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यौन शोषण मामला: हाईकोर्ट ने गोवा सरकार को दी तरुण तेजपाल के खिलाफ दायर अपील में बदलाव करने की अनुमति
Thu, 24 Jun 2021 04:02 PM IST
अजय सिंह
पीटीआई, पणजी
पीटीआई, पणजी
Published by: अजय सिंह
Updated Thu, 24 Jun 2021 04:02 PM IST
सार
गोवा की एक अदालत ने 21 मई को पत्रकार तरुण तेजपाल को यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया था।
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तरुण तेजपाल (फाइल फोटो)
- फोटो : social media
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विस्तार
पत्रकार तरूण तेजपाल को 2013 के दुष्कर्म के एक मामले में बरी किए जाने के अदालत के फैसले खिलाफ गोवा सरकार की अपील पर बंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने गुरुवार को सुनवाई 29 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी। न्यायमूर्ति एम एस सोनक और न्यायमूर्ति एम एस जवालकर की खंडपीठ ने सरकार को उनकी अपील में संशोधन करने और उसकी एक प्रति के साथ सभी संबंधित दस्तावेज तेजपाल को देने की अनुमति प्रदान की है।
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तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ से कहा कि इन्हें तैयार करने में थोड़ा समय लगेगा। इस पर पीठ ने कहा कि वह 29 जुलाई को अपील पर सुनवाई करेगी। पीठ ने सरकार को एक सप्ताह में याचिका में सुधार करने और उसके बाद एक सप्ताह में उसकी एक प्रति देने का निर्देश दिया।
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गोवा की एक सत्र अदालत ने 21 मई को पत्रकार तरुण तेजपाल को यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया था। बता दें कि तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक पर 2013 में गोवा के एक पांच-सितारा होटल की लिफ्ट में एक महिला सहयोगी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश क्षमा जोशी ने तेजपाल को मामले में बरी कर दिया।
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गोवा सत्र न्यायालय का 527 पन्ने का आदेश
सत्र न्यायाधीश क्षमा जोशी ने अपने आदेश में लिखा था कि पीड़िता जिस तरह से आरोपी को कथित यौन उत्पीड़न के बाद आरोपी के बिना पूछे अपनी लोकेशन भेज रही है, यह उसके साथ किसी तरह के दुर्व्यवहार (जैसा कि पीड़िता ने बयां किया) का संकेत नहीं देता। इनका व्यवहार और रवैया किसी यौन पीड़ित जैसा बिल्कुल नहीं है।
तेजपाल पर अपनी एक सहकर्मी के साथ 2013 के एक आयोजन में गोवा के पांच सितारा होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। कोर्ट ने कहा, कथित दुर्व्यवहार के बाद के सीसीटीवी फुटेज और फोटोग्राफ में साफ दिख रहा है कि पीड़िता अच्छे मूड में है, खुश है और बिल्कुल सामान्य व्यवहार कर रही है।
उन पर किसी तरह का तनाव या दर्द नहीं दिखाई दे रहा है। इनमें लिफ्ट से बाहर आते वक्त उनके चेहरे पर कोई शिकन या आंखों में आंसू नहीं दिख रहे हैं, जैसा कि उन्होंने कोर्ट को बताया। कोर्ट ने कहा, रेप या यौन उत्पीड़न जो गहरा सदमा देते हैं उसे झुठलाया नहीं जा सकता, लेकिन इस मामले में पीड़िता के हाव-भाव में दूर-दूर तक ऐसा नहीं दिखाई देता। इस लिए अदालत को लगता है कि आरोपी पर लगाए गए तमाम आरोप सही साबित नहीं होते।
पीड़िता को कोई चोट भी नहीं आई
कोर्ट ने कहा था कि जैसा कि पीड़िता का दावा है कि यौन उत्पीड़न के दौरान उसकी आरोपी के साथ जोर झपट हुई तो उनके शरीर पर कोई चोट भी आनी चाहिए थी। लेकिन यहां तो एक खरोंच तक नहीं आई। साथ ही पीड़िता पढ़ी-लिखी है और कानून को समझती भी है।
ऐसे में जोर जबरदस्ती के दौरान उसने आरोपी को धक्का जरूर दिया होता, आखिर वह भी एक पत्रकार है लेकिन उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया। इससे साफ है कि यौन उत्पीड़न की जो कहानी कोर्ट में सुनाई गई वह वास्तव में मूल घटनाक्रम से अलग है।