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SC: ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ पदनाम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 2017 के फैसले पर पुनर्विचार से जुड़ा है मामला

Wed, 15 Mar 2023 08:14 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 15 Mar 2023 08:14 PM IST
सार

नेदुमपारा ने कहा कि याचिका में वकीलों को 'वरिष्ठ अधिवक्ता' नामित करने की प्रथा को समाप्त करने की मांग की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश वरिष्ठ अधिवक्ता न्यायाधीशों और वकीलों के 'परिजन' हैं।  

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SC starts hearing on whether its 2017 verdict on guidelines for sr advocate designation rneeds tweaking
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला, इंदौर

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की, जिसमें ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ पदनाम देने के लिए वर्ष 2017 में उसके और और उच्च न्यायालयों के लिए दिशानिर्देश निर्धारित किए गए थे, पर फिर से विचार करने की जरूरत है।

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न्यायमूर्ति एस के कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को जैसे ही इस पर सुनवाई शुरू की एक वकील ने अदालत को बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं के रूप में वकीलों के पदनाम के खिलाफ एक अलग याचिका दायर की गई है। उस याचिका पर भी इसके साथ ही सुनवाई की जानी चाहिए।
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एडवोकेट मैथ्यूज जे नेदुमपारा ने पीठ को बताया कि मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को कहा था कि याचिका को 20 मार्च के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। इस पर न्यायमूर्ति ए अमानुल्लाह और अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि मामला जब भी आएगा, अगर यह हमारे सामने सूचीबद्ध है, तो हम इसे सुनेंगे। याचिका को बुधवार यानी आज के लिए  सूचीबद्ध नहीं किया गया था।
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इस पर नेदुमपारा ने कहा कि याचिका में वकीलों को 'वरिष्ठ अधिवक्ता' नामित करने की प्रथा को समाप्त करने की मांग की गई है। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश वरिष्ठ अधिवक्ता न्यायाधीशों और वकीलों के 'परिजन' हैं। इस पर पीठ ने उनके दावे का जवाब देते हुए कहा कि कई नामित वरिष्ठ अधिवक्ता पहली पीढ़ी के वकील हैं। 

पीठ ने नेदुमपारा से कहा कि वह याचिका पर तब सुनवाई करेगी जब यह अदालत के सामने आएगी और अगर हम आपसे सहमत होते हैं, तो पदनाम वापस लिया जाएगा। इसके बाद पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह की दलीलें सुनीं, जिनकी याचिका पर 2017 का फैसला सुनाया गया था।


पीठ ने कहा कि जहां तक वर्तमान कानून का सवाल है, पहले से ही एक निर्णय है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या इसमें किसी बदलाव की जरूरत है या नहीं है। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने भी अपनी दलीलें पेश कीं। गौरतलब है कि इस मामले में सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

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