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Politics: बंगलूरू मेट्रो पर रार; शिवकुमार ने जल्दबाजी करने वाला लड़का कहा तो तेजस्वी सूर्या ने ऐसे किया पलटवार
Fri, 08 Aug 2025 10:20 AM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Fri, 08 Aug 2025 10:20 AM IST
सार
बंगलूरू मेट्रो की येलो लाइन के उद्घाटन को लेकर डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के बीच टकराव तेज हो गया है। शिवकुमार ने सूर्या को जल्दबाज बताया, जबकि सूर्या ने कांग्रेस पर देरी की राजनीति का आरोप लगाया। मेट्रो परियोजना के उद्घाटन को लेकर दोनों नेताओं के बीच श्रेय की होड़ और बयानों का दौर शुरू हो गया है।
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तेजस्वी सूर्या और डीके शिवकुमार
- फोटो : X-@Tejasvi_Surya/@DKShivakumar
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विस्तार
बंगलूरू मेट्रो की येलो लाइन के उद्घाटन को लेकर कर्नाटक की राजनीति में जोरदार टकराव देखने को मिला है। राज्य के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ शिवकुमार ने सूर्या को 'जल्दबाजी वाला लड़का' बताया, तो दूसरी तरफ सूर्या ने कांग्रेस पर 'देर की राजनीति' करने का आरोप लगाया। यह विवाद मेट्रो उद्घाटन की तारीख और श्रेय लेने को लेकर भड़का है।
डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने तेजस्वी सूर्या पर आरोप लगाया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को मेट्रो लाइन के उद्घाटन के लिए बुलावा भेजा, जबकि राज्य सरकार से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि मेट्रो के संचालन की तकनीकी मंजूरी 31 जुलाई को ही मिली है, ऐसे में पांच अगस्त को उद्घाटन की बात करना जल्दबाज़ी है। शिवकुमार ने इसे गैरजिम्मेदाराना बताया और कहा कि इतनी बड़ी परियोजना को लेकर जल्दबाजी खतरनाक हो सकती है।
सूर्या का पलटवार- हम आज चाहते हैं सुधार
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने शिवकुमार के बयान को 'उम्रभेदी' और 'संवेदनहीन' बताया। उन्होंने कहा कि वह उस युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सुधार अब चाहती है, न कि भविष्य में। सूर्या ने कांग्रेस सरकार पर उद्घाटन में बार-बार देरी करने का आरोप लगाया और कहा कि एक दो किलोमीटर का फ्लाईओवर बनाने में 8.5 साल लग गए। ऐसे में मेट्रो जैसे बड़े प्रोजेक्ट में देरी स्वीकार नहीं की जा सकती।
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श्रेय लेने के चक्कर में आमने सामने दोनों दल
तेजस्वी सूर्या ने दावा किया कि कांग्रेस अब उस परियोजना का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है जिसमें उनका योगदान न्यूनतम था। उन्होंने बताया कि मेट्रो परियोजना की शुरुआत 2018 में हुई थी और इसे 2021 तक पूरा होना था। हालांकि, कोविड-19 और भूमि अधिग्रहण की समस्याओं के कारण काम में देरी हुई। इस दौरान भाजपा सरकार ने लगातार फंड जारी कर निर्माण कार्य आगे बढ़ाया। सूर्या के अनुसार, कांग्रेस सरकार ने तो बीएमआरसीएल के लिए पूर्णकालिक एमडी तक नियुक्त नहीं किया।
ये भी पढ़ें- क्या ट्रंप की वजह से सबसे खराब दौर में हैं भारत-अमेरिका के रिश्ते, पहले कब-कब तनावपूर्ण रहे संबंध?
