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SCO summit: पाकिस्तानी विदेश मंत्री का भारत दौरा कितना जरूरी, कंगाल हो रहे देश के लिए इससे क्या उम्मीदें?
Thu, 04 May 2023 04:52 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Thu, 04 May 2023 04:52 PM IST
सार
आइये जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान के लिए ये दौरा कितना अहम है? इससे पाकिस्तान को क्या फायदा हो सकता है? बिलावल भुट्टो का क्या उद्देश्य है?
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भारत-पाकिस्तान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आज भारत आए हैं। साल 2011 के बाद भारत का दौरा करने वाले बिलावल पाकिस्तान के पहले विदेश मंत्री हैं।
12 साल पहले हिना रब्बानी खार दिल्ली आईं थीं। बीते 12 साल में भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में काफी कुछ बदल चुका है। ऐसे में बिलावल भुट्टो की भारत यात्रा काफी चर्चा में है। इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। आइये जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान के लिए ये दौरा कितना अहम है? इससे पाकिस्तान को क्या फायदा हो सकता है? बिलावल भुट्टो का क्या उद्देश्य है?
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12 साल पहले हिना रब्बानी खार दिल्ली आईं थीं। बीते 12 साल में भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में काफी कुछ बदल चुका है। ऐसे में बिलावल भुट्टो की भारत यात्रा काफी चर्चा में है। इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। आइये जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान के लिए ये दौरा कितना अहम है? इससे पाकिस्तान को क्या फायदा हो सकता है? बिलावल भुट्टो का क्या उद्देश्य है?
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पहले जानिए बिलावल भुट्टो का कार्यक्रम
आज से गोवा में दो दिवसीय सम्मेलन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) देशों के विदेश मंत्रियों की मेजबानी भारत करेगा। विदेश मंत्री एस जयशंकर की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में चीनी विदेश मंत्री किन गैंग, रूस के सर्गेई लावरोव और पाकिस्तान के बिलावल भुट्टो जरदारी शामिल होंगे।
पाकिस्तान से गोवा के लिए निकलते हुए भुट्टो ने एक वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने कहा, 'मैं गोवा, भारत यात्रा के लिए जा रहा हूं। इस बैठक में भाग लेने का निर्णय शंघाई सहयोग संगठन के चार्टर के प्रति पाकिस्तान की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मैं SCO सीएफएम में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करूंगा। मेरी यात्रा के दौरान मैत्रीपूर्ण देशों के समकक्षों के साथ एक सकारात्मक वार्ता मेरे एजेंडे में है, जो विशेष रूप से एससीओ पर केंद्रित है।'
आज से गोवा में दो दिवसीय सम्मेलन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) देशों के विदेश मंत्रियों की मेजबानी भारत करेगा। विदेश मंत्री एस जयशंकर की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में चीनी विदेश मंत्री किन गैंग, रूस के सर्गेई लावरोव और पाकिस्तान के बिलावल भुट्टो जरदारी शामिल होंगे।
पाकिस्तान से गोवा के लिए निकलते हुए भुट्टो ने एक वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने कहा, 'मैं गोवा, भारत यात्रा के लिए जा रहा हूं। इस बैठक में भाग लेने का निर्णय शंघाई सहयोग संगठन के चार्टर के प्रति पाकिस्तान की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मैं SCO सीएफएम में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करूंगा। मेरी यात्रा के दौरान मैत्रीपूर्ण देशों के समकक्षों के साथ एक सकारात्मक वार्ता मेरे एजेंडे में है, जो विशेष रूप से एससीओ पर केंद्रित है।'
क्या भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार देखने को मिलेगा?
