कोरोना की आनुवांशिक विविधता पर वैज्ञानिक करेंगे अध्ययन
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दुनिया के 17 से भी ज्यादा देशों के कोरोना वायरस के प्रकार भारत में अब तक मिल चुके है। अब भारतीय वैज्ञानिकों ने वायरस की आनुवांशिक विविधता को जानने के लिए अध्ययन का फैसला लिया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का बायोटेक्नॉलोजी विभाग एक हजार और सीएसआईआर 100 सैंपल का अध्ययन करेगा।
जबकि आईसीएमआर अलग- अलग राज्यों के सैंपल पर अध्ययन करेगा। इसके लिए संबंधित राज्यों से पॉजीटिव मरीजों के सैंपल मंगाए जाएंगे। आईसीएमआर की डॉ. निवेदिता गुप्ता बताती हैं कि संक्रमण की वृद्धि को समझने के लिए अलग-अलग राज्यों से संक्रमित मरीजों के सैंपल मंगाकर पुणे स्थित एनआईवी लैब में परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए सभी राज्य व केंद्र शासित राज्यों को निर्देश दिए जा चुके हैं। कुछ संस्थानों में इस समय कोरोना वायरस की जांच भी चल रही है।
- कोरोना को समझना है बेहद जरूरी : विशेषज्ञ
डीबीटी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक बताते हैं कि कोरोना को समझना बेहद जरूरी है अन्यथा हम इसे लेकर बेहतर प्रबंधन नहीं बना सकते। हमारे यहां अब तक 17 देशों के कोरोना वायरस मिल चुके हैं। इसलिए सटीक परिणाम मिलने के लिए हमें देश के हर राज्य की स्थिति का पता होना जरूरी है, ऐसा तभी होगा जब हम वहां के संक्रमण का परीक्षण करें।
- जहां रिकवरी कम, वहां संक्रमण बिल्कुल अलग...
आईसीएमआर के एक वरिष्ठ महामारी विशेषज्ञ के मुताबिक महाराष्ट्र, गुजरात, एमपी, दिल्ली, तमिलनाडु में मरीज ज्यादा हैं। सबसे कम रिकवरी दर गुजरात में है। इसके पीछे वजह संक्रमण का स्ट्रेन है जोकि बाकी राज्यों से अलग है।
यहां एल टाइप का स्ट्रेन मिला है जो वुहान में था। जबकि कुछ राज्य में एस स्ट्रेन भी मिला है। ठीक इसी तरह इंदौर में कोरोना का अलग स्ट्रेन मिलने का अंदेशा है क्योंकि वहां यह ज्यादा तीव्र है। अभी इसकी जांच भी चल रही है।