पीएम मोदी के नाम पर उठा विवाद
शिवकुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री को उद्घाटन के लिए 10 अगस्त की तारीख दी गई है, जबकि सूर्या ने इससे पहले ही उद्घाटन की घोषणा कर दी। शिवकुमार ने इसपर चुटकी लेते हुए कहा कि हमारा युवा सांसद अनुभवहीन है और जल्दबाजी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीकी परियोजनाएं बिना मंजूरी और समन्वय के उद्घाटित नहीं की जा सकतीं। वहीं भाजपा इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर राज्यहित की उपेक्षा करने का आरोप लगा रही है।
मेट्रो लाइन पर खर्च और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
डिप्टी सीएम शिवकुमार ने बताया कि इस येलो लाइन पर ₹7,610 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और इसकी लंबाई 19.5 किलोमीटर है। यह परियोजना बंगलूरू के लाखों यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगी। लेकिन जिस तरह से इसके उद्घाटन को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसने इसे राजनीतिक रणभूमि बना दिया है। अब देखना होगा कि मेट्रो परियोजना आम जनता के लिए कितनी जल्दी शुरू होती है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से इसका कितना असर पड़ता है।
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डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने तेजस्वी सूर्या पर आरोप लगाया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को मेट्रो लाइन के उद्घाटन के लिए बुलावा भेजा, जबकि राज्य सरकार से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि मेट्रो के संचालन की तकनीकी मंजूरी 31 जुलाई को ही मिली है, ऐसे में पांच अगस्त को उद्घाटन की बात करना जल्दबाज़ी है। शिवकुमार ने इसे गैरजिम्मेदाराना बताया और कहा कि इतनी बड़ी परियोजना को लेकर जल्दबाजी खतरनाक हो सकती है।
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सूर्या का पलटवार- हम आज चाहते हैं सुधार
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने शिवकुमार के बयान को 'उम्रभेदी' और 'संवेदनहीन' बताया। उन्होंने कहा कि वह उस युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सुधार अब चाहती है, न कि भविष्य में। सूर्या ने कांग्रेस सरकार पर उद्घाटन में बार-बार देरी करने का आरोप लगाया और कहा कि एक दो किलोमीटर का फ्लाईओवर बनाने में 8.5 साल लग गए। ऐसे में मेट्रो जैसे बड़े प्रोजेक्ट में देरी स्वीकार नहीं की जा सकती।
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श्रेय लेने के चक्कर में आमने सामने दोनों दल
तेजस्वी सूर्या ने दावा किया कि कांग्रेस अब उस परियोजना का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है जिसमें उनका योगदान न्यूनतम था। उन्होंने बताया कि मेट्रो परियोजना की शुरुआत 2018 में हुई थी और इसे 2021 तक पूरा होना था। हालांकि, कोविड-19 और भूमि अधिग्रहण की समस्याओं के कारण काम में देरी हुई। इस दौरान भाजपा सरकार ने लगातार फंड जारी कर निर्माण कार्य आगे बढ़ाया। सूर्या के अनुसार, कांग्रेस सरकार ने तो बीएमआरसीएल के लिए पूर्णकालिक एमडी तक नियुक्त नहीं किया।
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पीएम मोदी के नाम पर उठा विवाद
शिवकुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री को उद्घाटन के लिए 10 अगस्त की तारीख दी गई है, जबकि सूर्या ने इससे पहले ही उद्घाटन की घोषणा कर दी। शिवकुमार ने इसपर चुटकी लेते हुए कहा कि हमारा युवा सांसद अनुभवहीन है और जल्दबाजी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीकी परियोजनाएं बिना मंजूरी और समन्वय के उद्घाटित नहीं की जा सकतीं। वहीं भाजपा इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर राज्यहित की उपेक्षा करने का आरोप लगा रही है।
मेट्रो लाइन पर खर्च और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
डिप्टी सीएम शिवकुमार ने बताया कि इस येलो लाइन पर ₹7,610 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और इसकी लंबाई 19.5 किलोमीटर है। यह परियोजना बंगलूरू के लाखों यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगी। लेकिन जिस तरह से इसके उद्घाटन को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसने इसे राजनीतिक रणभूमि बना दिया है। अब देखना होगा कि मेट्रो परियोजना आम जनता के लिए कितनी जल्दी शुरू होती है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से इसका कितना असर पड़ता है।
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