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Sharad Pawar: 'PM से मेरी बातचीत का नतीजा', शरद पवार ने बताई धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की इनसाइड स्टोरी
Sat, 25 Jul 2026 05:40 PM IST
Devesh Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 25 Jul 2026 05:40 PM IST
सार
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने छात्रों की बची हुई दो मांगें भी मान ली हैं। इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन खत्म करने का एलान किया। वहीं, शरद पवार ने इसे पीएम मोदी के साथ अपनी मुलाकात से जोड़ते हुए चौंकाने वाला दावा किया है। आइए जानते हैं कि शरद पवार ने क्या-क्या कहा?
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शरद पवार और पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
केंद्र सरकार की ओर से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत अन्य दो मांगें मान लिए जाने के बाद जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रदर्शन खत्म करने का एलान कर दिया है। इस बीच एनसीपी (एसपी) के नेता शरद पवार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर चौंकाने वाला दावा किया है। शरद पवार ने दावा किया कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की वजह बनी।
शरद पवार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कहा कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और सरकार के बीच सौहार्दपूर्ण संवाद स्थापित करने का प्रयास किया था। उन्होंने दावा किया कि इसी चर्चा के नतीजे के तौर पर शिक्षा मंत्री ने आज इस्तीफा दिया।
छात्रों की बड़ी जीत : शरद पवार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) नेता शरद पवार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कहा कि यह देश की युवा शक्ति की बड़ी जीत है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''प्रदर्शनकारियों की लगातार मांग के जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने आखिरकार आज इस्तीफा दे दिया। अन्याय के खिलाफ बिना डरे और दमन का सामना करते हुए सरकार को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने के लिए मजबूर करने वाला यह संघर्ष लोकतंत्र की ताकत का प्रतीक है। यह देश की युवा शक्ति की एकजुटता की बड़ी जीत है। मैं सभी विपक्षी सांसदों को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने देश के युवाओं को नैतिक समर्थन दिया।''
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शरद पवार ने पीएम मोदी के साथ हुई मुलाकात पर क्या कहा?
जब एक पत्रकार ने पूछा कि क्या सरकार का रुख बदलना और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी प्रधानमंत्री से हुई बातचीत का नतीजा है, तो पवार ने कहा, "मैंने प्रधानमंत्री से जोर देकर कहा था कि छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई न की जाए और बातचीत शुरू की जाए। हो सकता है उन्होंने मेरी बात पर ध्यान दिया हो।"
पीएम मोदी से हुई मुलाकात और पर्दे के पीछे के घटनाक्रमों पर टिप्पणी करते हुए शरद पवार ने कहा, ''युवा पीढ़ी ने शांत और धैर्यपूर्वक देश के नेतृत्व के सामने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और इसमें सफलता मिली। मैंने स्वयं प्रधानमंत्री से मुलाकात की। मैंने उनसे अनुरोध किया कि लोकतंत्र में संवाद आवश्यक है। संवाद न करने के परिणाम भुगतने पड़ते हैं। आपको संवाद शुरू करना चाहिए।''
उन्होंने कहा, ''हमने अभिजीत और उनके सहयोगियों से बात की है। हमने उन्हें यह भी बताया है कि सरकार आपसे संवाद करने के लिए तैयार है और आपको भी तैयार रहना चाहिए। मैंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि वे बातचीत न करने पर अड़े न रहें और सौभाग्य से वे बातचीत के लिए तैयार हो गए। इसलिए, नरेंद्र मोदी के साथ मेरी बातचीत का परिणाम आज सामने आया है और शिक्षा मंत्री ने आज इस्तीफा दे दिया है।''
आखिर धर्मेंद्र प्रधान को क्यों देना पड़ा इस्तीफा?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे पिछले कई हफ्तों से बन रहा भारी सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव था। नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और परीक्षा की शुचिता से समझौता होने के आरोपों को लेकर देश के लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश था। इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच और कानूनी कार्रवाई पहले से ही चल रही है। विरोधियों और छात्र संगठनों का आरोप था कि केंद्र सरकार परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को दूर करने और छात्रों की चिंताओं का समय पर समाधान करने में पूरी तरह विफल रही है, जिसके बाद उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना पड़ा।
इस इस्तीफे के पीछे किस राजनीतिक आंदोलन का था सबसे बड़ा हाथ?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व मुख्य रूप से कॉकरोच जनता पार्टी के हाथों में था। सीजेपी जून की शुरुआत से ही इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरी हुई थी। इस आंदोलन का सबसे बड़ा मोड़ 20 जुलाई को आया, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों और युवा पेशेवरों का ऐतिहासिक हुजूम उमड़ पड़ा। उन्होंने वहां से संसद भवन तक मार्च करने की योजना बनाई थी, जिसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा युवा आंदोलन बताया गया। दिल्ली के अलावा मुंबई समेत कई अन्य बड़े शहरों में भी इस आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ तीखी झड़पें हुईं और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया।
सोनम वांगचुक के अनशन ने आंदोलन को कैसे धार दी?
