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'मेरे फ्लाइट के सफर के दौरान भी...': जब सुप्रीम कोर्ट में जज ने सुनाया उपद्रवी यात्री से जुड़ा किस्सा, जानें

Tue, 26 Nov 2024 05:29 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 26 Nov 2024 05:29 PM IST
सार

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने यह टिप्पणी एक 73 वर्षीय महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। इस महिला पर नवंबर 2022 को एयर इंडिया के विमान में एक पुरुष यात्री ने नशे की हालत में पेशाब कर दी थी।

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Supreme Court asks Centre for more comprehensive guidelines on unruly flyers Air India urination case
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार और उड्डयन नियामक- नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को नियम न मानने वाले हवाई यात्रियों को नियंत्रित करने लेकर विस्तृत गाइडलाइंस जारी करने का निर्देश दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए कुछ रचनात्मक किए जाने की जरूरत है।
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जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने यह टिप्पणी एक 73 वर्षीय महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। इस महिला पर नवंबर 2022 को एयर इंडिया के विमान में एक पुरुष यात्री ने नशे की हालत में पेशाब कर दी थी। इस घटना के बाद विमानन सेवाओं में उपद्रवी यात्रियों के लिए नियमों को सख्त करने की मांग उठने लगी थी। महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल कर अपील की थी कि वह केंद्र सरकार और डीजीसीए को ऐसे मामलों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने का निर्देश दे।
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बेंच ने इस मामले में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी को संबंधित प्राधिकारणों को इससे जुड़े मानकों पर विचार करने और नियम न मानने वाले यात्रियों को नियंत्रित करने के लिए ठीक ढंग से बदलने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर होना चाहिए।
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जज ने सुनाया फ्लाइट में अपने साथ हुआ किस्सा
इस बीच जस्टिस विश्वनाथ ने जस्टिस सूर्यकांत के साथ अपनी एक यात्रा का वृत्तांत सुनाया। उन्होंने बताया- "मुझे हाल ही में इससे जुड़े अनुभव हुआ। दो यात्री पूरी तरह नशे में थे। एक बाथरूम गया और वहीं सो गया। बाहर मौजूद यात्री के पास उल्टी करने के लिए एक बैग था। पूरा क्रू महिलाओं का था और 30 से 35 मिनट तक कोई भी बाथरूम का दरवाजा नहीं खोल पाया। इसके बाद क्रू ने यात्रियों से अपील की कि वह दरवाजा खुलवाने में उकी मदद करें। यह पूरी फ्लाइट 2 घंटे 40 मिनट लंबी थी।"

जस्टिस विश्वनाथ ने कहा कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए कुछ रचनात्मक किए जाने की जरूरत है। इससे पहले मई, 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में केंद्र और डीजीसीए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसके अलावा एयर इंडिया समेत सभी एयरलाइन कंपनियों को भी मामले में जवाब देने के लिए कहा गया था। 

सुनवाई के दौरान महिला के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास कुछ सुझाव हैं, जिन्हें डीजीसीए लागू कर सकता है। इस पर केंद्र की तरफ से पेश हुए वकील भाटी ने कहा कि इस मामले में एफिडेविट दायर हो चुका है और नियम न मानने वाले यात्रियों को नियंत्रित करने की गाइडलाइंस और सर्कुलर जारी कर दिए गए हैं।

2023 में दायर हुई थी जनहित याचिका
एयर इंडिया केस में महिला ने मार्च 2023 में जनहित याचिका दायर की थी। महिला ने अपनी याचिका में 2014 से लेकर 2023 तक यात्रियों के उपद्रव से जुड़े सात मामलों का जिक्र किया था। उनका कहना था कि दिशा-निर्देशों की गैरमौजूदगी में एयरलाइंस की तरफ से इन मामलों में ठीक से कार्रवाई नहीं की गई।


इस मामले में आरोपी शंकर मिश्र को दिल्ली की एक अदालत ने 31 जनवरी 2023 को कड़ी शर्तों में जमानत दे दी थी। कोर्ट ने मामले में उन्हें सबूतों से छेड़छाड़ न करने के अलावा गवाहों को प्रभावित न करने और बुलाने पर जांच में सहयोग करने के लिए कहा। इसके अलावा उनके कोर्ट से इजाजत के बिना देश छोड़ने पर भी रोक लगा दी गई।
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