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बहन की ससुराली संपत्ति पर भाई का हक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

Sun, 12 Feb 2017 09:55 PM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली
एजेंसी/ नई दिल्ली Updated Sun, 12 Feb 2017 09:55 PM IST
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SC says brother has no right on her sisters property
- फोटो : file photo

सुप्रीम कोर्ट ने एक पारिवारिक मामले में फैसला दिया है कि कोई व्यक्ति अपनी शादीशुदा बहन की ससुराली संपत्ति पर हक नहीं जता सकता। कोर्ट ने कहा कि क्योंकि भाई को न तो उत्तराधिकारी माना जा सकता है और न ही उसके परिवार का सदस्य। इसलिए बहन की ससुराली संपत्ति पर उसका कोई हक नहीं है।  

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शीर्ष अदालत ने हिंदू उत्तराधिकारी अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए यह फैसला दिया। जिसमें किसी ऐसी महिला की संपत्ति के उत्तराधिकार संबंधी आदेश हैं जिनकी मृत्यु वसीयत लिखने से पूर्व हो जाती है।
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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और आर. भानुमति की पीठ ने कहा, ‘अनुच्छेद (15) में इस्तेमाल भाषा में स्पष्ट कहा गया है कि पति और ससुर की पैतृक संपत्ति पति या ससुर के वारिस को ही हस्तांतरित की जा सकती है। जिससे उस महिला को विरासती संपत्ति दी जा सकती है।’ शीर्ष अदालत ने यह अहम फैसला उत्तराखंड हाईकोर्ट के मार्च 2015 के फैसले को बरकरार रखते हुए इसे चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।

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हिंदू उत्तराधिकारी कानून के मुताबिक दिया फैसला

SC says brother has no right on her sisters property
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

यह मामला देहरादून की एक संपत्ति पर अनधिकृत कब्जा करने वाले उस व्यक्ति से संबंधित है जिसने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। यह जायदाद उसकी बहन के ससुराल वालों की थी और इस पर किरायेदार के रूप में रहते ही उसकी बहन की मृत्यु हो गई थी। पीठ ने कहा कि इस जायदाद को उस महिला के ससुर ने 1940 में पट्टे पर लिया था और इसके बाद महिला का पति उसका किरायेदार बना। पति की मृत्यु के बाद महिला ही उस संपत्ति की किरायेदार थी। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘ललिता (बहन) की मृत्यु के बाद उसकी किसी संतान की अनुपस्थिति में हिंदू उत्तराधिकारी कानून की धारा 15 (2) (बी) के मुताबिक, जायदाद का पट्टा उसके पति के वारिसों को ही हस्तांतरित हो सकता है। इस मामले में मृतक महिला के भाई और याचिकाकर्ता को उस परिवार का सदस्य नहीं माना जा सकता।’ 

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