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सुप्रीम कोर्ट ने जरूरतमंद विद्यार्थियों को गैजेट्स, इंटरनेट उपलब्ध कराने संबंधी आदेश पर लगाई रोक

Thu, 11 Feb 2021 01:04 AM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रियंका तिवारी Updated Thu, 11 Feb 2021 01:04 AM IST
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Supreme Court bans Delhi High Courts order to provide gadgets internet to needy students
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर लगाई रोक - फोटो : सोशल मीडिया

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाई है। दरअसल, हाई कोर्ट ने कोविड-19 महामारी के चलते लगाए गए लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन कक्षाओं के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) व वंचित समूह श्रेणी के अंतर्गत आने वाले विद्यार्थियों को गैजेट्स और इंटरनेट पैकेज उपलब्ध कराने के लिए निजी स्कूलों और ‘केंद्रीय विद्यालयों’ को आदेश दिया था। इसी आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।

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हाई कोर्ट ने यह फैसला पिछले साल 18 सितंबर को सुनाया था। इस फैसले को दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर चुनौती दी थी। ऐसे में सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका पर सहमति व्यक्त की, जिसमें न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यन भी शामिल थे।
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पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘नोटिस जारी करें। इस बीच उच्च न्यायालय के आदेश के लागू होने पर रोक रहेगी।’’ हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने निर्देश दिया था कि गैजेट और इंटरनेट पैकेज की लागत ट्यूशन शुल्क का हिस्सा नहीं है।
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खंडपीठ ने यह भी कहा था कि गैर वित्तपोषित निजी स्कूल, शिक्षा के अधिकार कानून-2009 के तहत उपकरण और इंटरनेट पैकेज खरीदने पर आई तर्कसंगत लागत की प्रतिपूर्ति राज्य से प्राप्त करने के योग्य हैं।

फैसले पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गैर सरकारी संगठन ‘जस्टिस फॉर ऑल’ को नोटिस भी जारी किया, जिसकी और अन्य की याचिकाओं पर हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने पीठ को बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले से सरकार पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।उन्होंने कहा, "हम पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में काफी खर्च कर रहे हैं।"


गौरतलब है कि गैर सरकारी संगठन ने अपनी याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को गरीब बच्चों को मोबाइल फोन, लैपटॉप या टैबलेट मुहैया कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया था ताकि यह विद्यार्थी भी कोविड-19 महामारी में लॉकडॉउन के दौरान चल रही ऑनलाइन कक्षाओं का लाभ ले सकें।

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