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RERA Rules: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्या रेरा के तहत राज्यों के बनाए नियम केंद्रीय कानून के अनुरूप हैं? केंद्र सरकार से मांगी रिपोर्ट 

Mon, 14 Feb 2022 10:08 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 14 Feb 2022 10:08 PM IST
सार

पीठ वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए ‘मॉडल बिल्डर बायर एग्रीमेंट’ बनाने की मांग की गई है।

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Supreme Court asks Centre Govt to examine if state rules under RERA subserve interest of home buyers
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को यह जांचने का निर्देश दिया कि क्या रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के तहत विभिन्न राज्यों द्वारा बनाए गए नियम केंद्रीय कानून के अनुरूप हैं और क्या ये खरीदारों के हित में हैं? जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने केंद्र को दो महीने का समय देते हुए यह जांचने को कहा है कि क्या राज्यों द्वारा बनाए गए नियम वर्ष 2016 में केंद्र द्वारा बनाए गए नियमों से इतर हैं? केंद्र को मई, 2022 के पहले सप्ताह तक रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। 

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पीठ वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए ‘मॉडल बिल्डर बायर एग्रीमेंट’ बनाने की मांग की गई है। साथ ही पीठ ने इस मामले में अदालत की मदद करने के लिए वकील देवाशीष भरुका को न्याय मित्र नियुक्त किया है।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि रेरा के लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने 2016 में ‘एग्रीमेंट फॉर सेल’ का मसौदा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा किया था। पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर और कुछ पूर्वोत्तर राज्यों ने अभी तक नियमों को अधिसूचित नहीं किया है। पीठ ने कहा कि फिलहाल न्यायालय को यह अवगत कराया जाना आवश्यक है कि क्या राज्यों द्वारा बनाए गए नियमों में केंद्र द्वारा 2016 में बनाए गए आवश्यक मानदंड शामिल हैं? क्या कोई विचलन तो नही है, जिससे खरीदारों के हित प्रभावित हो रहे हों? पीठ ने केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को इन सभी चीजों की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के लिए हैं।
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उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा कि मॉडल बिल्डर बायर एग्रीमेंट से रियल एस्टेट में पारदर्शिता आएगी और फ्लैट खरीदारों को धोखाधड़ी का सामना नहीं करना पड़ेगा। वर्तमान में रियल एस्टेट के तमाम एग्रीमेंट एकतरफा और मनमाने हैं। इस मामले में केंद्र सरकार ने गत नवंबर में हलफनामा दायर कर कहा था कि घर खरीदारों और प्रमोटरों के अधिकारों और हितों को संतुलित करने के लिए रेरा अधिनियम के प्रावधानों के तहत पहले से ही एक मजबूत नियामक तंत्र और एग्रीमेंट फॉर सेल का मसौदा है ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके और पारदर्शिता रहे। केंद्र ने रेरा की धारा-13 का हवाला देते हुए कहा था कि यह विशेष रूप से एग्रीमेंट फॉर सेल से निपटता है और बगैर एग्रीमेंट फॉर सेल के प्रमोटर को खरीदारों से कोई जमा या अग्रिम स्वीकार करने से प्रतिबंधित करता है।

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