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Supertech Twin Tower Case: सुपरटेक के ट्विन टावर को ढहाने वाली एजेंसी का नाम फाइनल, सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी
Mon, 17 Jan 2022 07:06 PM IST
अभिषेक दीक्षित
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 17 Jan 2022 07:06 PM IST
सार
पीठ ने उस प्रस्ताव को मंजूर करते हुए सुपरटेक को एक सप्ताह के भीतर विध्वंस एजेंसी 'एडिफिस' के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर करने का निर्देश दिया है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के नोएडा अथॉरिटी को 17 जनवरी तक उस एजेंसी का नाम बताने के लिए कहा था, जिसे ट्विन टावर को गिराने का काम दिया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : Social Media
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विस्तार
नोएडा अथॉरिटी ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सुपरटेक के एमराल्ड कोर्ट हाउसिंग प्रोजेक्ट के ट्विन टावरों को ढहाने के लिए 'एडिफिस' नामक एजेंसी को चुना गया है। शीर्ष अदालत ने नोएडा अथॉरिटी के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नोएडा अथॉरिटी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रविंदर कुमार ने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ को बताया कि ट्विन टावर को गिराने के लिए एडिफिस नामक एजेंसी का चयन किया गया है।
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पीठ ने उस प्रस्ताव को मंजूर करते हुए सुपरटेक को एक सप्ताह के भीतर विध्वंस एजेंसी 'एडिफिस' के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर करने का निर्देश दिया है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के नोएडा अथॉरिटी को 17 जनवरी तक उस एजेंसी का नाम बताने के लिए कहा था, जिसे ट्विन टावर को गिराने का काम दिया जाएगा।
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सुपरटेक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पराग त्रिपाठी ने पीट को सूचित किया कि वह नोएडा प्राधिकरण द्वारा ढहाने के काम को अंजाम देने के लिए तय की गई एजेंसी पर सहमत हो गया है। त्रिपाठी ने कहा कि फिलहाल वह विध्वंस के लिए एनओसी लेने की प्रक्रिया में हैं। सुपरटेक ने शीर्ष अदालत को यह भी सूचित किया कि वह उन घर खरीदारों के लिए धनवापसी प्रक्रिया शुरू करेगी जिनके फ्लैटों को ध्वस्त किया जाना है। सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को सुपरटेक को 17 जनवरी तक घर खरीदारों को पैसा वापस करने की चेतावनी दी थी।
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रियल एस्टेट कंपनी ने अदालत को बताया कि उसने घर खरीदारों से उनके खाते का विवरण मांगा है और वह मंगलवार (18 जनवरी) की सुबह से पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर देगी। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें भवन मानदंडों के उल्लंघन के लिए सुपरटेक के नोएडा एक्सप्रेस स्थित एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के 40 मंजिले ट्विन टावर-16 (अपेक्स) और 17(स्यान) को ढहाने का आदेश दिया गया था।
सुपरटेक को तीन महीने के भीतर टावरों को गिराने का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया था। ढहाने का कार्य नोएडा के अधिकारियों की देखरेख में होने की बात कही गई थी। सुपरटेक को इस मद होने वाले खर्च का वहन करने के लिए कहा गया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक को दो महीने के भीतर ट्विन टावरों के फ्लैट खरीदारों को 12 फीसदी प्रति वर्ष ब्याज के साथ राशि वापस करने का निर्देश दिया था। इसके अलावा कोर्ट ने बिल्डर को एक महीने के भीतर एमरॉल्ड कोर्ट ओनर रेजिडेंट्स वेलफेयर असोसिएशन को हर्जाने के तौर पर दो करोड़ रुपए का भुगतान करने का भी निर्देश दिया था।