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Supreme Court: 'सार्वजनिक खुलासे का मकसद क्या...' महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा सवाल

Tue, 14 Oct 2025 09:39 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 14 Oct 2025 09:39 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने वैकल्पिक निवेश कोषों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के अंतिम मालिकों का सार्वजनिक खुलासा करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत बेतरतीब जांच नहीं हो सकती और याचिका में उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए।  

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SC questions Mahua Moitra over her plea to mandate public disclosure of foreign portfolio investors
महुआ मोइत्रा, सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर सवाल पूछे। याचिका में उन्होंने भारत में वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ), विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) और उनके बिचौलियों के अंतिम लाभार्थी मालिकों और उनके पोर्टफोलियो का सार्वजनिक रूप से खुलासा करने की मांग की थी।
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जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करके बेतरतीब और संदिग्ध जांच नहीं की जा सकती। बेंच ने कहा, आप सार्वजनिक खुलासा करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन उसका उद्देश्य क्या है? आप इस खुलासे का क्या करेंगे? क्या यह सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आता है? आप अनुच्छेद 32 के तहत ऐसी याचिका दायर नहीं कर सकते जो सूचना के अधिकार जैसी हो।
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शीर्ष कोर्ट ने महुआ के वकील प्रशांत भूषण से याचिका में संशोधन करने और मामले में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की ओर से दायर जवाब को चुनौती देने को कहा। भूषण ने दलील दी कि वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) और एफपीआई के माध्यम से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है, लेकिन न तो जनता और न ही सेबी को इस बात की स्पष्टता है कि आखिरकार इन निवेशों को कौन नियंत्रित करता है। 

उन्होंने कहा कि कई फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल स्वामित्व को छिपाने के लिए किया जाता है। भूषण ने ऐसे कई उदाहरणों का हवाला दिया, जहां फंड को ग्लोबल ऑपर्च्युनिटीज फंड जैसे नामों से लेबल किया गया था, जबकि इसके वास्तविक मालिक का कोई अता-पता नहीं था।


सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता सब कुछ उजागर करना चाहती हैं ताकि कुछ निकाला जा सके और याचिका दायर की जा सके। शीर्ष कोर्ट ने एक अप्रैल को मोइत्रा से इस मुद्दे पर सेबी के समक्ष एक विस्तृत आवेदन प्रस्तुत करने को कहा था। 1 अप्रैल को महुआ की पूर्व याचिका का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार ऐसा आवेदन दाखिल हो जाए, तो उस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।

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इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि प्राधिकारी उचित समय के भीतर आवेदन पर विचार नहीं करते हैं, तो याचिकाकर्ता के पास कानूनी उपाय मौजूद हैं। टीएमसी सांसद ने कहा था कि उनकी जनहित याचिका में अंतिम लाभार्थी स्वामियों के विवरण के साथ-साथ एआईएफ और एफपीआई की पोर्टफोलियो होल्डिंग के सार्वजनिक खुलासे को अनिवार्य करके भारत के वित्तीय बाजारों में पारदर्शिता और निवेशक जागरूकता की मांग की गई है।


 
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