SC Collegium: कॉलेजियम ने हाईकोर्ट के दो जजों के तबादले की फिर सिफारिश की, दोनों न्यायाधीशों के तर्क खारिज
कॉलेजियम ने कहा कि दोनों न्यायाधीशों की तरफ से तबादला रोकने के लिए जो कारण बताए गए थे, उस पर संबंधित पक्षों के साथ गंभीर विचार-विमर्श किया गया। इसमें पाया गया कि दोनों जजों की ओर से जो तर्क दिए गए हैं, वो तबादला रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
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प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने दिल्ली और पटना हाईकोर्ट के एक-एक न्यायाधीशों के राजस्थान और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में तबादला करने की फिर सिफारिश की है।
कॉलेजियम ने तीन अगस्त को पटना हाईकोर्ट के जस्टिस सुधार सिंह का तबादला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में करने का प्रस्ताव किया था। इस पर जस्टिस सिंह ने कॉलेजियम से तबादला रोकने का अनुरोध किया था और इसके पीछे कुछ तथ्य पेश किए थे। इसी तरह कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस रजनीश भटनागर को राजस्थान हाईकोर्ट में तबादले का प्रस्ताव किया था। इन्होंने भी कॉलेजियम से तबादला रोकने का अनुरोध किया था।
कॉलेजियम ने कहा कि दोनों न्यायाधीशों की तरफ से तबादला रोकने के लिए जो कारण बताए गए थे, उस पर संबंधित पक्षों के साथ गंभीर विचार-विमर्श किया गया। इसमें पाया गया कि दोनों जजों की ओर से जो तर्क दिए गए हैं, वो तबादला रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए कॉलेजियम दोबारा दोनों जजों के तबादला संबंधी अपनी 10 अगस्त, 2023 की सिफारिश भेज रही है।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रस्ताव के मुताबिक, कॉलेजियम ने 10 अगस्त को बैठक में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में तबादले पर पटना हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति सुधीर सिंह के अनुरोध पर विचार किया था। तीन अगस्त को, कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति सिंह को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद, आठ अगस्त को न्यायमूर्ति सिंह ने शीर्ष अदालत के कॉलेजियम को आवेदन देकर अनुरोध किया था कि उनके तबादले के संबंध में अंतिम निर्णय लेने से पहले उनके द्वारा पत्र में प्रस्तुत तथ्यों पर विचार किया जाए।
दिव्यांग डॉक्टर की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगजन (पीडब्ल्यूडी) श्रेणी के तहत स्नातकोत्तर (पीजी) चिकित्सा पाठ्यक्रम में दाखिले के निर्देश को लेकर लोकोमोटर दिव्यांगता से प्रभावित एक डॉक्टर की याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा है। लोकोमोटर दिव्यांगता शब्द का इस्तेमाल सेरेब्रल पाल्सी के कई रूपों या हड्डियों, जोड़ों या मांसपेशियों से जुड़ी दिक्कतों के लिए किया जाता है। इससे अंगों की गति काफी हद तक प्रभावित होती है।
जस्टिस एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) और अन्य को नोटिस जारी कर 11 सितंबर तक जवाब मांगा है। शीर्ष कोर्ट डॉ. धर्मेंद्र कुमार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने पीडब्ल्यूडी श्रेणी के तहत स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश की मांग की है।