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चिंताजनक: भारत में समय से पहले खत्म हुआ वसंत, मार्च में गुलाबी ठंड गायब, भविष्य में हालात और बिगड़ने के आसार

Tue, 19 Mar 2024 07:03 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 19 Mar 2024 07:03 AM IST
सार

शोधकर्ताओं के अनुसार, सिकुड़ता वसंत आने वाले समय में पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नई चुनौतियां उत्पन्न कर सकता है। इस वर्ष उत्तर भारत में जनवरी में ठंड के साथ कुछ दिन हल्की गर्मी का भी अहसास किया गया था। वहीं, फरवरी में ही तेज गर्मी के साथ मार्च में रहने वाली गुलाबी ठंड गायब रही।

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Spring ended prematurely in India light cold disappeared in March
गुलाबी ठंड - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत में सर्दियों का मौसम तेजी से गर्म होता जा रहा है और वसंत ऋतु की अवधि भी लगातार सिकुड़ती जा रही है। देश के कई हिस्सों में वसंत गायब हो चुका है। अमेरिका स्थित क्लाइमेट सेंट्रल के शोधकर्ताओं के शोध में यह जानकारी सामने आई है। शोधकर्ताओं ने 1970 के बाद तापमान के आंकड़ों से ग्लोबल वार्मिंग को लेकर भारत के संदर्भ में विश्लेषण किया है। 

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शोधकर्ताओं के अनुसार, सिकुड़ता वसंत आने वाले समय में पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नई चुनौतियां उत्पन्न कर सकता है। इस वर्ष उत्तर भारत में जनवरी में ठंड के साथ कुछ दिन हल्की गर्मी का भी अहसास किया गया था। वहीं, फरवरी में ही तेज गर्मी के साथ मार्च में रहने वाली गुलाबी ठंड गायब रही। हालांकि, कुछ दिन हल्की ठंड पड़ी, लेकिन मौसम आमतौर पर गर्म रहा। इसका असर फरवरी, मार्च में फूलों के खिलने की प्रक्रिया में देखा गया। इस मौसम के फूल गेंदा, कनेर, गुड़हल, गुलाब में तीव्र बदलाव देखने को मिला, पैदावार कम हुई।

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3 डिग्री तक तापमान सदी के अंत तक बढ़ने की चेतावनी
जीवाश्म ईंधन के जलने के कारण वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में औद्योगिक क्रांति का अहम योगदान रहा है। जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि विश्व में औसत तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 43 फीसदी की कटौती करनी होगी। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा स्थिति जारी रही तो सदी के अंत तक दुनिया का तापमान लगभग 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा।

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जनवरी-फरवरी के तापमान में 2 डिग्री का अंतर
अध्ययन के मुताबिक, इस वर्ष राजस्थान में जनवरी और फरवरी के तापमान में 2.6 डिग्री सेल्सियस का अंतर देखने को मिला। कुल नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, पंजाब, जम्मू और कश्मीर और उत्तराखंड में जनवरी-फरवरी में दो डिग्री सेल्सियस से अधिक का अंतर देखा गया। पूर्वोत्तर राज्यों में भी ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव देखने को मिला है। यह अंतर मणिपुर में 2.3 डिग्री, सिक्किम में 2.4 डिग्री सेल्सियस रहा। यह लुप्त हो रहे वसंत की धारणा का समर्थन करता है।

जीवाश्म ईंधन अहम कारण
अध्ययन में 1970 से अब तक के मौसम के उतार-चढ़ाव का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग के कारण यह बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह जीवाश्म ईंधन जलने से कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ता स्तर माना गया है। 1850 के बाद से वैश्विक औसत तापमान 1.3 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ गया है, जिससे जलवायु पर प्रभाव बढ़ गया है और 2023 रिकॉर्ड स्तर पर सबसे गर्म रहा।

 

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