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विदेश में आतंकी हमलों की जांच कर सकेगी एनआईए, सबसे पहले हो सकती है श्रीलंका हमले की पड़ताल

Sun, 28 Jul 2019 05:01 PM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Sun, 28 Jul 2019 05:01 PM IST
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Sri Lanka Easter bombings is a first case for the NIA after Parliament amended an Act
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अब देश ही नहीं बल्कि देश के बाहर होने वाले आतंकवादी हमलों की जांच कर सकेगी। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण संशोधन विधेयक 2019 पारित होने के बाद एजेंसी को यह अधिकार मिला है। माना जा रहा है कि एजेंसी इस अधिकार का सबसे पहला इस्तेमाल श्रीलंका में हुए आतंकी हमले की जांच में करेगी।

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अधिकारियों ने बताया कि संसद ने कानून में संशोधन कर एनआईए को अतिरिक्त शक्तियां दी गई हैं, जिसमें विदेशों में हुए आतंकी हमलों की जांच करना शामिल किया गया है। संशोधित अधिनियम एनआईए को भारतीय नागरिकों और विदेशों में भारतीय हितों को निशाना बनाकर किए गए आतंकवादी हमलों की जांच करने का अधिकार देता है।
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17 जुलाई को इस विधेयक को राज्यसभा से मंजूरी मिली थी। कानून मंत्रालय ने 25 जुलाई को इस संबंध में अधिसूचना जारी की थी। लोकसभा ने पहले ही इस विधेयक को मंजूरी दे दी थी। हालांकि लोकसभा में इस संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान खूब बहस हुई थी। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने आरोप लगाया था कि एनआईए, यूएपीए और आधार जैसे कानूनों में संशोधन कर सरकार भारत को पुलिस स्टेट में बदलना चाहती है। तिवारी ने कहा था कि जांच एजेंसियों का 'राजनीतिक बदले' के लिए दुरुपयोग किया जाता है। 

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सबसे पहले श्रीलंका धमाकों की जांच कर सकती है एनआईए

माना जा रहा है कि संसद द्वारा संशोधन विधायक को मंजूरी दिए जाने के बाद एजेंसी सबसे पहले ईस्टर के मौके पर हुए श्रीलंका धमाकों की जांच कर सकती है।  बता दें कि 21 अप्रैल को श्रीलंका में नौ आत्मघाती हमलावरों ने सिलसिलेवार बम विस्फोटों को अंजाम दिया था। इन हमलों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। ईस्टर हमले से पहले भारत ने श्रीलंका को सतर्क किया था कि आईएसआईएस के आतंकवादी वहां हमला करने की साजिश रच रहे हैं।

बता दें कि एनआईए के दो सदस्यीय दल ने मई में श्रीलंका का दौरा किया था। वहां अधिकारियों से उन दावों के बारे में चर्चा की गई थी, जिनमें कहा गया था कि आतंकी संगठन आईएसआईएस के कुछ आतंकियों मे कश्मीर समेत भारत की यात्रा की थी। मामले से जुड़े गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अभी अपने अधिकार क्षेत्र में न होने के चलते एनआईए इस संबंध में कोई मामला दर्ज नहीं कर पाई है, लेकिन संशोधित कानून के साथ एजेंसी अब इसकी जांच कर सकती है। 

संशोधन ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी को दिया यह अधिकार

इस विधेयक के उद्देश्यों व कारणों में कहा गया है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण संशोधन विधेयक 2019 उपबंध करता है कि अधिनियम की धारा एक की उपधारा दो में नया खंड ऐसे व्यक्तियों पर अधिनियम के उपबंध लागू करने के लिए है जो भारत के बाहर भारतीय नागरिकों के विरुद्ध या भारत के हितों को प्रभावित करने वाला कोई अनुसूचित अपराध करते हैं। 

अधिनियम की धारा तीन की उपधारा दो का संशोधन करके एनआईए के अधिकारियों को वैसी शक्तियां, कर्तव्य, विशेषाधिकार और दायित्व प्रदान करने की बात कही गई है जो अपराधों के अन्वेषण के संबंध में पुलिस अधिकारियों द्वारा न केवल भारत में बल्कि भारत के बाहर भी प्रयोग की जाती रही हैं।