नीट परीक्षा में सुधारों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को तब और बड़ी ताकत मिली, जब जाने-माने शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में आ गए। उन्होंने छात्रों की मांगों के समर्थन में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। 20 दिनों के लंबे अनशन के बाद जब उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने लगा, तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य ने पूरे देश का ध्यान इस मुद्दे की तरफ खींचा। उनके अस्पताल में भर्ती होने के तुरंत बाद सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए, जिसने आंदोलन की आग को और भड़का दिया।
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शरद पवार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कहा कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और सरकार के बीच सौहार्दपूर्ण संवाद स्थापित करने का प्रयास किया था। उन्होंने दावा किया कि इसी चर्चा के नतीजे के तौर पर शिक्षा मंत्री ने आज इस्तीफा दिया।
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छात्रों की बड़ी जीत : शरद पवार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) नेता शरद पवार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कहा कि यह देश की युवा शक्ति की बड़ी जीत है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''प्रदर्शनकारियों की लगातार मांग के जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने आखिरकार आज इस्तीफा दे दिया। अन्याय के खिलाफ बिना डरे और दमन का सामना करते हुए सरकार को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने के लिए मजबूर करने वाला यह संघर्ष लोकतंत्र की ताकत का प्रतीक है। यह देश की युवा शक्ति की एकजुटता की बड़ी जीत है। मैं सभी विपक्षी सांसदों को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने देश के युवाओं को नैतिक समर्थन दिया।''
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शरद पवार ने पीएम मोदी के साथ हुई मुलाकात पर क्या कहा?
जब एक पत्रकार ने पूछा कि क्या सरकार का रुख बदलना और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी प्रधानमंत्री से हुई बातचीत का नतीजा है, तो पवार ने कहा, "मैंने प्रधानमंत्री से जोर देकर कहा था कि छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई न की जाए और बातचीत शुरू की जाए। हो सकता है उन्होंने मेरी बात पर ध्यान दिया हो।"
पीएम मोदी से हुई मुलाकात और पर्दे के पीछे के घटनाक्रमों पर टिप्पणी करते हुए शरद पवार ने कहा, ''युवा पीढ़ी ने शांत और धैर्यपूर्वक देश के नेतृत्व के सामने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और इसमें सफलता मिली। मैंने स्वयं प्रधानमंत्री से मुलाकात की। मैंने उनसे अनुरोध किया कि लोकतंत्र में संवाद आवश्यक है। संवाद न करने के परिणाम भुगतने पड़ते हैं। आपको संवाद शुरू करना चाहिए।''
उन्होंने कहा, ''हमने अभिजीत और उनके सहयोगियों से बात की है। हमने उन्हें यह भी बताया है कि सरकार आपसे संवाद करने के लिए तैयार है और आपको भी तैयार रहना चाहिए। मैंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि वे बातचीत न करने पर अड़े न रहें और सौभाग्य से वे बातचीत के लिए तैयार हो गए। इसलिए, नरेंद्र मोदी के साथ मेरी बातचीत का परिणाम आज सामने आया है और शिक्षा मंत्री ने आज इस्तीफा दे दिया है।''
आखिर धर्मेंद्र प्रधान को क्यों देना पड़ा इस्तीफा?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे पिछले कई हफ्तों से बन रहा भारी सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव था। नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और परीक्षा की शुचिता से समझौता होने के आरोपों को लेकर देश के लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश था। इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच और कानूनी कार्रवाई पहले से ही चल रही है। विरोधियों और छात्र संगठनों का आरोप था कि केंद्र सरकार परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को दूर करने और छात्रों की चिंताओं का समय पर समाधान करने में पूरी तरह विफल रही है, जिसके बाद उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना पड़ा।
इस इस्तीफे के पीछे किस राजनीतिक आंदोलन का था सबसे बड़ा हाथ?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व मुख्य रूप से कॉकरोच जनता पार्टी के हाथों में था। सीजेपी जून की शुरुआत से ही इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरी हुई थी। इस आंदोलन का सबसे बड़ा मोड़ 20 जुलाई को आया, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों और युवा पेशेवरों का ऐतिहासिक हुजूम उमड़ पड़ा। उन्होंने वहां से संसद भवन तक मार्च करने की योजना बनाई थी, जिसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा युवा आंदोलन बताया गया। दिल्ली के अलावा मुंबई समेत कई अन्य बड़े शहरों में भी इस आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ तीखी झड़पें हुईं और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया।
सोनम वांगचुक के अनशन ने आंदोलन को कैसे धार दी?
नीट परीक्षा में सुधारों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को तब और बड़ी ताकत मिली, जब जाने-माने शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में आ गए। उन्होंने छात्रों की मांगों के समर्थन में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। 20 दिनों के लंबे अनशन के बाद जब उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने लगा, तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य ने पूरे देश का ध्यान इस मुद्दे की तरफ खींचा। उनके अस्पताल में भर्ती होने के तुरंत बाद सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए, जिसने आंदोलन की आग को और भड़का दिया।