ऑक्सीजन की किल्लत: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राष्ट्रीय आपातकाल जैसे हालात...आज भी सुनवाई
- छह हाईकोर्टों में सुनवाई से भ्रम की स्थिति, कोरोना से निपटने की योजना बताए केंद्र: सुप्रीम कोर्ट
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देश में ऑक्सीजन के गहराते संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान कोरोना महामारी के हालात को ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ करार दिया है। वहीं, शीर्ष अदालत ने कोरोना प्रबंधन से जुडे़ मामलों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा, केंद्र और राज्यों की तैयारियों को लेकर छह हाईकोर्ट में सुनवाई से भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से ऑक्सीजन और आवश्यक दवाओं की पर्याप्त और एकसमान आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों को लेकर राष्ट्रीय योजना पेश करने को कहा। मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से महामारी से पैदा हुई परेशानियों से निजात पाने को लेकर केंद्र सरकार की राष्ट्रीय योजना को अदालत के सामने पेश करने के लिए कहा है। पीठ ने सरकार को यह बताने के लिए कहा है कि इस संबंध मे उसने क्या कदम उठाए हैं और आगे की क्या योजना है। पीठ ने कहा, कम से कम छह हाईकोर्ट दिल्ली, बॉम्बे, सिक्किम, मध्य प्रदेश, कलकत्ता और इलाहाबाद पहले से ही राज्य और केंद्र की तैयारियों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर सुनवाई कर रहे है।
सीजेआई ने सॉलिसिटर जनरल से कहा, सभी हाईकोर्ट सार्वजनिक हित के लिए अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इससे भ्रम की स्थिति फैल रही है और वे अपनी-अपनी प्राथमिकता के हिसाब से संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक हाईकोर्ट किसी एक समूह को प्राथमिकता दे रहा है, दूसरा हाईकोर्ट किसी और समूह को। इसलिए हम कुछ मुद्दों पर स्वत: संज्ञान लेने की इच्छा रखते हैं। सीजेआई ने सॉलिसिटर जनरल मेहता को शुक्रवार को राष्ट्रीय योजना के साथ आने के लिए कहा। शुक्रवार को ही चीफ जस्टिस बोबडे के कार्यकाल का आखिरी दिन भी है।
इन चार बिंदुओं पर गौर करेगी पीठ
-ऑक्सीजन की आपूर्ति
-आवश्यक दवाओं की आपूर्ति
-टीकाकरण की विधि और तरीका
-लॉकडाउन घोषित करने की राज्य की शक्ति
लॉकडाउन की घोषणा की शक्ति राज्यों के पास हो
लॉकडाउन के मुद्दे पर सीजेआई बोबडे ने मौखिक तौर पर कहा कि यह अधिकार राज्य सरकार के पास होना चाहिए। हम राज्यों के पास लॉकडाउन की घोषणा करने की शक्ति रखना चाहते हैं। यह न्यायिक निर्णय नहीं हो सकता। हम फिलहाल इन चार मुद्दों पर केंद्र को नोटिस जारी करते हैं।
सब कुछ एकसाथ सुनना बेहतर
सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से यह जानना चाहा कि चूंकि अब सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान ले लिया तो अब केंद्र सरकार को दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष विस्तृत दलील देने की जरूरत है यह नही? इस पर जस्टिस भट के कहा कि सरकार को हाईकोर्ट के समक्ष अपनी राष्ट्रीय योजना को आगे बढ़ाना चाहिए, क्योंकि फिलहाल हमारा इरादा हाईकोर्ट के आदेशों को रद्द करने का नहीं है। हालांकि, चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सब कुछ एक साथ सुनना बेहतर है और हाईकोर्ट के समक्ष चल रहे मामलों को यहां स्थानांतरित किया जा सकता है। इस पर मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से हाईकोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के बारे में जानकारी दे दी जाएगी।
साल्वे को बनाया न्याय मित्र
पीठ ने अदालत की सहायता के लिए वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे को इस मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया है। पीठ ने साल्वे को केंद्र की राष्ट्रीय योजना को देखने के बाद अपना बहुमूल्य सुझाव देने के लिए कहा है।
ऑक्सीजन की मुफ्त आपूर्ति करने की अर्जी पर सुनवाई आज
सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 की स्थिति को राष्ट्रीय आपातकाल बताते हुए वेदांता की उस याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है, जिसमें उसने तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित स्टरलाइट कॉपर संयंत्र को फिर से शुरू करने की इजाजत मांगी है। वेदांता का कहना है कि इसको खोलने की इजाजत देने से हजारों टन ऑक्सीजन का उत्पादन हो सकेगा। साथ ही उसका कहना है कि वह कोविड-19 मरीजों को मुफ्त में ऑक्सीजन देगा।
सुप्रीम कोर्ट के प्रस्ताव पर बार एसोसिएशन ने की आलोचना
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने शीर्ष अदालत द्वारा कोरोना प्रबंधन से जुड़े विभिन्न हाईकोर्ट में चल रहे मामलों को अपने पास लाने के प्रस्ताव के खिलाफ याचिका दायर की है। एसोसिएशन का कहना है कि हाईकोर्ट को इन मामलों को देखना चाहिए, क्योंकि स्थानीय स्थिति से बेहतर तरीके से वाकिफ होते हैं। उन्हें वहां की समस्याओं के बारे में अधिक जानकारी होती है। इसके अलावा पूर्व अटॉर्नी जनरल व वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी, दुष्यंत दवे, विवेक तन्खा, इंदिरा जयसिंह समेत कई वरिष्ठ वकीलों ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस प्रस्ताव की आलोचना की है।
उनका कहना है कि हाईकोर्ट को इस संबंध में अपना काम करने देना चाहिए, क्योंकि वह बेहतर तरीके से स्थानीय मसलों का हल निकाल सकते हैं। रोहतगी ने तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूपी के पांच शहरों में लॉक डाउन लगाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने को भी गलत बताया है।