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पिता को बेटियों ने दिया कंधा, श्मशान पहुंच कर आठ लाडलियों ने मिलकर दी मुखाग्नि

Fri, 11 May 2018 06:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आणंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आणंद Updated Fri, 11 May 2018 06:59 PM IST
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socity changing in gujarat daughters did funeral of her father
समाज बदल रहा है और इसके साथ इसकी परंपराएं भी बदल रही हैं। भारतीय समाज में मान्यता है कि मां-पिता का निधन हो या फिर परिवार में किसी का भी निधन होता है तो परिवार का बेटा ही कंधा और मुखाग्नि देता है।
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लेकिन पिछले कुछ वर्षों में समाज की सोच में तेजी से बदलाव आया है कहीं बेटियों को बराबरी का हक मिला है वहीं उनको लेकर धारणाएं भी बदली हैं। पिछले कुछ दिनों में बेटियों के हाथों शव को कंधा देने से लेकर मुखाग्नि देने के कई मामले सामने आए हैं।
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ऐसा ही एक मामला गुजरात के आणंद से सामने आया है जहां बेटियों ने अपने पिता को मुखाग्नि दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार देवेंद्र गुजरात बिजली विभाग में इंजीनियर थे, वह कुछ दिनों पहले रिटायर हो चुके थे। रिटायरमेंट के बाद वह अपने परिवार के साथ आणंद के बोरसद में बस गए थे। 
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देवेंद्र की अकस्मात मौत के बाद उनकी आठ बेटियों ने उन्हें मुखाग्नि दी बल्कि हर एक रस्में भी निभाई। देवेंद्र ने अपनी बेटियों की शादी बहुत पहले ही कर दी थी। पिता की निधन की खबर मिलते ही आठों बेटियां अपने पिता के संस्कार में शामिल होने के लिए बोरसद पहुंची।

वैसे बेटियों द्वारा पिता को मुखाग्नि देने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसी साल जनवरी में हरियाणा के सिरसा निवासी की बेटी ने भी अपने पिता को मुखाग्नि दी थी। 

इससे पहले अप्रैल महीने में कांगड़ा के थुरल पंचायत में पिता की मौत के बाद दो बेटियों ने बेटे का फर्ज निभाया था और समाज को यह संदेश दिया था की बेटी सच में अनमोल होती हैं। पिता को दोनों बेटियों ने मिल कर मुखाग्नि दी थी।


थुरल बाजार के 75 वर्षीय ब्रह्मु दास का मंगलवार को हृदय गति रुकने से निधन हो गया था। वे रेलवे बोर्ड से बतौर तकनीशियन सेवानिवृत्त हुए थे। ब्रह्मु का कोई बेटा नहीं था, सिर्फ दो बेटियां ही थीं। उनकी दोनों बेटियों ने अपनी बेटी होने का फर्ज अदा कर श्मशानघाट पर जाकर अपने पिता को मुखाग्नि देकर दाह संस्कार की हर रस्म अदा की थी।
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