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नांबी नारायण: जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई, अब सीबीआई करेगी मामले की जांच
Thu, 15 Apr 2021 02:07 PM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Thu, 15 Apr 2021 02:07 PM IST
सार
इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायण के जासूसी मामले को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में गलती करने वाले पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट पर विचार करने के आदेश दिए गए, वहीं सीबीआई की जांच के भी आदेश दिए गए।
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नंबी नारायण
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विस्तार
इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायण से जुड़े जासूसी मामले को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने गलती करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई की जांच के आदेश दिए हैं। बता दें कि 1994 के जासूसी मामले में गलती करने वाले पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर उच्च स्तरीय समिति ने रिपोर्ट दाखिल की थी। केंद्र ने इस रिपोर्ट पर विचार करने संबंधी एक याचिका दायर की गई थी, जिस पर आज सुनवाई हुई।
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न्यायमूर्ति ए एम खानविल्कर की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिए कि केंद्र की अर्जी और शीर्ष अदालत के न्यायाधीश डी के जैन की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पैनल की रिपोर्ट पर विचार किया जाए। यही नहीं कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस मामले की सीबीआई जांच की जाए।
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केंद्र ने पांच अप्रैल को कोर्ट में याचिका दायर की थी और मामले को राष्ट्रीय मुद्दा बताते हुए कहा था कि पैनल की रिपोर्ट पर तत्काल सुनवाई की जाए। कोर्ट ने आज न्यायमूर्ति डी के जैन की रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया। कोर्ट ने सीबीआई के निदेशक और कार्यवाहक निदेशक को आदेश दिया कि जैन समिति की रिपोर्ट को प्रारंभिक रिपोर्ट के तौर पर लिया जाए और जांच आगे बढ़ाई जाए।
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बता दें कि 1994 के जासूसी मामले में नांबी नारायण ना सिर्फ आरोपमुक्त हो चुके हैं बल्कि कोर्ट ने केरल सरकार को मुआवजे के तौर पर 50 लाख रुपये देने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि नांबी नारायण को इस दौरान बहुत अपमान सहना पड़ा। कोर्ट ने पैनल का गठन किया और उन अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए, जिनकी वजह से नांबी नारायण को उत्पीड़न और बेइज्जती का सामना करना पड़ा था।
जिस अहम प्रोजेक्ट के डाइरेक्टर, उसी की जानकारी बेचने का आरोप
साल 1994 का अक्तूबर महीना चल रहा था। केरल की राजधानी तिरुअनंतपुरम से मालदीव एक महिला को गिरफ्तार किया गया। नाम था— मरियम राशिदा। मरियम को इसरो के स्वदेशी क्रायोजनिक इंजन की ड्राइंग के बारे में खुफिया जानकारी दुश्मन देश पाकिस्तान को बेचने का आरोप था। स्वदेशी क्रायोजनिक इंजन के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे नारायणन को भी गिरफ्तार कर लिया गया। वह इस प्रोजेक्ट के डाइरेक्टर थे।
उनके साथ दो और साइंटिस्ट डी. शशिकुमारन और डिप्टी डायरेक्टर के. चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया गया। सभी पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप था। इसके अलावे इस मामले में रुसी स्पेस एजेंसी के एक भारतीय प्रतिनिधि एसके शर्मा, एक लेबर कांट्रैक्टर और राशिदा की सहेली फैजिया इसन को भी गिरफ्तार किया गया था।