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पर्यावरण प्रभाव आकलन पर सोनिया राहुल का फिर से हमला, बताया आदिवासियों के लिए खतरा
Fri, 14 Aug 2020 07:12 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 14 Aug 2020 07:12 AM IST
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सोनिया-राहुल गांधी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए)-2020 अधिसूचना के मसौदे पर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस की नेता ने दावा किया की ईआईए-2020 की अधिसूचना का मसौदा पर्यावरण के नियमों के विरुद्ध है। यह मानकों का उल्लघंन करने वालों को क्लीन चिट देता है। इससे पर्यावरण के समक्ष बड़ी तबाही आना तय है।
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केंद्रीय जलवायु परिवर्तन वन और पर्यावरण मंत्रालय पर आरोप लगाते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि यह मसौदा आदिवासियों और वनों में रहने वालों के अधिकारों पर कुठाराघात है।
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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोनिया के लेख को साझा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मोर्चा खोलते हुए एक बार फिर मसौदा अधिसूचना को वापस लेने की मांग की है। इससे पहले रविवार को भी राहुल गांधी ने भी इसे घातक करार देते हुए वापस लेने की मांग की थी।
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सोनिया ने एक लेख के माध्यम से कहा कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों को छिन्न-भिन्न किया जा रहा है। इसलिए पर्यावरणों हितों को देखते हुए मसौदे को वापस लेना चाहिए।
उन्होंने कहा पर्यावरण की रक्षा करना सरकार का सामाजिक कर्तव्य है। सरकार को इसका निर्वहन करना चाहिए। पर्यावरण का संरक्षण और लोक स्वास्थ्य की रक्षा एक साथ होनी चाहिए । सभी के लिए सम्मान जनक आजीविका उपलब्ध हो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अनियंत्रित आर्थिक विकास की कल्पना के पीछे भागने से देश को लोगों के अधिकारों और पर्यावरण दोनों का त्याग अक्सर करना पड़ा है। विकास के लिए व्यापारिक गतिविधियां जरूरी होती है लेकिन इनके लिए कुछ सीमाएं तय होनी चाहिए जिन्हें लांघा नहीं जाना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले छह सालों में केंद्र सरकार ने देश के पर्यावरण संरक्षण की रूपरेखा पर जानबूझ कर अतिक्रमण किया है।
उन्होंने कोरोना काल का संदर्भ लेते हुए कहा कि सरकार को महामारी से सबक लेते हुए पर्यावरण एवं जन स्वास्थ्य संबंधी नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए था। इसके उलट पर्यावरण मंत्रालय लॉकडाउन के दौरान बिना उचित परामर्श और जनता की रायशुमारी के परियोजनाओं को धड़ाधड़ मंजूरी दी जा रही है।
पर्यावरण मंत्रालय ने मार्च में अधिसूचना जारी की थी। इस पर जनता को 60 दिन में सुझाव देने थे जिस पर अदालत के हस्तक्षेप के बाद 11 अगस्त तक सुझाव की तिथि को बढ़ाया गया था।