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Tamil Nadu: सात गांवों ने मनाई अनोखी दिवाली, पक्षियों को परेशानी से बचाने के लिए उठाया ये कदम, बनाई मिसाल
Mon, 13 Nov 2023 09:24 AM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इरोड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इरोड
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Mon, 13 Nov 2023 09:24 AM IST
सार
तमिलनाडु स्थित सात गांवों के दीपावली पर पटाखे न फोड़ने के निर्णय ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। गांव ने पास में मौजूद पक्षी अभयारण्य के चलते यह फैसला लिया गया। पढ़िए पूरा मामला...
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पक्षी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
विस्तार
बीते रविवार को देशभर में दीपावली की धूम रही। कई लोगों ने इस दौरान आतिशबाजी की। देश के कई हिस्सों में जमकर पटाखे फोड़े गए। इसी बीच दूसरी ओर, तमिलनाडु के इरोड जिले के सात गांवों ने पटाखे न फोड़ने का फैसला लिया। निकट में मौजूद पक्षी अभयारण्य को देखते हुए गांवों वालों ने यह निर्णय लिया।
पक्षियों को न हो दिक्कत, इसलिए नहीं की आतिशबाजी
देशभर में दीपावली को लेकर धूम मची हुई थी। कई शहरों में जमकर आतिशबाजी की गई़। तेज आवाज और चमकदार पटाखों से आसमान जगमग था। लेकिन तमिलनाडु के इरोड जिले में लोगों ने आतिशबाजी से किनारा किया। यह फैसला किसी दबाव में नहीं बल्कि पक्षियों को हानि न हो इसके लिए लिया गया। इरोड जिले के सात गांवों से सटे पक्षी अभयारण्य को नुकसान या दिक्कत न हो इसलिए यह निर्णय लिया गया था। गांववासियों के मुताबिक, बड़ी संख्या में यहां पक्षी निवास करते हैं, पटाखों की आवाज और चिंगारी से उन्हें नुकसान न हो इसलिए हमने पटाखों से दूरी बना ली थी। बता दें इरोड से 10 किलोमीटर दूर वदामुगम वेल्लोड के पास पक्षी अभयारण्य स्थित है।
अक्तूबर-जनवरी के बीच यहां पहुंचते हैं बड़ी संख्या में पक्षी
कई क्षेत्रों से प्रवासी पक्षी और स्थानीय पक्षी प्रजातियां अक्तूबर से जनवरी माह के बीच अंडे देते है। जिसके लिए बड़ी संख्या में यहां पक्षी अभयारण्य में पहुंचते हैं। अमूमन इन्हीं माह के दौरान दीपावली पर्व भी पड़ता है। जिसके चलते गांववासियों ने सादगी से दीपावली मनाने का फैसला लिया। न कोई आतिशबाजी, न कोई धूम धड़ाके की आवाज, सिर्फ दीये जलाकर दीपावली मनाई। ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले 22 वर्षों से इस संरक्षण दृष्टिकोण का पालन किया जा रहा है।
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ग्रामीणों ने कहा, दिवाली के दौरान वे अपने लिए नए कपड़े खरीदते हैं, केवल फुलझड़ियां जलाने की अनुमति देते हैं। लेकिन आवाज वाले पटाखों पर सख्त मनाही है। सेलप्पमपलयम, वदामुगम वेल्लोड, सेम्मांडमपालयम, करुक्कनकट्टू वलासु, पुंगमपाडी और दो अन्य गांवों में 'मौन दीपावली' की परंपरा को बरकरार रखा गया।
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पक्षियों को न हो दिक्कत, इसलिए नहीं की आतिशबाजी
देशभर में दीपावली को लेकर धूम मची हुई थी। कई शहरों में जमकर आतिशबाजी की गई़। तेज आवाज और चमकदार पटाखों से आसमान जगमग था। लेकिन तमिलनाडु के इरोड जिले में लोगों ने आतिशबाजी से किनारा किया। यह फैसला किसी दबाव में नहीं बल्कि पक्षियों को हानि न हो इसके लिए लिया गया। इरोड जिले के सात गांवों से सटे पक्षी अभयारण्य को नुकसान या दिक्कत न हो इसलिए यह निर्णय लिया गया था। गांववासियों के मुताबिक, बड़ी संख्या में यहां पक्षी निवास करते हैं, पटाखों की आवाज और चिंगारी से उन्हें नुकसान न हो इसलिए हमने पटाखों से दूरी बना ली थी। बता दें इरोड से 10 किलोमीटर दूर वदामुगम वेल्लोड के पास पक्षी अभयारण्य स्थित है।
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अक्तूबर-जनवरी के बीच यहां पहुंचते हैं बड़ी संख्या में पक्षी
कई क्षेत्रों से प्रवासी पक्षी और स्थानीय पक्षी प्रजातियां अक्तूबर से जनवरी माह के बीच अंडे देते है। जिसके लिए बड़ी संख्या में यहां पक्षी अभयारण्य में पहुंचते हैं। अमूमन इन्हीं माह के दौरान दीपावली पर्व भी पड़ता है। जिसके चलते गांववासियों ने सादगी से दीपावली मनाने का फैसला लिया। न कोई आतिशबाजी, न कोई धूम धड़ाके की आवाज, सिर्फ दीये जलाकर दीपावली मनाई। ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले 22 वर्षों से इस संरक्षण दृष्टिकोण का पालन किया जा रहा है।
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ग्रामीणों ने कहा, दिवाली के दौरान वे अपने लिए नए कपड़े खरीदते हैं, केवल फुलझड़ियां जलाने की अनुमति देते हैं। लेकिन आवाज वाले पटाखों पर सख्त मनाही है। सेलप्पमपलयम, वदामुगम वेल्लोड, सेम्मांडमपालयम, करुक्कनकट्टू वलासु, पुंगमपाडी और दो अन्य गांवों में 'मौन दीपावली' की परंपरा को बरकरार रखा गया।