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आत्मसम्मान के लिए दर-दर भटक रहे हैं ले. शत्रुघ्न सिंह चौहान को जगी उम्मीद
शशिधर पाठक/नई दिल्ली
Updated Mon, 13 Feb 2017 07:01 PM IST
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एस एस चौहान
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26 साल से न्याय के लिए भटक रहे सेकेंड लेफ्टिनेंट शत्रुघ्न सिंह चौहान को लखनऊ की सैन्य न्यायाधिकरण बेंच ने न्याय तो दे दिया है, लेकिन अपना आत्मसम्मान वापस पाने के लिए वह अभी दर-दर भटक रहे हैं। लेफ्टिेनेंट चाहते हैं सरकार एक बार एक दिन के लिए ही सही सेना के मेजर जनरल वर्दी पहनाकर उन्हें सम्मान दे दे। उन्हें न्यायालय द्वारा आदेश में दिया गया मुआवजा और आदर देकर ससम्मान सेना रिटायर कर दे।
ले. चौहान इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दरबार में गुहार लगा चुके हैं। वह रक्षा मंत्रालय के सामने अपनी अर्जी रख चुके हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी आग्रह कर चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि शीर्ष स्तर लेफ्टिनेंट शत्रुघ्न सिंह चौहान को न्याय और आत्मसम्मान देने का भरोसा दिया जा चुका है। रक्षा मंत्रालय ने सेना मुख्यालय को ले. शत्रुघ्न सिंह चौहान के प्रकरण में लखनऊ की सैन्य न्यायाधिकरण बेंच के फैसले पर गौर करने को कहा है।
माना जा रहा है कि सेना मुख्यालय फैसले का अध्ययन करने के बाद कानूनी सलाह लेने के साथ-साथ शत्रुघन सिंह चौहान को न्याय देने के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर गोवा विधानसभा चुनाव में व्यस्त थे। राज्य में मतदान होने के बाद से वह दिल्ली में हैं और अब इस मामले में तोजी से प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
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ले. चौहान इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दरबार में गुहार लगा चुके हैं। वह रक्षा मंत्रालय के सामने अपनी अर्जी रख चुके हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी आग्रह कर चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि शीर्ष स्तर लेफ्टिनेंट शत्रुघ्न सिंह चौहान को न्याय और आत्मसम्मान देने का भरोसा दिया जा चुका है। रक्षा मंत्रालय ने सेना मुख्यालय को ले. शत्रुघ्न सिंह चौहान के प्रकरण में लखनऊ की सैन्य न्यायाधिकरण बेंच के फैसले पर गौर करने को कहा है।
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माना जा रहा है कि सेना मुख्यालय फैसले का अध्ययन करने के बाद कानूनी सलाह लेने के साथ-साथ शत्रुघन सिंह चौहान को न्याय देने के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर गोवा विधानसभा चुनाव में व्यस्त थे। राज्य में मतदान होने के बाद से वह दिल्ली में हैं और अब इस मामले में तोजी से प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
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क्या है मामला
एस एस चौहान
क्या है मामला
मामला 11 अप्रैल 1990 का है। लेफ्टिनेंट चौहान सीओ के आदेश पर अपनी टुकड़ी के साथियों के साथ श्रीनगर के लक्ष्मणपुरा बटमालू में घर-घर तलाशी ले रहे थे। इस दौरान उन्हें मस्जिद के लंगड़ा इमाम के यहां से 147 सोने के बिस्कुट(27.5 किग्रा) मिला। सोने के बिस्कुटों पर जॉनसन मैथ्यू बैंक, बैंक ऑफ लंदन की मुहर थी। लेफ्टिनेंट इसे लेकर आए और अपने सीओ और कर्नल केआरएस पंवार को इसकी जानकारी दी। सीओ, कर्नल केआरएस पंवार ने इसके बाद लेफ्टिेनेंट को दूसरे मिशन पर भेज दिया।
लेफ्टिेनेंट चौहान के जाने के बाद कर्नल पंवार ने साथियों के साथ बिस्कुट की बरामदगी का प्रदर्शन किया, रात में जश्न मनाया गया, सीओ जीओसी के निर्देश पर उनसे मिलने भी गए और बाद में सभी ने बिस्कुटों की बरामदगी होने से ही इनकार दिया। इतना ही नहीं सोने के बिस्कुट की बरामदगी की सूचना पुलिस को भी नहीं दी गई और लेफ्टिनेंट को इस बरामदगी का कहीं जिक्र न करने का दबाव भी बनाया गया।
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। लेफ्टिनेंट चौहान जब नहीं माने और इसकी शिकायत कर दी तो उनके अंतहीन सैन्य उत्पीडऩ का सिलसिला शुरू हो गया। कोर्ट मार्शल, जानलेवा हमला, सेना से भगोड़ा घोषित करना, बर्खास्तगी और न जाने क्या-क्या।
