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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: अपीलीय अदालत को सजा पर सुनवाई करना अनिवार्य, मामला निचली अदालत को नहीं भेज सकती

Tue, 26 May 2026 08:36 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Tue, 26 May 2026 08:36 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि अपीलीय अदालत किसी आरोपी को पहली बार दोषी ठहराती है तो उसे सजा पर खुद सुनवाई करनी होगी और मामला निचली अदालत को नहीं भेज सकती।

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Supreme Court: Appellate Courts Must Hear Convict on Sentence, Cannot Send Matter Back to Lower Court
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई अपीलीय अदालत किसी आपराधिक मामले में पहली बार किसी आरोपी को दोषी ठहराती है, तो उसे सजा के मुद्दे पर खुद सुनवाई करनी होगी और इस जिम्मेदारी को निचली अदालत पर नहीं छोड़ा जा सकता। यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने की, जिसमें न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई शामिल थे। अदालत ने यह फैसला एक दुष्कर्म मामले में दोषसिद्धि से जुड़े मामले को दोबारा विचार के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय को भेजते हुए दिया।

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'सजा पर सुनवाई अनिवार्य है'
अदालत ने साफ कहा कि जब किसी आरोपी को पहली बार दोषी ठहराया जाता है, तो उसे सजा पर सुनवाई का पूरा अधिकार मिलना चाहिए। पीठ ने कहा "यदि ट्रायल कोर्ट दोषसिद्ध करता है तो CrPC की धारा 235(2) लागू होती है। लेकिन यदि अपीलीय अदालत पहली बार दोषी ठहराती है, तो उसे स्वयं सजा पर सुनवाई करनी होगी।"
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अपीलीय अदालत निचली अदालत को नहीं भेज सकती मामला
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अपीलीय अदालत दोषी ठहराने के बाद सजा तय करने के लिए मामला ट्रायल कोर्ट को नहीं भेज सकती। अदालत ने कहा कि यह CrPC की धारा 386(a) और पहले दिए गए न्यायिक फैसलों के खिलाफ होगा।

कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर टिप्पणी
इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराने के बाद उसे ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होने को कहा था। साथ ही निर्देश दिया था कि ट्रायल कोर्ट ही सजा सुनाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए कहा कि अपीलीय अदालत का यह दायित्व है कि वह स्वयं सजा पर सुनवाई करे और उचित निर्णय दे।

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