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चुनाव आयोग के खिलाफ दो अक्तूबर को बड़ा प्रदर्शन: सोनम वांगचुक ने भी किया समर्थन; क्या है सीजेपी की तैयारी?
Sun, 27 Sep 2026 04:26 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 27 Sep 2026 04:26 PM IST
सार
सोनम वांगचुक ने दो अक्तूबर को सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन का समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह खुद प्रदर्शन में मौजूद रहें, यह जरूरी नहीं है। यह प्रदर्शन चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग को लेकर मुंबई में शुरू होना है। चुनाव आयोग ने एसआईआर से जुड़े फैसलों को तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।
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सोनम वांगचुक, सामाजिक कार्यकर्ता
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दो अक्तूबर को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन का समर्थन किया है। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित है। सीजेपी चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग कर रही है। वांगचुक ने कहा कि देश में जवाबदेही बढ़ाने और चुनाव प्रक्रिया को बेहतर करने वाली किसी भी कोशिश का समर्थन होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह प्रदर्शन में खुद मौजूद रहें, यह जरूरी नहीं है।
वांगचुक ने खुद प्रदर्शन में जाने पर क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने कहा कि किसी आंदोलन का समर्थन करने के लिए हर जगह खुद पहुंचना जरूरी नहीं है। उनके मुताबिक, आंदोलन अपने दम पर आगे बढ़ने चाहिए। उन्होंने कहा कि अब इस मुद्दे पर कई लोग सामने आ रहे हैं। इसलिए उन्हें उम्मीद है कि सीईसी से जुड़े इस मामले में उनकी जरूरत नहीं पड़ेगी। उनका कहना था कि वह ऐसे आंदोलनों के साथ हैं, जिनका मकसद देश में जवाबदेही बढ़ाना है। वांगचुक ने कहा कि जवाबदेही बढ़ाने वाले आंदोलनों को उनका समर्थन है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अब कई लोग सामने आ रहे हैं और आंदोलन को अपने दम पर आगे बढ़ना चाहिए।
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चुनाव आयोग को लेकर विवाद आखिर क्यों बढ़ा?
चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर यह विवाद एक इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद बढ़ा। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई। ये फैसले मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और नाम बहाल करने से जुड़े थे। इनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े फैसले भी शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग मामलों में अपनी आपत्तियां रिकॉर्ड पर दर्ज की थीं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद चुनाव आयोग के भीतर मतभेद को लेकर सवाल उठने लगे।
यह भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: इस्राइल में मुस्लिम आबादी की आवाज उठाने वाले सियासी दल क्यों बैन, नेतन्याहू की पार्टी कैसे बनी वजह?
चुनाव आयोग ने एसआईआर को लेकर क्या कहा?
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने शनिवार को अपनी स्थिति साफ की। आयोग ने कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने नोटिस पाने वाले मतदाताओं की मदद के लिए कुछ कदम भी बताए। इसके तहत कुछ मामलों में बूथ लेवल अधिकारी घर जाकर मतदाताओं की मदद करेंगे। आयोग ने कहा कि ऐसे लोगों को आम तौर पर सुनवाई के लिए खुद आने की जरूरत नहीं होगी।
वांगचुक ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने चुनाव प्रक्रिया को लोकतंत्र की सबसे जरूरी व्यवस्थाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इसमें सुधार की जरूरत है। इसी दौरान उन्होंने सवाल किया, 'अगर चुनाव प्रक्रिया बिगड़ गई तो लोकतंत्र में क्या बचेगा?' उन्होंने यह भी कहा कि सरकारों को अपने किए वादे पूरे करने चाहिए। उन्होंने लद्दाख को छठी अनुसूची का दर्जा देने के वादे का उदाहरण दिया। वांगचुक ने कहा कि वह उन संगठनों, राजनीतिक दलों और नेताओं का समर्थन करते हैं, जो न्याय और जवाबदेही के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें सत्तारूढ़ भाजपा के लोग भी शामिल हैं।
दो अक्तूबर को ही प्रदर्शन क्यों?
