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Pending Cases: लंबित मामलों के बोझ से दबी न्यायपालिका को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने 13147 पुराने मामले खत्म किए

Fri, 16 Sep 2022 10:21 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 16 Sep 2022 10:21 PM IST
सार

मामलों को वर्ष 2014 से पहले की डायरी संख्याएं मिलीं और सूची में 1987 में दर्ज किया गया एक मामला भी शामिल था। ये याचिकाएं लगातार मामलों को बढ़ा रही थीं और रजिस्ट्री में पड़ी रहीं।

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SC trashes 13,147 old cases in one stroke to unclog justice delivery system at top court
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI

विस्तार

लंबित मामलों के बोझ से दबी शीर्ष न्यायपालिका को राहत देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़े पैमाने पर 13,147 पुराने डायरी में दर्ज लेकिन अपंजीकृत मामलों को हटा दिया है, जिनमें से एक मामला तीन दशक से अधिक समय पहले दायर किया गया था। रजिस्ट्रार न्यायिक -1 चिराग भानु सिंह द्वारा गुरुवार को जारी एक आदेश में कहा गया है कि ये सभी मामले आठ साल से अधिक समय पहले दर्ज किए गए थे, लेकिन रजिस्ट्री द्वारा संबंधित वकील या याचिकाकर्ताओं को व्यक्तिगत रूप से बताई गई कमियों को ठीक नहीं किया गया।

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रजिस्ट्री में पड़ी रहीं याचिकाएं
मामलों को वर्ष 2014 से पहले की डायरी संख्याएं मिलीं और सूची में 1987 में दर्ज किया गया एक मामला भी शामिल था। ये याचिकाएं लगातार मामलों को बढ़ा रही थीं और रजिस्ट्री में पड़ी रहीं। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर, 2022 तक 70,310 लंबित मामले थे। इनमें 51,839 विविध मामले और नियमित सुनवाई से संबंधित 18,471 मामले शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के आदेश में कहा गया है कि मामलों के पक्षकार मुकदमों पर आगे मुकदमा चलाने का इरादा नहीं रखते हैं क्योंकि उन्होंने कई वर्षों के अंतराल के बाद भी कमियों को ठीक नहीं किया है।
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आदेश में कहा गया कि 13,147 अपंजीकृत लेकिन डायरी में दर्ज मामले  वर्ष 2014 से पहले दर्ज किए गए थे। ये मामले 8 साल से अधिक पहले दर्ज किए गए थे। चलन के अनुसार तब मामलों में देखी गई कमियों को सुधारने के लिए वकील/याचिकाकर्ता के पास इन्हें वापस लौटाया गया लेकिन इन्हें कभी भी ठीक नहीं किया गया। 
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इसमें कहा गया है, यहां ऊपर बताए गए सभी कारणों से मैं विवश हूं लेकिन यह मानने के लिए बाध्य हूं कि उपरोक्त मामलों को पंजीकरण के लिए अनुमति देने हेतु कोई वैध और व्यावहारिक कारण नहीं है। मैं उपरोक्त डायरी नंबर दर्ज करने से इनकार करता हूं। अदालत के अधिकारी ने कहा, पहले की प्रथा के अनुरूप रजिस्ट्री द्वारा दोषों को सूचित करते हुए कोई कागजात नहीं रखे गए थे। इस प्रकार अधिसूचित सभी दोषों को ठीक करने के बाद ही वकील अभिवचनों का एक पूरा सेट दाखिल करेगा। 19 अगस्त 2014 के बाद ही वादपत्र और न्यायालय शुल्क टिकटों की एक प्रति रजिस्ट्री के पास रखने का प्रावधान किया गया था।

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