ये समझने के लिए हमने विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल से बात की। उन्होंने कहा, '2011 में जब हिना रब्बानी भारत आईं थीं, तब और आज के हालात में काफी अंतर है। तब दोनों देशों के रिश्तों में इतनी कड़वाहट नहीं थी, जितनी आज है। 2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद से पाकिस्तान अलग ही ट्रैक पर चल रहा है। पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश की तो भारत ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया। सर्जिकल स्ट्राइक और फिर एयर स्ट्राइक के जरिए भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर आतंकियों को मारा।'
आदित्य कहते हैं, 'बिलावल का ये दौरा भारत और पाकिस्तान से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। भारत और पाकिस्तान दोनों शंघाई सहयोग परिषद (SCO) को काफी महत्व देते हैं। साल 2001 में मध्य एशिया में सुरक्षा और आर्थिक मामलों पर चर्चा करने के लिए एससीओ की स्थापना की गई थी। इसका नेतृत्व पाकिस्तान का करीबी मित्र चीन और नया उभरता मित्र रूस करता रहा है। इसमें मध्य एशिया के चार सदस्य भी शामिल हैं। मध्य एशिया एक ऐसा भू-क्षेत्र है जहां पाकिस्तान व्यापार, कनेक्टिविटी और ऊर्जा को बढ़ावा देने की उम्मीद करता है। ऐसे में पाकिस्तान के सम्मेलन में भाग न लेने से उसके एक ऐसे संगठन से अलग-थलग होने का खतरा बढ़ जाएगा जो उसके हितों को मजबूती से अपनाता है।'
डॉ. आदित्य के अनुसार, 'बिलावल के इस दौरे के दौरान कम ही उम्मीद है कि भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ कोई द्विपक्षीय वार्ता हो। अगर दोनों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद की जा रही है तो ये महत्वहीन है। इससे दोनों देशों के रिश्तों के बीच कोई खास असर नहीं पड़ेगा। पाकिस्तानी विदेश मंत्री भारत के साथ सुलह करने नहीं आ रहे हैं। वह एक ऐसे क्षेत्रीय संगठन के एक सम्मेलन में भाग लेने आ रहे हैं जो पाकिस्तान के हितों के लिए काफी महत्व रखता है।'
ये समझने के लिए हमने विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल से बात की। उन्होंने कहा, '2011 में जब हिना रब्बानी भारत आईं थीं, तब और आज के हालात में काफी अंतर है। तब दोनों देशों के रिश्तों में इतनी कड़वाहट नहीं थी, जितनी आज है। 2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद से पाकिस्तान अलग ही ट्रैक पर चल रहा है। पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश की तो भारत ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया। सर्जिकल स्ट्राइक और फिर एयर स्ट्राइक के जरिए भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर आतंकियों को मारा।'
आदित्य कहते हैं, 'बिलावल का ये दौरा भारत और पाकिस्तान से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। भारत और पाकिस्तान दोनों शंघाई सहयोग परिषद (SCO) को काफी महत्व देते हैं। साल 2001 में मध्य एशिया में सुरक्षा और आर्थिक मामलों पर चर्चा करने के लिए एससीओ की स्थापना की गई थी। इसका नेतृत्व पाकिस्तान का करीबी मित्र चीन और नया उभरता मित्र रूस करता रहा है। इसमें मध्य एशिया के चार सदस्य भी शामिल हैं। मध्य एशिया एक ऐसा भू-क्षेत्र है जहां पाकिस्तान व्यापार, कनेक्टिविटी और ऊर्जा को बढ़ावा देने की उम्मीद करता है। ऐसे में पाकिस्तान के सम्मेलन में भाग न लेने से उसके एक ऐसे संगठन से अलग-थलग होने का खतरा बढ़ जाएगा जो उसके हितों को मजबूती से अपनाता है।'
डॉ. आदित्य के अनुसार, 'बिलावल के इस दौरे के दौरान कम ही उम्मीद है कि भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ कोई द्विपक्षीय वार्ता हो। अगर दोनों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद की जा रही है तो ये महत्वहीन है। इससे दोनों देशों के रिश्तों के बीच कोई खास असर नहीं पड़ेगा। पाकिस्तानी विदेश मंत्री भारत के साथ सुलह करने नहीं आ रहे हैं। वह एक ऐसे क्षेत्रीय संगठन के एक सम्मेलन में भाग लेने आ रहे हैं जो पाकिस्तान के हितों के लिए काफी महत्व रखता है।'
पाकिस्तान के लिए कितना जरूरी है ये दौरा?
डॉ. आदित्य कहते हैं, 'मौजूदा समय पाकिस्तान कई तरह के संकट से जूझ रहा है। आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि लोग सड़कों पर उतर आए हैं। पाकिस्तान में लोग भूखे मर रहे हैं। कई देशों ने पाकिस्तान को मदद देने से भी इनकार कर दिया है। ऐसे समय अगर पाकिस्तान एससीओ बैठक में शामिल नहीं होता है तो वह पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाएगा।'
डॉ. आदित्य के अनुसार, बिलावल ने साफ कह दिया है कि वह इस यात्रा के दौरान अपने मित्र देशों के समकक्ष के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। संभव है कि इस दौरान रूस और चीन के विदेश मंत्रियों के साथ बिलावल भुट्टो बैठक करें। इसके जरिए वह अपने देश के लिए मदद मांग सकते हैं। इसके अलावा कई अन्य मामलों को लेकर भी समझौता कर सकते हैं। ये पाकिस्तान की विदेश नीति को मजबूत करने का एक कार्यक्रम है।
डॉ. आदित्य कहते हैं, 'मौजूदा समय पाकिस्तान कई तरह के संकट से जूझ रहा है। आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि लोग सड़कों पर उतर आए हैं। पाकिस्तान में लोग भूखे मर रहे हैं। कई देशों ने पाकिस्तान को मदद देने से भी इनकार कर दिया है। ऐसे समय अगर पाकिस्तान एससीओ बैठक में शामिल नहीं होता है तो वह पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाएगा।'
डॉ. आदित्य के अनुसार, बिलावल ने साफ कह दिया है कि वह इस यात्रा के दौरान अपने मित्र देशों के समकक्ष के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। संभव है कि इस दौरान रूस और चीन के विदेश मंत्रियों के साथ बिलावल भुट्टो बैठक करें। इसके जरिए वह अपने देश के लिए मदद मांग सकते हैं। इसके अलावा कई अन्य मामलों को लेकर भी समझौता कर सकते हैं। ये पाकिस्तान की विदेश नीति को मजबूत करने का एक कार्यक्रम है।