Bihar SIR: दिल्ली में भाजपा ने भी लगाए थे राहुल गांधी जैसे आरोप, बिहार में ये काम क्यों नहीं कर रही कांग्रेस?
भाजपा की तरफ से लगातार यह सवाल दागा जा रहा है कि यदि कांग्रेस-राजद को लगता है कि बिहार में मतदाता पहचान पत्र में कोई गड़बड़ी है तो वे इसका विरोध क्यों नहीं करतीं? उलटे वे मतदाता सूची से फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने का ही विरोध कर रही हैं।
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राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली पर सबसे गंभीर आरोप यही लगाया था कि कर्नाटक के एक छोटे से मकान में 80 लोगों का मतदाता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। कांग्रेस इसे राहुल गांधी की ओर से किया गया 'बड़ा खुलासा' करार दे रही है। असलियत यह है कि स्वयं भाजपा ने भी दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान ठीक ऐसे ही आरोप लगाए थे। दिल्ली भाजपा ने राजधानी के कई इलाकों का गहन सर्वे कर दावा किया था कि एक ही कमरे के मकान में 40-50 लोगों को वोटर बना दिया गया। एक पते पर 24 लोगों को मतदाता बना दिया गया था, जहां कोई मकान ही नहीं बना था। अनेक मतदाता सर्वे के दौरान अपने पतों पर रहते हुए नहीं पाए गए थे। पार्टी ने चुनाव के पहले चुनाव आयोग से इन 'फर्जी मतदाताओं' का नाम सूची से हटाने का अनुरोध किया और चुनावों में शानदार सफलता पाई।
भाजपा की तरफ से लगातार यह सवाल दागा जा रहा है कि यदि कांग्रेस-राजद को लगता है कि बिहार में मतदाता पहचान पत्र में कोई गड़बड़ी है तो वे इसका विरोध क्यों नहीं करतीं? उलटे वे मतदाता सूची से फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने का ही विरोध कर रही हैं। चुनाव आयोग द्वारा संशोधित मतदाता सूची पर आपत्ति जताने के दस दिन बीतने के बाद भी अब तक कांग्रेस-राजद सहित किसी भी पार्टी ने अब तक कोई औपचारिक विरोध नहीं दर्ज कराया है। चुनाव आयोग के साथ-साथ भाजपा नेता भी यही प्रश्न उठा रहे हैं कि यदि कांग्रेस-राजद यह आरोप लगा रही हैं कि बिहार में गलत तरीके से मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं तो उन्होंने अब तक किसी तथाकथित मृत मतदाता को सामने लाकर उसका नाम सूची में जोड़ने के लिए आवेदन क्यों नहीं किया?
दिल्ली में क्या हुआ था?
दिल्ली विधानसभा चुनावों के पहले भाजपा ने दावा किया था कि दिल्ली की मतदाता सूची में गंभीर खामियां हैं। पार्टी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मतदाताओं की लंबी सूची मीडिया के सामने रख कई बार प्रेस कांफ्रेंस की और यह जानकारी दी कि कई इलाकों में फर्जी ढंग से मतदाता बनाए गए हैं। उनके अनुसार, एक ही कमरे में 30-40 मतदाताओं को मतदाता पहचान पत्र जारी कर दिया गया है, जबकि मौके पर मुआयना करने के बाद इन मतदाताओं में से कोई भी मतदाता अपने पते पर रहता हुआ नहीं पाया गया।
भाजपा ने यह आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी ने एक साजिश के अंतर्गत ऐसे फर्जी मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में जुड़वाने का काम किया था। पार्टी के अनुसार, ये मतदाता केवल चुनाव के समय दिल्ली आते हैं और एक पार्टी विशेष के पक्ष में मतदान करके चले जाते हैं। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने 14 जनवरी 2025 को चुनाव आयोग पहुंचकर अपनी आपत्तियों को दर्ज कराया था और अनुरोध किया था कि दिल्ली में कोई भी फर्जी मतदान न होने पाए।
आम आदमी पार्टी नेता और सांसद संजय सिंह ने राहुल गांधी के खुलासे के बाद कहा है कि दिल्ली में भी मतदाता सूची से छेड़छाड़ की गई थी। लेकिन आम आदमी पार्टी दिल्ली चुनाव के दौरान किसी भी ऐसे मतदाता को सामने नहीं ला सकी थी जो दिल्ली के निवासी हों और उनका नाम मतदाता सूची से काटा गया हो।
दिल्ली जैसी बिहार में भी गड़बड़ी की आशंका
बिहार भाजपा के नेता भी यही आशंका जता रहे हैं कि फर्जी मतदाताओं के नाम पर गलत तरीके से वोट डाल दिया जाता है। ईवीएम प्रणाली होने के बाद भी संवेदनशील इलाकों में गलत लोगों को मतदान करने से रोकना बहुत मुश्किल होता है। इससे चुनाव प्रभावित होता है। लेकिन यदि मतदाता सूची में मृत या गलत लोगों के नाम शामिल नहीं होंगे तो ऐसे फर्जी मतदान को रोका जा सकेगा।
