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सुप्रीम कोर्ट: वायु गुणवत्ता आयोग को निर्माण गतिविधियों और फैक्टरियों पर प्रतिबंध हटाने पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी

Fri, 10 Dec 2021 10:08 PM IST
गौरव पाण्डेय राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 10 Dec 2021 10:08 PM IST
सार

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार दिखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में निर्माण कार्यों और फैक्टरियों पर प्रतिबंध को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को फैसला लेने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने इस काम के लिए आयोग को सात दिन का समय दिया है।

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Supreme Court allowed Commission on Air Quality Management to take decision on removing ban on factories and construction sites after improvement
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को एक सप्ताह के भीतर निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक गतिविधियों पर प्रतिबंध हटाने पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी है। देश के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण, न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि हम आयोग को उनके सर्कुलर (परिपत्रों) और हमारे आदेशों के आधार पर विभिन्न उद्योगों और संगठनों के अनुरोधों की जांच करने का निर्देश देते हैं। 

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पीठ ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि आयोग एक सप्ताह के समय में इस पर गौर करेगा।' इसके साथ ही पीठ ने आयोग को संबंधित राज्यों से परामर्श कर स्कूलों को फिर से खोलने पर विचार करने के लिए भी कहा है। पीठ ने यह कहते हुए दिल्ली की वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार को ध्यान में रखते हुए बिल्डर्स फोरम, चीनी, चावल और पेपर मिलों आदि के संचालकों की ओर से दाखिल हस्तक्षेप आवेदन क्षेत्र का निपटारा किया।
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हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण प्रतिबंध की अवधि के दौरान श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी के भुगतान से संबंधित एक आवेदन को बरकरार रखा है। न्यायालय ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों को निर्माण प्रतिबंध की अवधि के दौरान मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी के भुगतान के निर्देश के आदेश के अनुपालन को लेकर हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है। 
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इससे पहले बीती तीन दिसंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से लिए गए निर्णयों पर ध्यान दिया था और केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को वायु प्रदूषण से निपटने के लिए इन्हें लागू करने का निर्देश दिया था। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जारी निर्देशों को लागू नहीं करने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आलोचनात्मक टिप्पणियों के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पिछली सुनवाई से एक दिन पहले कई फैसले लिए थे। 

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को आयोग की ओर से टास्क फोर्स और उड़न दस्ते के गठन सहित लिए गए निर्णयों से अवगत कराया था।

उधर, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में फैक्टरियों और निर्माण स्थलों समेत 1534 स्थानों की 40 उड़न दस्तों के माध्यम से जांच की गई है। आयोग ने कहा कि वायु प्रदूषण में कमी लाने के लिए 228 स्थलों को बंद करने का नोटिस जारी किया गया है जबकि 111 स्थल पहले से बंद हैं। आयोग ने शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दाखिल कर यह जानकारी साझा की।

इस हलफनामे में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्यों और अन्य अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद इसकी ओर से किए जा रहे छोटे समय के लिए और लंबी अवधि के उपायों का विवरण भी दिया गया है। हलफनामे में बताया गया है कि केंद्र सरकार की ओर से जानकारी दी गई है कि बिजली की स्थिति को देखते हुए 15 दिसंबर के बाद दिल्ली-एनसीआर के पास थर्मल पावर को बंद रख पाना संभव नहीं होगा।

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