मामला 11 अप्रैल 1990 का है। लेफ्टिनेंट चौहान सीओ के आदेश पर अपनी टुकड़ी के साथियों के साथ श्रीनगर के लक्ष्मणपुरा बटमालू में घर-घर तलाशी ले रहे थे। इस दौरान उन्हें मस्जिद के लंगड़ा इमाम के यहां से 147 सोने के बिस्कुट(27.5 किग्रा) मिला। सोने के बिस्कुटों पर जॉनसन मैथ्यू बैंक, बैंक ऑफ लंदन की मुहर थी। लेफ्टिनेंट इसे लेकर आए और अपने सीओ और कर्नल केआरएस पंवार को इसकी जानकारी दी। सीओ, कर्नल केआरएस पंवार ने इसके बाद लेफ्टिेनेंट को दूसरे मिशन पर भेज दिया।
लेफ्टिेनेंट चौहान के जाने के बाद कर्नल पंवार ने साथियों के साथ बिस्कुट की बरामदगी का प्रदर्शन किया, रात में जश्न मनाया गया, सीओ जीओसी के निर्देश पर उनसे मिलने भी गए और बाद में सभी ने बिस्कुटों की बरामदगी होने से ही इनकार दिया। इतना ही नहीं सोने के बिस्कुट की बरामदगी की सूचना पुलिस को भी नहीं दी गई और लेफ्टिनेंट को इस बरामदगी का कहीं जिक्र न करने का दबाव भी बनाया गया।
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। लेफ्टिनेंट चौहान जब नहीं माने और इसकी शिकायत कर दी तो उनके अंतहीन सैन्य उत्पीडऩ का सिलसिला शुरू हो गया। कोर्ट मार्शल, जानलेवा हमला, सेना से भगोड़ा घोषित करना, बर्खास्तगी और न जाने क्या-क्या।
पहले भी लगा चुके हैं गुहार
एस एस चौहान
पहले भी लगा चुके हैं गुहार
लेफ्टिनेंट शत्रुघ्न सिंह चौहान 1990 से ही न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। वह पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीज से लेकर एके एंटनी के दरबार में कई बार गुहार लगा चुके हैं। राष्ट्रपति से लेकर संसद की लोक शिकायत समिति से भी आत्मसम्मान पाने की गुहार कर चुके हैं, लेकिन अभी तक अपना पूरा आत्मसम्मान नहीं पा सके हैं।
सैन्य न्यायाधिकरण ने दिया सम्मान
पिछले महीने लखनऊ सैन्य न्यायाधिकरण बेंच ने लेफ्टिनेंट शत्रुघन सिंह चौहान को मामले की सुनवाई के बाद निर्दोष पाया। लेफ्टिनेंट को अदालत की जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और जस्टिस अनिल चोपड़ा की बेंच ने निर्दोष मानते हुए उनका आत्मसम्मान लौटाने के क्रम में पिछला वेतन, क्रमवार प्रमोशन और पद पर बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने मुआवजे के तौर पर रक्षा मंत्रालय और सेनाध्यक्ष को चार करोड़ रुपये लेफ्टिनेंट चौहान को अदा करने तथा एक करोड़ रुपये केन्द्रीय सैनिक कल्याण बोर्ड में देने का आदेश दिया है।
अमर उजाला ने दी प्रमुखता
लेफ्टिनेंट शत्रुघ्न सिंह चौहान के साथ सेना में हुए अन्याय को अमर उजाला ने हमेशा सच प्रकाशित किया। लेफ्टिनेंट इसके लिए अमर उजाला का आभार प्रकट करना नहीं भूलते। लेफ्टिनेंट चौहान के मामले को रक्षा मंत्री एंटनी के कार्यकाल में भी अमर उजाला ने (लेफ्टिनेंट को चाहिए न्याय के कॉलम के साथ )प्रमुखता से उठाया था। तब चौहान एंटनी से मिले भी थे, लेकिन न्याया नहीं पा सके थे।
लेफ्टिनेंट शत्रुघ्न सिंह चौहान 1990 से ही न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। वह पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीज से लेकर एके एंटनी के दरबार में कई बार गुहार लगा चुके हैं। राष्ट्रपति से लेकर संसद की लोक शिकायत समिति से भी आत्मसम्मान पाने की गुहार कर चुके हैं, लेकिन अभी तक अपना पूरा आत्मसम्मान नहीं पा सके हैं।
सैन्य न्यायाधिकरण ने दिया सम्मान
पिछले महीने लखनऊ सैन्य न्यायाधिकरण बेंच ने लेफ्टिनेंट शत्रुघन सिंह चौहान को मामले की सुनवाई के बाद निर्दोष पाया। लेफ्टिनेंट को अदालत की जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और जस्टिस अनिल चोपड़ा की बेंच ने निर्दोष मानते हुए उनका आत्मसम्मान लौटाने के क्रम में पिछला वेतन, क्रमवार प्रमोशन और पद पर बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने मुआवजे के तौर पर रक्षा मंत्रालय और सेनाध्यक्ष को चार करोड़ रुपये लेफ्टिनेंट चौहान को अदा करने तथा एक करोड़ रुपये केन्द्रीय सैनिक कल्याण बोर्ड में देने का आदेश दिया है।
अमर उजाला ने दी प्रमुखता
लेफ्टिनेंट शत्रुघ्न सिंह चौहान के साथ सेना में हुए अन्याय को अमर उजाला ने हमेशा सच प्रकाशित किया। लेफ्टिनेंट इसके लिए अमर उजाला का आभार प्रकट करना नहीं भूलते। लेफ्टिनेंट चौहान के मामले को रक्षा मंत्री एंटनी के कार्यकाल में भी अमर उजाला ने (लेफ्टिनेंट को चाहिए न्याय के कॉलम के साथ )प्रमुखता से उठाया था। तब चौहान एंटनी से मिले भी थे, लेकिन न्याया नहीं पा सके थे।