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बिहार सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार: कहा- आपके शराबबंदी के केसों की वजह से अदालतों का दम घुट रहा
Tue, 11 Jan 2022 10:52 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 11 Jan 2022 10:52 PM IST
सार
सीजेआई रमण ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के अमरावती में एक समारोह में बिहार के शराबबंदी कानून का जिक्र किया था और कहा था कि इसकी वजह से राज्य की अदालतों और उच्च न्यायालय में बहुत सारे जमानत आवेदन दाखिल हुए हैं।
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नीतीश कुमार
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को जबरदस्त फटकार लगाई है। दरअसल, नीतीश सरकार ने शराबबंदी कानून के तहत पकड़े गए आरोपियों की जमानत के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में कई अपील दायर की हैं। ऐसे ही कुछ मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए बिहार सरकार से कहा कि इन केसों ने अदालतों का दम घोंट रखा है और पटना हाईकोर्ट के तो 14-15 जज सिर्फ इन्हीं मामलों की सुनवाई करते हैं।
चीफ जस्टिस एनवी रमण के नेतृत्व वाली बेंच ने आरोपियों की जमानत के खिलाफ बिहार सरकार की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन वी रमण के नेतृत्व वाली पीठ ने बिहार सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि आरोपियों से जब्त की गई शराब की मात्रा को ध्यान में रखते हुए वजह के साथ जमानत आदेश पारित करना सुनिश्चित कराया जाए और इसके लिए दिशानिर्देश तैयार हों।
इस पर चीफ जस्टिस ने भड़कते हुए कहा, "आप जानते हैं कि इस कानून (बिहार शराबबंदी कानून) ने पटना हाईकोर्ट के कामकाज को कितना प्रभावित किया है और वह अदालत अब किसी मामले को सूचीबद्ध करने में एक साल का समय ले रही है। बिहार की सभी अदालतें शराबबंदी मामलों पर ही सुनवाई से घिरी हैं।"
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सीजेआई रमण ने आगे कहा, "मुझे बताया गया है कि पटना हाईकोर्ट के 14-15 जज हर दिन इन जमानत के मामलों को सुन रहे हैं। इसकी वजह से और किसी मामले पर सुनवाई नहीं हो पा रही है।" इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार की तरफ से शराबबंदी मामलों में हुई जमानतों के खिलाफ दायर 40 अपीलों को एक साथ ठुकरा दिया।
शराबबंदी से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी काफी महत्वपूर्ण है। दरअसल, सीजेआई रमण ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के अमरावती में एक समारोह में बिहार के शराबबंदी कानून का जिक्र किया था और कहा था कि इसकी वजह से राज्य की अदालतों और उच्च न्यायालय में बहुत सारे जमानत आवेदन दाखिल हुए हैं। उन्होंने कहा था कि कानून बनाने में दूरदर्शिता की कमी सीधे तौर पर अदालतों को अवरुद्ध कर सकती है।
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चीफ जस्टिस एनवी रमण के नेतृत्व वाली बेंच ने आरोपियों की जमानत के खिलाफ बिहार सरकार की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन वी रमण के नेतृत्व वाली पीठ ने बिहार सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि आरोपियों से जब्त की गई शराब की मात्रा को ध्यान में रखते हुए वजह के साथ जमानत आदेश पारित करना सुनिश्चित कराया जाए और इसके लिए दिशानिर्देश तैयार हों।
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इस पर चीफ जस्टिस ने भड़कते हुए कहा, "आप जानते हैं कि इस कानून (बिहार शराबबंदी कानून) ने पटना हाईकोर्ट के कामकाज को कितना प्रभावित किया है और वह अदालत अब किसी मामले को सूचीबद्ध करने में एक साल का समय ले रही है। बिहार की सभी अदालतें शराबबंदी मामलों पर ही सुनवाई से घिरी हैं।"
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सीजेआई रमण ने आगे कहा, "मुझे बताया गया है कि पटना हाईकोर्ट के 14-15 जज हर दिन इन जमानत के मामलों को सुन रहे हैं। इसकी वजह से और किसी मामले पर सुनवाई नहीं हो पा रही है।" इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार की तरफ से शराबबंदी मामलों में हुई जमानतों के खिलाफ दायर 40 अपीलों को एक साथ ठुकरा दिया।
शराबबंदी से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी काफी महत्वपूर्ण है। दरअसल, सीजेआई रमण ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के अमरावती में एक समारोह में बिहार के शराबबंदी कानून का जिक्र किया था और कहा था कि इसकी वजह से राज्य की अदालतों और उच्च न्यायालय में बहुत सारे जमानत आवेदन दाखिल हुए हैं। उन्होंने कहा था कि कानून बनाने में दूरदर्शिता की कमी सीधे तौर पर अदालतों को अवरुद्ध कर सकती है।