी राय लेकर सीएसएस अधिकारियों को पदोन्नति देनी शुरु कर दी। डिप्टी सेक्रेट्री से लेकर डायरेक्टर तक, करीब दो सौ अधिकारियों को तदर्थ पदोन्नति देने की राह खुल गई।
इस बीच जब तक कि सभी पात्र अधिकारियों को प्रमोशन मिल पाती, केंद्रीय सेवा के एक रिटायर्ड अधिकारी देवानंद साहू सर्वोच्च अदालत में चले गए। उन्होंने अदालत की अवमानना का केस कर दिया। अपनी दलील में साहू ने कहा, ये पदोन्नति आदेश गलत है, क्योंकि इस बाबत सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्थगन आदेश दे रखा है। दोबारा से सीएसएस अधिकारियों की पदोन्नति का मामला अटक गया।
अप्रैल 2019 में शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। बाद में शीर्ष अदालत ने तदर्थ पदोन्नति देने की पेशकश वाली डीओपीटी की याचिका को खारिज कर दिया। 11 दिसंबर, 2020 को, डीओपीटी ने कथित तौर पर केंद्रीय सचिवालय सेवा के चयन ग्रेड (उप सचिव) से वरिष्ठ चयन ग्रेड (निदेशक) पद पर कर्मियों को तदर्थ पदोन्नति देने के आदेश जारी किए थे। याचिकाकर्ता ने अजय भल्ला के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा, भल्ला, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) में अपने कार्यकाल के दौरान यथास्थिति बनाए रखने में विफल रहे हैं।
इस साल के शुरु में सुप्रीम कोर्ट ने ‘पदोन्नति में आरक्षण’ केस को क्लीयर कर दिया। इसके बाद 'सीएसएस' में पदोन्नति की झड़ी लग गई। लगभग आठ हजार कर्मियों को फायदा हुआ। हालांकि, तब भी तदर्थ पदोन्नति मामले में अवमानना का केस चल रहा था। 'सीएसएस फोरम' के महासचिव मनमोहन वर्मा ने कहा, वे सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त करते हैं। साथ ही फोरम ने अवमानना केस को खत्म कराने के लिए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह एवं डीओपीटी अधिकारियों के सार्थक प्रयासों की सराहना की है।
'सीएसएस फोरम' का कहना है कि अब 2013 बैच के सहायक सेक्शन अफसर 'एएसओ' की पदोन्नति का रास्ता प्रशस्त हो गया है। इन्हें तदर्थ पदोन्नति मिलेगी। दरअसल विभाग में सेक्शन अफसर के पद पर आने के दो तरीके हैं। एक, विभागीय परीक्षा पास कर इस पद तक पहुंचा जा सकता है। दूसरा, नियमित पदोन्नति प्रक्रिया के जरिए सेक्शन अफसर बन सकते हैं। हालांकि इस प्रक्रिया में आठ साल से ज्यादा का वक्त लग जाता है। मौजूदा समय में सेक्शन ग्रेड के करीब 15 सौ पद खाली हैं। पिछले चार साल से विभागीय परीक्षा नहीं हुई है। अब ये पद तदर्थ पदोन्नति के जरिए भरे जा सकते हैं। बाद में जो अधिकारी तय परीक्षा पास कर लेता है, उसकी पदोन्नति नियमित कर दी जाएगी। एएसओ को पदोन्नति मिलेगी तो उसके बाद सीजीएल के लिए रिक्त पद होंगे। जो युवा केंद्रीय सचिवालय सेवा में आने के इच्छुक हैं, उन्हें मौका मिलेगा।