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भारत के मेघालय राज्य में बसा अनोखा गांव, जहां हर कोई संगीत की धुन से एक दूसरे को पुकारता है

Thu, 20 Sep 2018 12:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कॉन्गथॉन्ग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कॉन्गथॉन्ग Updated Thu, 20 Sep 2018 12:08 PM IST
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Singing village of Meghalaya, everyone has a musical name

आज हम आपको भारत के उत्तर पूर्व में स्थित राज्य मेघालय के एक गांव के बारे में बताने जा रहे हैं। यह एक ऐसा गांव है जहां हर कोई एक दूसरे को कोई खास धुन या संगीत के माध्यम से बुलाता है। यहां के जंगलों में सुनाई देने वाली विभिन्न प्रकार की धुन और चहचहाहट की गूंज वाली आवाज लोग निकालते हैं। वह एक विभिन्न प्रकार की सीटी बजाते हैं। यह इस गांव की परंपरा है। इस गांव का नाम है 'कॉन्गथॉन्ग'।

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Singing village of Meghalaya, everyone has a musical name
यहां के लोगों की मुख्य खासियत है कि वह एक दूसरे को खास धुन और आवाज से बुलाते हैं। कॉन्गथॉन्ग और उसके आसापास के गांवों में बच्चे के जन्म के बाद उनकी मां एक खास धुन बनाती है, जिसके बाद पूरी जिंदगी बच्चों को उसी धुन से पुकारा जाता है। ऐसा नहीं है कि लोगों के वास्तविक नाम नहीं होते, उनके वास्तविक नाम भी होते हैं, लेकिन कुछ ही परिस्थितियों में उन्हें उनके वास्तविक नाम से पुकारा जाता है।
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Singing village of Meghalaya, everyone has a musical name
लकड़ी के घरों और टीन की छत के नीचे जिंदगी बसर करने वाले यहां के लोग इस परंपरा को बखूबी निभाते हैं। गांव की रहने वाली महिला पेंडप्लिन शबांग का कहना है कि वह तीन बच्चों की मां हैं, मां के दिल से निकलने वाले खास संगीत से ही उसके बच्चे को पुकारा जाता है। समुदाय के ही एक व्यक्ति का कहना है कि जब भी उनका बेटा कुछ गलत करता है, तब वह उसे उसके वास्तविक नाम से ही बुलाते हैं।
Singing village of Meghalaya, everyone has a musical name
यहां के लोगों के लिए जंगल ही सबकुछ है। कॉन्गथॉन्ग बाकी दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ है। इस जगह के बारे में जानकर प्रतीत होता है कि सरकार ने इस ओर कभी कोई ध्यान ही नहीं दिया। यहां साल 2000 में बिजली पहुंची और कच्ची सड़क साल 2013 में पहुंची। शहरों तक पहुंचने में भी यहां के लोगों को कई घंटे लग जाते हैं। गांव के ज्यादातर लोगों का पूरा समय जंगलों में बांस इकट्ठा करने में ही बीत जाता है।
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यहां के रहने वाले खांगसित कहते हैं कि हम जंगलों के बीच चारों ओर से पहाड़ियों से घिरी हुई जगह में रहते हैं। जिस संगीत की धुन से लोग एक दूसरे को पुकारते हैं वह 30 सेकेंड तक लंबी होती है। लेकिन सब प्रकृति से प्रेरित हैं और ईश्वर की बनाई इस अनोखी दुनिया में खुश हैं।
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