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Menopause: किशोरियां भी हो रहीं मेनोपॉज की शिकार, माहवारी बंद होने की उम्र घट रही; हो रहा और क्या असर?
सार
नए अध्ययनों में सामने आया है कि समय से पहले मेनोपॉज के मामले किशोरियों में भी दर्ज हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक अनियमित या बंद पीरियड्स को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे भविष्य में प्रजनन क्षमता, हड्डियों और हृदय स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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मेनोपॉज
- फोटो : Meta AI
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विस्तार
मेनोपॉज यानी महिलाओं की माहवारी बंद होने की उम्र लगातार घट रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे केवल 30-40 साल की महिलाओं की समस्या मानना गलत होगा। ऐसे मामले अब 13 साल तक की किशोरियों में भी सामने आने लगे हैं। किशोरियों में मेनोपॉज की बीमारी दुर्लभ भले ही हो लेकिन सही समय पर ध्यान न देने पर आगे चलकर उनकी मां बनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
यह चिंताजनक तस्वीर एक नए अध्ययन में सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि किसी लड़की के पीरियड्स अगर बार-बार अनियमित हों या कई महीनों बंद रहें तो इसे केवल उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यूनान की नेशनल एंड कपोडिस्ट्रियन यूनिवर्सिटी ऑफ एथेंस की डॉ. एलेनी आर्मेनी का रिव्यू अध्ययन कहता है, अगर अंडाशय समय से पहले काम करना बंद कर दें तो भविष्य में मां बनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। साथ ही हड्डियां कमजोर होने और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है।
अमेरिका के छह बड़े चिकित्सा संस्थानों में किए गए अध्ययन में 13 से 21 वर्ष की लड़कियों में इसके मामले दर्ज किए गए। शोधकर्ताओं ने पाया, कई लड़कियों में बीमारी की पहचान देर से हुई, क्योंकि शुरुआती लक्षणों को सामान्य हार्मोनल बदलाव मान लिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, अगर किसी किशोरी के लगातार चार या उससे महीनों तक पीरियड्स न आएं, या बार-बार अनियमित रहे, तो हार्मोन जांच के साथ जेनेटिक, ऑटोइम्यून और अन्य जरूरी परीक्षण कराए जाने चाहिए। समय पर इलाज से हड्डियों और हृदय को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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55% तक बढ़ा हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा
अगर किसी महिला का मेनोपॉज 40 साल की उम्र से पहले हो जाता है, तो भविष्य में उसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में काफी अधिक हो सकता है।
अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं में मेनोपॉज 50-51 वर्ष की सामान्य उम्र की बजाय 40 वर्ष से पहले हुआ, उनमें पहली बार हृदय रोग होने का खतरा 55% अधिक था। वहीं 40-44 वर्ष के बीच मेनोपॉज होने पर यह खतरा 30% और 45-49 वर्ष के बीच होने पर 12% अधिक पाया गया।
ये भी पढ़ें: एफडीआई: भारत ने लगाई दो पायदान की छलांग: निवेश 44 प्रतिशत बढ़कर 39 अरब डॉलर पहुंचा
महिलाओं पर हिंसा से 20 माह पहले शुरू हो सकता है मेनोपॉज
कभी अपने जीवन में हिंसा की शिकार रही महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान ज्यादा गंभीर लक्षणों का सामना करना पड़ता है। यही नहीं अन्य महिलाओं की तुलना में उन्हें मेनोपॉज लगभग 20 महीने पहले आ सकता है। एक अन्य अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। मैटुरिटास नामक जर्नल में प्रकाशित यह शोध दिखाता है कि महिलाओं के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा का असर उन्हें अधेड़ उम्र तक झेलना पड़ता है।
स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रेनाडा के शोधकर्ताओं के मुताबिक, हिंसा की शिकार महिलाएं मेनोपॉज के दौरान बार-बार हॉट फ्लैशेस (अचानक तेज गर्मी लगना) और रात में पसीना आने जैसी समस्याओं का सामना करती है। ऐसी महिलाओं में घबराहट, डिप्रेशन, अनिद्रा के लक्षण भी दिखते हैं। इससे समय से पहले अंडाशय के काम बंद करने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
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यह चिंताजनक तस्वीर एक नए अध्ययन में सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि किसी लड़की के पीरियड्स अगर बार-बार अनियमित हों या कई महीनों बंद रहें तो इसे केवल उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यूनान की नेशनल एंड कपोडिस्ट्रियन यूनिवर्सिटी ऑफ एथेंस की डॉ. एलेनी आर्मेनी का रिव्यू अध्ययन कहता है, अगर अंडाशय समय से पहले काम करना बंद कर दें तो भविष्य में मां बनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। साथ ही हड्डियां कमजोर होने और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है।
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अमेरिका के छह बड़े चिकित्सा संस्थानों में किए गए अध्ययन में 13 से 21 वर्ष की लड़कियों में इसके मामले दर्ज किए गए। शोधकर्ताओं ने पाया, कई लड़कियों में बीमारी की पहचान देर से हुई, क्योंकि शुरुआती लक्षणों को सामान्य हार्मोनल बदलाव मान लिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, अगर किसी किशोरी के लगातार चार या उससे महीनों तक पीरियड्स न आएं, या बार-बार अनियमित रहे, तो हार्मोन जांच के साथ जेनेटिक, ऑटोइम्यून और अन्य जरूरी परीक्षण कराए जाने चाहिए। समय पर इलाज से हड्डियों और हृदय को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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55% तक बढ़ा हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा
अगर किसी महिला का मेनोपॉज 40 साल की उम्र से पहले हो जाता है, तो भविष्य में उसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में काफी अधिक हो सकता है।
अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं में मेनोपॉज 50-51 वर्ष की सामान्य उम्र की बजाय 40 वर्ष से पहले हुआ, उनमें पहली बार हृदय रोग होने का खतरा 55% अधिक था। वहीं 40-44 वर्ष के बीच मेनोपॉज होने पर यह खतरा 30% और 45-49 वर्ष के बीच होने पर 12% अधिक पाया गया।
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महिलाओं पर हिंसा से 20 माह पहले शुरू हो सकता है मेनोपॉज
कभी अपने जीवन में हिंसा की शिकार रही महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान ज्यादा गंभीर लक्षणों का सामना करना पड़ता है। यही नहीं अन्य महिलाओं की तुलना में उन्हें मेनोपॉज लगभग 20 महीने पहले आ सकता है। एक अन्य अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। मैटुरिटास नामक जर्नल में प्रकाशित यह शोध दिखाता है कि महिलाओं के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा का असर उन्हें अधेड़ उम्र तक झेलना पड़ता है।
स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रेनाडा के शोधकर्ताओं के मुताबिक, हिंसा की शिकार महिलाएं मेनोपॉज के दौरान बार-बार हॉट फ्लैशेस (अचानक तेज गर्मी लगना) और रात में पसीना आने जैसी समस्याओं का सामना करती है। ऐसी महिलाओं में घबराहट, डिप्रेशन, अनिद्रा के लक्षण भी दिखते हैं। इससे समय से पहले अंडाशय के काम बंद करने का जोखिम भी बढ़ जाता है।