अब बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं, और चुनाव आयोग मतदाता सूची से फर्जी मतदाताओं का नाम काटने की मुहिम के पहले फेज को अंजाम दे चुका है। कांग्रेस-राजद सहित किसी भी दल ने अब तक एक भी तथाकथित मृत मतदाता को सामने लाकर यह बताने का आधिकारिक दावा नहीं किया है कि उनका नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से काट दिया गया है। ऐसे में विपक्ष के एसआईआर के विरोध पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
'बिहार में गड़बड़ी सामने लानी चाहिए'- भाजपा
बिहार भाजपा के नेता संतोष पाठक ने अमर उजाला से कहा कि राहुल गांधी ने कर्नाटक में यही आरोप लगाया है कि वहां एक ही कमरे के मकान में 80 मतदाताओं के प्रमाण पत्र बनवा दिए गए। चूंकि, वहां कांग्रेस की ही सत्ता है, उसे यह जवाब देना चाहिए कि कर्नाटक में ऐसी गड़बड़ी कैसे हुई। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस-राजद सहित विपक्ष को लगता है कि यहां भी गलत तरीके से मतदाताओं का नाम सूची से हटाया जा रहा है, या जोड़ा जा रहा है तो उन्हें स्वयं इसका औपचारिक विरोध करना चाहिए। लेकिन विपक्षी दलों ने अब तक संशोधित मतदाता सूची में ऐसे किसी बदलाव के लिए आवेदन नहीं किया है।
भाजपा नेता संतोष पाठक ने आरोप लगाया कि बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों में विपक्षी दलों के कुछ नेता अपने प्रभाव का उपयोग कर चुनाव को प्रभावित करने का काम करते हैं। लेकिन मतदाता सूची सही होने पर चुनाव के दौरान किसी तरह का दुरूपयोग नहीं किया जा सकेगा।
इन सवालों के जवाब दे भाजपा-चुनाव आयोग- राजद
राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. नवल किशोर ने अमर उजाला से कहा कि उनके कुछ सवाल हैं, जिसका उत्तर चुनाव आयोग को देना चाहिए। डॉ. नवल किशोर के अनुसार, उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने तीन लाख ऐसे मतदाताओं का नाम सामने लाया है जिसके पते के सामने शून्य-शून्य दर्ज हैं। चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि ये मतदाता किस पते पर रहते हैं। चुनाव आयोग कह रहा है कि राजद-कांग्रेस के नेता फर्जी मतदाताओं को सामने लाएं। चुनाव आयोग बताए कि शून्य-शून्य मतदाताओं को खोजने के लिए उनके कार्यकर्ता कहां जाएं।
डॉ. नवल किशोर ने कहा कि यही चुनाव आयोग चुनाव के बाद वीवीपैट की गिनती करने से भी इस आधार पर इनकार करता है कि मतदाताओं की अधिक संख्या के कारण सभी वीवीपैट की गिनती नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक संस्था की शक्ति और पर्याप्त कार्य बल होने के बाद भी यदि चुनाव आयोग चार करोड़ के करीब मतदाताओं (बिहार में वोट डालने वाले मतदाताओं की संख्या) का वीवीपैट नहीं गिन सकता, तो केवल एक पार्टी के कार्यकर्ता कैसे सात करोड़ मतदाताओं का निवास-जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जुटा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
राजद नेता ने कहा कि मतदाता सूची के ड्राफ्ट में केवल मतदाताओं की सूची है, लेकिन यह नहीं बताया गया है कि किस मतदाता का नाम किस आधार पर काटा गया है। ऐसे में हटाए गए मतदाताओं को खोजना मुश्किल है। यदि चुनाव आयोग एक सूची जारी कर यह बताता कि किस बूथ पर किस मतदाता का नाम मृत होने, या निवास बदलने के कारण हटाया गया है तो उनकी पहचान करना संभव होता। ऐसे मतदाताओं के नाम के सामने स्टार लगाकर या अन्य तरीके से संदेश देकर बताया जा सकता था कि इन कारणों से इन मतदाताओं का नाम हटाया जा रहा है। लेकिन ऐसा न होने के कारण उनके कार्यकर्ता हटाए गए मतदाताओं की जानकारी तरंत नहीं साझा कर पा रहे हैं। राजद नेता ने कहा कि उनके 50 हजार बीएलए-2 कार्यकर्ता लगातार एक-एक मतदाता तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। वे जल्द ही इस पर बड़ी जानकारी जनता के सामने रखेंगे।
डॉ. नवल किशोर ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। लेकिन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यदि उपमुख्यमंत्री का दो एपिक नंबर जारी हो सकता है तो यह स्पष्ट दिखाता है कि आम आदमी के साथ किस प्रकार की गड़बड़ी की जा रही होगी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के प्रश्नों पर चुनाव आयोग को स्वयं संज्ञान लेकर जांच करानी चाहिए।