इसमें भारत से बाहर किसी अनुसूचित अपराध के संबंध में एजेंसी को मामले का पंजीकरण और जांच का निर्देश देने का प्रावधान किया गया है। इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अधिनियम के अधीन अपराधों के विचारण के मकसद से एक या अधिक सत्र अदालत, या विशेष अदालत स्थापित करें। 

हाल ही में हुए संशोधन से एनआईए को मानव तस्करी, जाली मुद्रा, प्रतिबंधित हथियारों के निर्माण या बिक्री, साइबर आतंकवाद और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत अपराधों से संबंधित जांच करने की शक्ति मिली है। संशोधनों के अनुसार नई दिल्ली में एक विशेष अदालत ऐसे मामलों को देखेगी।

आतंकवाद के खात्मे के लिए इस्तेमाल होगा यह कानून : शाह

लोकसभा में इस संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस द्वारा सवाल खड़े किए जाने पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि इस कानून का इस्तेमाल शुद्ध रूप से आतंकवाद को खत्म करने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि भाजपा सरकार एनआईए कानून का दुरुपयोग करने की न तो इच्छा रखती है और न ही ऐसी कोई मंशा है। 

शाह ने कहा था कि यह कानून एनआईए को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की ताकत देगा। उन्होंने कहा था कि यह समझना होगा कि श्रीलंका में हमला हुआ, हमारे लोग मारे गए, बांग्लादेश में हमारे लोग मारे गए। लेकिन देश से बाहर जांच करने का अधिकार एजेंसी को नहीं है। ऐसे में यह संशोधन एजेंसी को यह महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान करेगा। 

यह है श्रीलंका हमले की जांच का अब तक का ब्योरा

अधिकारियों का कहना है कि एनआई को जांच के दौरान नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) के नेता जहरान हाशिम के कई वीडियो मिले थे। इनमें वह कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग और धार्मिक स्थलों पर हमला करने के संकेत दे रहा है। हाशिम उन्हीं नौ आत्मघाती हमलावरों में से एक है, जिन्होंने श्रीलंका को दहला दिया था। वीडियो में हाशिम श्रीलंका, तमिलनाडु और केरल के युवाओं से क्षेत्र में इस्लामी शासन स्थापित करने की बात कर रहा है।

श्रीलंका में हुए हमलों के बाद एनआईए ने केरल के पलक्कड़ के रहने वाले 29 वर्षीय रियास ए को गिरफ्तार किया था। रियास को रियास अबूबकर और अबू दुजाना के नाम से भी जाना जाता है। रियास पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए हाशिम से जुड़े रहने का आरोप था। जांच के दौरान रियास ने बताया कि वह कई सालों से हाशिम के भाषणों को फॉलो कर रहा था और विवादों में रहने वाले इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के वीडियो को भी फॉलो करता है, जो इस वक्त इंडोनेशिया में है। केंद्रीय एजेंसी से मिले इनपुट के मुताबिक हाशिम ने बीते साल भारत में भी समय बिताया था। इस दौरान उसने तमिलनाडु और केरल के युवकों को खुद से जुड़ने के लिए प्रेरित किया था।

श्रीलंका के लेफ्टिनेंट जनरल महेश सेनानायके का कहना है कि श्रीलंका सेना के कमांडर जनरल ने दावा किया था कि आत्मघाती हमलावरों ने भारत के जम्मू कश्मीर सहित कई शहरों की यात्रा की थी। उन्होंने एक समाचार वेबसाइट से मई माह में कहा था, 'वह (संदिग्ध) भारत गए थे, वो कश्मीर, बंगलूरू गए थे, वो केरल राज्य में भी गए थे। ये जानकारी हमारे पास उपलब्ध है।' हालांकि जम्मू कश्मीर पुलिस ने इन दावों को खारिज कर दिया था और श्रीलंका से इस बारे में और जानकारी साझा करने को कहा था।

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