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Immigration: गोकर्ण की पहाड़ियों में गुफा से मिली रूसी महिला, दो बच्चे भी साथ; आठ साल पहले खत्म हो गया था वीजा
Sat, 12 Jul 2025 03:51 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कारवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कारवार
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sat, 12 Jul 2025 03:51 PM IST
सार
कर्नाटक के गोकर्ण की पहाड़ियों में पुलिस को एक रूसी महिला और उसके दो छोटे बच्चे गुफा में रहते मिले। महिला का नाम नीना कुटिना उर्फ मोही है, जो 8 साल पहले भारत आई थी। उसका वीजा 2017 में ही खत्म हो चुका था। वह बच्चों के साथ गुफा में रहकर पूजा और साधना कर रही थी।
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जंगल
- फोटो : एआई द्वारा बनाई गई तस्वीर
विस्तार
कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के गोकर्ण में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक रूसी महिला अपनी दो छोटी बेटियों के साथ जंगलों के बीच एक गुफा में रह रही थी। महिला का नाम नीना कुटिना उर्फ मोहिनी है। वह आध्यात्मिक शांति की तलाश में भारत आई थी और बीते दो हफ्तों से वह अपनी बेटियों के साथ रामतीर्थ की पहाड़ियों में एक गुफा में रह रही थी।
पुलिस के मुताबिक, नीना अपनी बेटियों प्रेया (6) और अमा (4) के साथ एक प्राकृतिक गुफा में रह रही थी। वहां उन्होंने एक रूद्र की मूर्ति रखी थी और दिन-रात पूजा और ध्यान करती थीं। आसपास घना जंगल, ढलान और खतरनाक पहाड़ियां थीं। वह किसी से संपर्क में नहीं थी और पूरी तरह एकांत में रह रही थी। पुलिस को यह जानकारी हाल में हुई एक लैंडस्लाइड के बाद क्षेत्र में गश्त के दौरान मिली, जब गुफा के बाहर कपड़े सूखते हुए दिखे।
पुलिस की सतर्कता से मिली महिला और बच्चे
सर्कल पुलिस इंस्पेक्टर श्रीधर की टीम ने जब गुफा के आसपास कपड़े देखे तो संदेह हुआ। वे झाड़ियों के बीच से गुफा तक पहुंचे और वहां नीना और उसकी दो बच्चियों को देखा। दोनों बच्चे स्वस्थ थे और कोई दुर्घटना नहीं हुई थी, जो राहत की बात रही। पुलिस को यह देख हैरानी हुई कि महिला और बच्चे बिना किसी मदद के इतने दिनों तक वहां कैसे रह पाए।
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2017 में ही समाप्त हो चुका था वीजा
उत्तर कन्नड़ के एसपी एम नारायण ने बताया कि महिला का वीजा 2017 में ही खत्म हो गया था। वह बिजनेस वीजा पर भारत आई थी और गोवा होते हुए गोकर्ण पहुंची। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि वह भारत में कब से रह रही थी। उसका कहना है कि वह भारतीय संस्कृति और आध्यात्म से बहुत प्रभावित है और साधना के लिए यहां आई थी।
ये भी पढ़ें- बचाव अभियान चौथे दिन भी जारी, नदी से एक और शव बरामद; अब तक 20 की मौत
अब आश्रम में ठहराया गया, होगी देश वापसी
पुलिस ने नीना और उसके बच्चों को गोकर्ण के एक साध्वी द्वारा चलाए जा रहे आश्रम में ठहराया है। उनके लिए रहने और खाने की व्यवस्था की गई है। साथ ही उन्हें बेंगलुरु ले जाकर डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। स्थानीय एनजीओ की मदद से रूसी दूतावास से संपर्क किया गया है और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
ये भी पढ़ें- 'दोनों इंजनों का फेल होना गंभीर बात', एएआईबी जांच रिपोर्ट पर बोले पूर्व एयर मार्शल संजीव कपूर
प्राकृतिक खूबसूरती और खतरे के बीच बीते 14 दिन
रामतीर्थ की पहाड़ियां एक ओर जहां गहरी शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव देती हैं, वहीं दूसरी ओर वहां रहना बेहद जोखिम भरा है। नीना और उनके बच्चों ने करीब दो हफ्ते वहीं बिताए। हालांकि, अब उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है और प्रशासन उन्हें हर संभव मदद दे रहा है। यह मामला भारतीय आध्यात्म की वैश्विक लोकप्रियता और लोगों की आस्था का प्रमाण तो है ही, साथ ही यह भी दिखाता है कि सुरक्षा के लिहाज से ऐसी गतिविधियों पर नजर रखना कितना जरूरी है।
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पुलिस के मुताबिक, नीना अपनी बेटियों प्रेया (6) और अमा (4) के साथ एक प्राकृतिक गुफा में रह रही थी। वहां उन्होंने एक रूद्र की मूर्ति रखी थी और दिन-रात पूजा और ध्यान करती थीं। आसपास घना जंगल, ढलान और खतरनाक पहाड़ियां थीं। वह किसी से संपर्क में नहीं थी और पूरी तरह एकांत में रह रही थी। पुलिस को यह जानकारी हाल में हुई एक लैंडस्लाइड के बाद क्षेत्र में गश्त के दौरान मिली, जब गुफा के बाहर कपड़े सूखते हुए दिखे।
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पुलिस की सतर्कता से मिली महिला और बच्चे
सर्कल पुलिस इंस्पेक्टर श्रीधर की टीम ने जब गुफा के आसपास कपड़े देखे तो संदेह हुआ। वे झाड़ियों के बीच से गुफा तक पहुंचे और वहां नीना और उसकी दो बच्चियों को देखा। दोनों बच्चे स्वस्थ थे और कोई दुर्घटना नहीं हुई थी, जो राहत की बात रही। पुलिस को यह देख हैरानी हुई कि महिला और बच्चे बिना किसी मदद के इतने दिनों तक वहां कैसे रह पाए।
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2017 में ही समाप्त हो चुका था वीजा
उत्तर कन्नड़ के एसपी एम नारायण ने बताया कि महिला का वीजा 2017 में ही खत्म हो गया था। वह बिजनेस वीजा पर भारत आई थी और गोवा होते हुए गोकर्ण पहुंची। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि वह भारत में कब से रह रही थी। उसका कहना है कि वह भारतीय संस्कृति और आध्यात्म से बहुत प्रभावित है और साधना के लिए यहां आई थी।
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अब आश्रम में ठहराया गया, होगी देश वापसी
पुलिस ने नीना और उसके बच्चों को गोकर्ण के एक साध्वी द्वारा चलाए जा रहे आश्रम में ठहराया है। उनके लिए रहने और खाने की व्यवस्था की गई है। साथ ही उन्हें बेंगलुरु ले जाकर डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। स्थानीय एनजीओ की मदद से रूसी दूतावास से संपर्क किया गया है और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
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प्राकृतिक खूबसूरती और खतरे के बीच बीते 14 दिन
रामतीर्थ की पहाड़ियां एक ओर जहां गहरी शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव देती हैं, वहीं दूसरी ओर वहां रहना बेहद जोखिम भरा है। नीना और उनके बच्चों ने करीब दो हफ्ते वहीं बिताए। हालांकि, अब उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है और प्रशासन उन्हें हर संभव मदद दे रहा है। यह मामला भारतीय आध्यात्म की वैश्विक लोकप्रियता और लोगों की आस्था का प्रमाण तो है ही, साथ ही यह भी दिखाता है कि सुरक्षा के लिहाज से ऐसी गतिविधियों पर नजर रखना कितना जरूरी है।
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