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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court asks the trial court to take a decision within ten weeks on de-sealing of the Uphaar cinema

Uphaar Cinema: SC ने फर्म को निचली अदालत में जाने की अनुमति दी, कोर्ट को 10 सप्ताह में फैसला लेने को कहा

Thu, 27 Apr 2023 04:32 PM IST
देव कश्यप एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 27 Apr 2023 04:32 PM IST
सार

13 जून 1997 को दिल्ली के उपहार सिनेमा में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने निर्देश दिया कि निचली अदालत 10 सप्ताह के भीतर फर्म द्वारा दाखिल की गई याचिका पर कानून के अनुसार फैसला कर सकती है।

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Supreme Court asks the trial court to take a decision within ten weeks on de-sealing of the Uphaar cinema
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने उपहार सिनेमा की सीलिंग हटाने और इसकी कस्टडी वापस देने के लिए अंसल ब्रदर्स द्वारा दायर याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने ‘अंसल थिएटर्स एंड क्लबोटेल्स प्राइवेट लिमिटेड’ को राष्ट्रीय राजधानी स्थित उपहार सिनेमाघर की सीलिंग हटाने के अनुरोध को लेकर निचली अदालत जाने की अनुमति दे दी।

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न्यायमूर्ति केएम जोसेफ, न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने निर्देश दिया कि निचली अदालत 10 सप्ताह के भीतर फर्म द्वारा दाखिल की गई याचिका पर कानून के अनुसार फैसला कर सकती है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की दलीलों को दर्ज किया कि उनका संपत्ति पर कोई दावा नहीं है।
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दिल्ली पुलिस और सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि कानून के तहत उचित प्रक्रिया का पालन करने की जरूरत है, जिसके लिए उपयुक्त मंच निचली अदालत है और जहां से जांच के तहत संपत्ति की सीलिंग को हटाने का अनुरोध किया जा सकता है। उपहार त्रासदी पीड़ितों के संघ (एवीयूटी) की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने कहा कि शीर्ष अदालत ने अंसल बंधुओं को दिल्ली में एक ‘ट्रॉमा सेंटर’ के निर्माण के लिए 60 करोड़ रुपये जमा करने के लिए कहा था।
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उन्होंने कहा कि केवल दिल्ली सरकार ही बता सकती है कि 60 करोड़ रुपये जमा किये गए हैं या नहीं और सुझाव दिया कि उनके वकील से इस संबंध में निर्देश लेने को कहा जाना चाहिए। ‘अंसल थिएटर्स एंड क्लबोटेल्स प्राइवेट लिमिटेड’ के पूर्व निदेशकों सुशील अंसल और गोपाल अंसल के वकील ने कहा कि द्वारका में बनने वाले ‘ट्रॉमा सेंटर’ के निर्माण के लिए वे पहले ही 60 करोड़ रुपये जमा कर चुके हैं।

क्या है मामला?
13 जून 1997 को दिल्ली के उपहार सिनेमा में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें 23 बच्चे थे। इस दिन उपहार सिनेमा में फिल्म 'बॉर्डर' लगी थी। यह फिल्म की रिलीज का पहला दिन था। चूंकि फिल्म देशभक्ति से जुड़ी थी इसलिए भीड़ भी ज्यादा थी। लेकिन दोपहर का शो देखने वाले दर्शकों के लिए यह दिन जीवनभर का दर्दनाक अनुभव दे गया। दोपहर करीब 4.55 बजे सिनेमा हॉल की पार्किंग में आग लग गई। धुआं फैलना शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह सिनेमा हॉल में पहुंच गया। हालात बिगड़ने शुरू हुए और लोग भागने लगे। कुछ तेजी के साथ ग्राउंड फ्लोर से बाहर निकलने लगे। कुछ इस कदर डरे हुए थे कि ऊपरी मंजिले की खिड़कियों से ही कूदना शुरू कर दिया। कई लोग अंदर ही फंस गए। धीरे-धीरे आग बढ़ने लगा और लोग इसकी चपेट में आने लगे।


16 लोगों को बनाया गया था अभियुक्त
मामला अदालत पहुंचा। हॉल में काम करने वाले स्टाफ, सेफ्टी इंस्टपेक्टर से लेकर मालिक अंसल ब्रदर्स समेत 16 लोगों को अभियुक्त बनाया गया। इसमें सबसे हाई प्रोफाइल नाम सिनेमा के मालिक सुशील और गोपाल अंसल थे। अदालत ने 2007 में सभी अभियुक्तों को दोषी पाया। तब तक इनमें से चार की मौत हो चुकी थी। इनमें से कइयों को सात महीने से लेकर सात साल तक की सजा सुनाई गई। अंसल ब्रदर्स को मात्र दो साल की जेल हुई। लेकिन जब दिल्ली हाई कोर्ट में सजा को चुनौती दी गई तो सजा बढ़ने की बजाय आधी हो गई। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और 2015 में इसका फैसला आया। यह फैसला और भी झटका देने वाला था। कोर्ट ने अंसल ब्रदर्स की जेल की सजा पूरी तरह माफ कर दी।

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