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Seema Haider: सीमा ने अपनाया 26/11 वाला आतंकी मॉड्यूल! आईएसआई ने की नेपाल में सीमा की मदद

Wed, 19 Jul 2023 03:10 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Wed, 19 Jul 2023 03:10 PM IST
सार

Seema Haider: उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक विक्रम सिंह कहते हैं कि सीमा ने वही मॉड्यूल अपनाया जो पाकिस्तान के आतंकवादी घुसपैठ के दौरान अपनाते हैं। उन्होंने कहा कि 26/11 के दौरान भी आतंकियों ने इसी मॉड्यूल को अपनाया था जो सीमा ने नेपाल में किया...

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Seema Haider adopted 26/11 terror module! ISI helped border in Nepal
Seema Haider - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

पाकिस्तान से नोएडा पहुंची सीमा हैदर ने बातचीत करने के लिए आतंकवादियों का वह मॉड्यूल अपनाया जो 26/11 में अपनाया गया था। इस मॉड्यूल को पाकिस्तान के आईएसआई की ओर से तीन से सात महीने के प्रशिक्षण के दौरान दिया जाता है। यह मॉड्यूल पूरी तरीके से इंक्रिप्टेड होता है, जिस मॉड्यूल के माध्यम से सीमा ने नेपाल में बातचीत की उसको खुफिया एजेंसियों ने अपनी पड़ताल में पकड़ लिया है। हालांकि इस पर आगे अभी जांच चल रही है। फिलहाल बातचीत का यह वही मॉड्यूल है जो 26/11 के दौरान पकड़े गए आतंकियों ने पाकिस्तान में अपने आकाओं से बातचीत के लिए अपनाया था। जांच एजेंसियों से जुड़े रहे वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि सीमा ने जिस वीओआईपी के माध्यम से बातचीत की, उसके लिए इंटरनेट की व्यवस्था आईएसआई की स्लीपर सेल ने नेपाल में कराई। यही नहीं भारत में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी सीमा हैदर पर पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह की जाने वाली विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग में भी इसका कोई जिक्र नहीं किया था। फिलहाल बीते कुछ समय से चल रही अपनी इस जांच रिपोर्ट को खुफिया अधिकारियों के साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ साझा भी किया है।

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यह भी पढ़ें: Seema Haider: माता हारी तो नहीं सीमा हैदर! क्या गुनाह पर टिकी प्यार की इनसाइड स्टोरी, पाकिस्तान से आएगा सुराग

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नेपाल में इस तरीके से किया सीमा ने कॉल

इस पूरे मामले की तहकीकात कर रही खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शुरुआती दौर में जिस तरीके की जानकारियां मिल रही हैं, वह यही हैं कि सीमा हैदर ने नेपाल में जिस मॉड्यूल के माध्यम से बातचीत की, वैसे पाकिस्तान की ओर से प्रशिक्षित आतंकी ही करते हैं। सूत्रों के मुताबिक सीमा हैदर ने नेपाल में बात करने के लिए अपने एक दोस्त के वाईफाई नेटवर्क से अपने मोबाइल फोन को कनेक्ट किया। उसके बाद उसने फिर कई कॉल भी की। खुफिया एजेंसियों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इंक्रिप्टेड कॉल करने के ऐसे तरीके आतंकी गतिविधियों के दौरान एक विशेष योजना के तहत किए जाते हैं। वह कहते हैं कि आईएसआई बाकायदा आतंकियों को अपने प्रशिक्षण के दौरान इस तरीके की तमाम इंक्रिप्टेड कॉल करने के और तरीकों पर प्रशिक्षण भी देती है। इसमें स्थानीय भाषा में बात करने के लोकल एक्सेंट समेत ऑब्जेक्ट को भेजे जाने वाले रूट की महीनों प्रशिक्षण के बाद पूरी जानकारियां मुहैया कराई जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि सीमा के मामले में इस तरीके से की जाने वाली बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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आईएसआई ने उपलब्ध कराया वीओआईपी!

खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि घुसपैठ करने वाले आतंकी जब कभी बातचीत करते हैं, तो ऐसे ही माध्यम से वह अपने आकाओं से संपर्क करते हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह सीमा हैदर पर सवालिया निशान लगाते हुए कहते हैं कि उसने जिस तरीके से नेपाल में वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) के माध्यम से बातचीत की, वह आतंकी मॉड्यूल पर बातचीत करने का एक बड़ा सधा हुआ तरीका होता है। जिसे पाकिस्तान में आईएसआई और पाकिस्तानी सेना के कई बेस कैंप में प्रशिक्षण के दौरान आतंकियों को सिखाया भी जाता है। पूर्व आईपीएस विक्रम सिंह कहते हैं कि जिस तरीके से सीमा ने नेपाल में बातचीत की, उससे स्पष्ट होता है कि उसको आईएसआई की स्लीपर सेल ने वीओआईपी के माध्यम से वाईफाई कनेक्ट कराया और फिर उसने बातचीत शुरू की। उनका कहना है बीते कुछ समय से जिस तरीके से नेपाल में आईएसआई की सक्रियता बढ़ी है उससे इस मामले को जोड़ कर ही देखा जाना चाहिए।

