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Supreme Court: APPSC सदस्य मेपुंग तदर के खिलाफ नहीं मिले दुराचार के सबूत, निलंबन को तुरंत हटाने का आदेश

Thu, 28 Aug 2025 11:39 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 28 Aug 2025 11:39 PM IST
सार

अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की सदस्य मेपुंग तदर बागे को सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक मामले में क्लीन चिट दी है। कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ कोई दुराचार साबित नहीं हुआ। संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत सुनवाई करते हुए कोर्ट ने निलंबन तुरंत हटाने और सभी लाभ देने का आदेश दिया है।

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Supreme Cour finds no misbehaviour charge against Arunachal public service commission member Mepung Tadar Bage
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (एपीपीपीएससी) की सदस्य मेपुंग तदर बागे के खिालाफ पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने पेपर लीक मामले में तदर के खिलाफ कोई दुराचार का प्रमाण नहीं पाया, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने उनके निलंबन को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जेके महेश्वरी और अरविंद कुमार की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत राष्ट्रपति को भेजे गए संदर्भ का जवाब देते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं।

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मामले में कोर्ट की अहम टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि आरोपों से ये साबित नहीं होता कि उन्होंने कोई दुराचार किया है। ये तो किसी सामान्य लापरवाही की श्रेणी में भी नहीं आता। उनके कामकाज से आयोग की छवि को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजी जाएगी कि मेपुंग ताडर बागे पर लगाए गए आरोप ‘दुराचार’ की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए उन्हें हटाने का कोई आधार नहीं बनता।
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राज्य सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
इस दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रपति से बागे को हटाने की सिफारिश मनमानी, अनुचित और भेदभावपूर्ण थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जब पेपर लीक का मामला सामने आया, तो आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया।

हालांकि इनमें से कुछ को बाद में राज्य सरकार ने अन्य सरकारी पदों पर नियुक्त कर दिया, जैसे कि सूचना आयुक्त और निजी शैक्षिक संस्थान नियामक आयोग के अध्यक्ष। कोर्ट ने कहा कि अगर इन सदस्यों पर संदेह था, तो उन्हें नई जिम्मेदारियां देना अपने आप में दर्शाता है कि उनके खिलाफ कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं था।

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