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Kashmiri Pandit: जम्मू-कश्मीर विस में कश्मीरी पंडित-पीओके के लिए आरक्षित होंगी सीटें, लोकसभा में पेश विधेयक

Wed, 06 Dec 2023 06:38 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 06 Dec 2023 06:38 AM IST
सार

विधेयक पर बहस के दौरान हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू की गलतियों को सुधारते हुए इसी संसद में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए को निरस्त किया।

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Seats will be reserved for Kashmiri Pandits-PoK in Jammu and Kashmir Assembly
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोक सभा की कार्यवाही - फोटो : social media

विस्तार

शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार लोकसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2023 पेश किए गए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को चर्चा का औपचारिक रूप से जवाब देंगे।
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विधेयकों के कानूनी जामा पहनने के बाद राज्य की विधानसभा में सीटों की संख्या बढ़ कर 114 हो जाएगी। विधानसभा में पहली बार विस्थापित कश्मीरी पंडितों और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लिए क्रमश: दो और एक सीटें आरक्षित होंगी। इन्हें उपराज्यपाल नामित करेंगे। नामित करने के दौरान महिला वर्ग से एक प्रतिनिधि सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। अनुसूचित जनजाति के लिए नौ सीटें आरक्षित की गई हैं, जबकि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 6 से बढ़ा कर 7 कर दी है।
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वहीं, आरक्षण विधेयक के जरिए राज्य की आरक्षण नीति में व्यापक बदलाव किया गया है। आरक्षण विधेयक के तहत देश के दूसरे राज्यों की तरह ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी ओबीसी, एससी, एसटी और सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण की व्यवस्था की गई है। खासबात यह है कि मुस्लिम गुर्जरों के विरोध को सिरे से नकारते हुए पहाड़ी समुदाय से जुड़ी कई जातियों को भी एसटी का दर्जा दिया गया है। सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग में दोनों केंद्रशासित प्रदेशों के पिछड़े घोषित किए गए गांवों, वास्तविक नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को शामिल किया गया है।
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अनुच्छेद 370-35 (ए) हटने के बाद गली-गली में फहरा रहा तिरंगा : अनुराग
विधेयक पर बहस के दौरान हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू की गलतियों को सुधारते हुए इसी संसद में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए को निरस्त किया। एक वक्त था जब लाल चौक पर विपक्ष के नेता भी झंडा नहीं फहरा सकते थे लेकिन अब सिर्फ लालचौक ही नहीं कश्मीर की गली-गली में झंडा फहराया जा रहा है।

ठाकुर ने कहा, अभी चुनाव का जिक्र किया गया। कोरोना के दौरान मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव कराये आैर न सिर्फ कराए गए बल्कि प्रधानमंत्री पंचायतों से मिले भी और यह सुनिश्चित भी किया कि कश्मीर के गांव-गांव तक विकास पहुंचे। ठाकुर ने कहा कि यहां परिवारों के योगदान का जिक्र किया गया लेकिन मैं किसी परिवार पर नहीं जाता। मैं बस यह कहना चाहता हूं कि एक परिवार की भक्ति में यहां लोग महाराजा हरि सिंह का नाम भूल गए। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या महाराज हरि सिंह का कोई योगदान नहीं है? क्या सरदार पटेल का कोई योगदान नहीं, जिन्होंने 500 से अधिक रियासतों को भारत में जोड़कर वर्तमान के मजबूत भारत की नींव रखी।

टीएमसी सांसद को गृह मंत्री की खरी-खरी
विधेयक पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि एक झंडा, एक प्रधान, एक संविधान की अवधारणा कोई राजनीतिक नारा नहीं है। भाजपा इस सिद्धांत पर दृढ़ता से विश्वास करती है और इसे जम्मू-कश्मीर के संबंध में लागू किया है। टीएमसी के सौगत रॉय की आेर से चर्चा के दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कथन ‘एक निशान, एक प्रधान, एक संविधान’ को राजनीतिक नारा बताने पर शाह ने आपत्ति जताते हुए कहा, दादा उमर हो चुकी है! एक देश में दो प्रधानमंत्री कैसे हो सकते हैं? एक देश में दो संविधान कैसे हो सकते हैं? एक देश के दो झंडे कैसे हो सकते हैं? वो गलत है। जिन्होंने भी ये किया था, गलत किया था। नरेंद्र मोदी सरकार ने इसको सुधारने का काम किया है। आपकी सहमति-असहमति से क्या होता है... पूरा देश चाहता है। यह चुनावी नारा नहीं है, हम 1950 से कह रहे थे।


अनुच्छेद 370 के मुद्दे को उठाते हुए रॉय ने कहा कि अनुच्छेद के खत्म होने के बावजूद राज्य में कोई बदलाव नहीं हुआ है। एनसीपी की सुप्रिया सुले ने भी वहां जल्द विधानसभा चुनाव कराने की मांग की। कांग्रेस के मनीष तिवारी ने सवाल किया कि जब अनुच्छेद 370 खत्म करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोई फैसला नहीं दिया है तब सरकार ऐसे विधेयक कैसे ला सकती है? उन्होंने दोनों विधेयकों को असांविधानिक बताया।
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