सीजेपी ने दो अक्तूबर से मुंबई में प्रदर्शन शुरू करने का एलान किया है। यह दिन महात्मा गांधी की जयंती भी है। वांगचुक ने इसे "बहुत पवित्र दिन" बताया। उन्होंने कहा कि गांधी के शांतिपूर्ण विरोध के तरीकों ने लोगों के अधिकारों के लिए चलने वाले आंदोलनों को प्रेरित किया है। वहीं, चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर विपक्षी दल भी सक्रिय हैं। इंडी ब्लॉक के दल 30 सितंबर को दिल्ली में बैठक कर सकते हैं। इसमें इस मुद्दे पर आगे की रणनीति पर चर्चा होने की उम्मीद है।
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वांगचुक ने खुद प्रदर्शन में जाने पर क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने कहा कि किसी आंदोलन का समर्थन करने के लिए हर जगह खुद पहुंचना जरूरी नहीं है। उनके मुताबिक, आंदोलन अपने दम पर आगे बढ़ने चाहिए। उन्होंने कहा कि अब इस मुद्दे पर कई लोग सामने आ रहे हैं। इसलिए उन्हें उम्मीद है कि सीईसी से जुड़े इस मामले में उनकी जरूरत नहीं पड़ेगी। उनका कहना था कि वह ऐसे आंदोलनों के साथ हैं, जिनका मकसद देश में जवाबदेही बढ़ाना है। वांगचुक ने कहा कि जवाबदेही बढ़ाने वाले आंदोलनों को उनका समर्थन है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अब कई लोग सामने आ रहे हैं और आंदोलन को अपने दम पर आगे बढ़ना चाहिए।
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चुनाव आयोग को लेकर विवाद आखिर क्यों बढ़ा?
चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर यह विवाद एक इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद बढ़ा। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई। ये फैसले मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और नाम बहाल करने से जुड़े थे। इनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े फैसले भी शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग मामलों में अपनी आपत्तियां रिकॉर्ड पर दर्ज की थीं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद चुनाव आयोग के भीतर मतभेद को लेकर सवाल उठने लगे।
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चुनाव आयोग ने एसआईआर को लेकर क्या कहा?
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने शनिवार को अपनी स्थिति साफ की। आयोग ने कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने नोटिस पाने वाले मतदाताओं की मदद के लिए कुछ कदम भी बताए। इसके तहत कुछ मामलों में बूथ लेवल अधिकारी घर जाकर मतदाताओं की मदद करेंगे। आयोग ने कहा कि ऐसे लोगों को आम तौर पर सुनवाई के लिए खुद आने की जरूरत नहीं होगी।
वांगचुक ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने चुनाव प्रक्रिया को लोकतंत्र की सबसे जरूरी व्यवस्थाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इसमें सुधार की जरूरत है। इसी दौरान उन्होंने सवाल किया, 'अगर चुनाव प्रक्रिया बिगड़ गई तो लोकतंत्र में क्या बचेगा?' उन्होंने यह भी कहा कि सरकारों को अपने किए वादे पूरे करने चाहिए। उन्होंने लद्दाख को छठी अनुसूची का दर्जा देने के वादे का उदाहरण दिया। वांगचुक ने कहा कि वह उन संगठनों, राजनीतिक दलों और नेताओं का समर्थन करते हैं, जो न्याय और जवाबदेही के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें सत्तारूढ़ भाजपा के लोग भी शामिल हैं।
दो अक्तूबर को ही प्रदर्शन क्यों?
सीजेपी ने दो अक्तूबर से मुंबई में प्रदर्शन शुरू करने का एलान किया है। यह दिन महात्मा गांधी की जयंती भी है। वांगचुक ने इसे "बहुत पवित्र दिन" बताया। उन्होंने कहा कि गांधी के शांतिपूर्ण विरोध के तरीकों ने लोगों के अधिकारों के लिए चलने वाले आंदोलनों को प्रेरित किया है। वहीं, चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर विपक्षी दल भी सक्रिय हैं। इंडी ब्लॉक के दल 30 सितंबर को दिल्ली में बैठक कर सकते हैं। इसमें इस मुद्दे पर आगे की रणनीति पर चर्चा होने की उम्मीद है।