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हरियाणाः 1400 एकड़ अधिग्रहण की सीबीआई जांच में सुस्ती से सुप्रीम कोर्ट नाराज

Tue, 03 Dec 2019 06:12 AM IST
संजीव कुमार झा राजीव सिन्हा, अमर उजाला
राजीव सिन्हा, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 03 Dec 2019 06:12 AM IST
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Supreme Court angry over sluggishness in CBI investigation of 1400 acres acquisition
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

हरियाणा में पूर्ववर्ती भूपेन्दर सिंह हुड्डा सरकार द्वारा गुरुग्राम की करीब 1400 एकड़ भूमि अधिग्रहण की चल रही सीबीआई जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कछुआ की गति से चल रही जांच पर शीर्ष अदालत ने कहा कि यह सीबीआई की अफसोसजनक कार्यप्रणाली को दर्शाता है। तत्कालीन हुड्डा सरकार पर आरोप है कि वर्ष 2009 में हुए इस भूमि अधिग्रहण का मकसद बिल्डरों व कॉलोनी बसाने वालों को फायदा पहुंचना था।

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नवंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट को सीबीआई को छह महीने के भीतर इस मामले की जांच करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को यह जांच करने के लिए कहा था कि आखिर जब 1400 एकड़ भूमि केअधिग्रहण प्रस्तावित था तो केवल 87 एकड़ जमीन का ही वास्तविक रूप से अधिग्रहण क्यों हुआ और बाकी जमीनें बिल्डरों और कॉलोनी बसाने वालों को क्यों बेच दी गईं।
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जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने सोमवार को सीबीआई द्वारा जांच में सुस्ती दिखाने पर घोर आपत्ति जताते हुए कहा, % इस मामले में सीबीआई केजांच के रवैये से हम बेहद नाखुश हैं। जांच में देरी हो रही है। अगर अदालत की निगरानी में चल रही जांच की यह स्थिति है तो सीबीआई द्वारा की जा रही अन्य मामलों की जांच का क्या होगा।’
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गत शुक्रवार को हुई पिछली सुनवाई पर पीठ ने सीबीआई केदो अधिकारियों से बातचीत की थी और पाया कि उनका पक्ष विरोधाभासी था। सीबीआई ने जांच का काम पूरा करने के लिए और चार महीने का वक्त देने की मांग की थी। जिस पर पीठ ने वरिष्ठ अधिकारी को तलब करते हुए कहा था कि सीबीआई इस मामले में समय मांगने केअलावा कुछ नहीं कर रही है।

सोमवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह स्वीकार किया कि इस मामले में एजेंसी की गलती है। मेहता ने कहा कि इसमें कुछ गलतियां है लिहाजा उच्च स्तर पर इसकेपरीक्षण की दरकार है।


मेहता ने पीठ को भरोसा दिलाया कि इस मसले को गंभीरता से लिया जाएगा। जिस पर पीठ ने सीबीआई निदेशक को निजी तौर पर इस मामले का गौर करने के लिए कहा है। पीठ ने यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि मुनासिब समय के भीतर जांच का काम पूरा हो।

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