3 से 7 महीने में बदल जाता है बातचीत करने का एक्सेंट

पूर्व आईपीएस अधिकारी विक्रम सिंह कहते हैं कि पाकिस्तान के बहावलपुर में सेना कैंप में इस तरीके का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें बातचीत का पूरा एक्सेंट ही बदल दिया जाए। वह कहते हैं कि सीमा जिस तरीके से बातचीत कर रही है उसके एक्सेंट से कहीं से भी पाकिस्तानी भाषा शैली का पुट नजर नहीं आ रहा है। वह कहते हैं पाकिस्तान में रहने वाली सीमा को चार भाषाएं आती हैं- हिंदी, सिंधी, उर्दू और अंग्रेजी। पूर्व पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विक्रम सिंह का कहना है कि पाकिस्तान में अफगानिस्तान बॉर्डर से लेकर कश्मीर और पंजाब के बॉर्डर तक के रहने वालों का एक्सेंट (भाषा शैली का पुट) पाकिस्तान की अपनी भाषाओं और उनकी अपनी शैली के अनुरूप होता है। लेकिन पाकिस्तान में ही पूरी जिंदगी गुजार देने वाली सीमा में यह पुट नोएडा में तो नजर नहीं आ रही है। वो कहते हैं कि पाकिस्तान की ओर से जब इस तरीके की घुसपैठ की जाती है तो बड़े प्रशिक्षण दिए जाते हैं। इसमें सबसे अहम भाषा शैली होती है। खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि योजना अनुरूप किसी को जासूस बनाकर भेजने में इस तरीके का प्रशिक्षण महत्वपूर्ण होता है।

बगैर प्रशिक्षण के कैसे बदले गए पाकिस्तानी रुपये

पूर्व आईपीएस अधिकारी विक्रम सिंह सवालिया निशान उठाते हैं कि आखिर पांचवी क्लास तक पढ़ी हुई सीमा कैसे दुबई में मनी एक्सचेंज पर जाकर रुपये बदलती है। फिर नेपाल में आकर अपनी करेंसी को बगैर किसी मदद के कैसे बदल लेती है। उनका कहना है कि यह बगैर आईएसआई के स्लीपर सेल की सपोर्ट के संभव ही नहीं हो सकता है। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक और तमाम अहम पदों पर रह चुके विक्रम सिंह का कहना है कि पाकिस्तान के बहावलपुर में बने सेना के कैंप में इस तरीके से प्रशिक्षण दिए जाते हैं, जिसमें इन सब चीजों की सघन ट्रेनिंग होती है। उनका कहना है कि कुछ समय में जिस तरह नेपाल में आईएसआई ने स्लीपर सेल का विस्तार किया है और सीमा ने वहीं रह कर अपने रिश्तो को आगे बढ़ाया है, वह शक तो पैदा ही करते हैं। उनका कहना है कि आखिर कौन सी वजह थी कि सीमा को सेना के लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट फेसबुक के माध्यम से भेजनी पड़ी। वो कहते हैं कि इस पूरे मामले की जब गहराई से जांच होगी, तो पता चलेगा कि दरअसल यह कहानी इश्क मोहब्बत की नहीं बल्कि जासूसी के लिए भेजे गए एक "ऑब्जेक्ट" की है।

आखिर पाकिस्तान ने क्यों नहीं किया वीकली ब्रीफिंग में जिक्र

विदेशी मामलों के जानकार और लंबे समय तक खुफिया एजेंसी में काम कर चुके सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान में हर सप्ताह एक ब्रीफिंग होती है। यह ब्रीफिंग पाकिस्तान में सेना और विदेश मंत्रालय के माध्यम से की जाती है। सूत्रों का कहना है कि जुलाई के पहले सप्ताह में जब सीमा के भारत आने की जानकारी मीडिया में छाई तो पाकिस्तान में इस पर सन्नाटा छाया रहा। पाकिस्तान के मामलों को करीब से समझने वाले पूर्व अधिकारी ब्रिगेडियर दीपेंद्र सहोता कहते हैं कि जुलाई के पहले सप्ताह में पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली वीकली ब्रीफिंग में आखिर सीमा का जिक्र क्यों नहीं किया गया। वह सवाल उठाते हैं कि जब सीमा का मामला समूचे देश में उफान पर चल रहा था, तो पाकिस्तान को इस मामले में अपनी सप्ताहिक ब्रीफिंग में सफाई देनी चाहिए थी। उनका कहना है कि सिर्फ दो कारणों से ही ऐसा संभव है। पहला या तो सीमा के मामले में पाकिस्तानी सेना और सरकार चुप्पी साध कर चुपचाप अपने किसी अभियान को आगे बढ़ाना चाहती थी। या फिर इस मामले में बेवजह बयान देकर किसी पचड़े में नहीं फंसना चाहती थी। लेकिन बीते कुछ दिनों में जिस तरीके से सीमा को लेकर भारत में जांच शुरू हुई और उसकी आंच पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी और सेना तक पहुंची तो वहां पर भी हलचलें शुरू हो गईं।

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