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Supreme Court: जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने बिलकिस बानो केस से खुद को किया अलग, दोषियों की रिहाई का मामला

Tue, 13 Dec 2022 10:54 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Tue, 13 Dec 2022 10:54 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट की जज न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी ने बिलकिस बानो केस से खुद को अलग कर लिया है। गुजरात दंगों की पीड़िता बिलकिस ने सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले के 11 दोषियों की समय से पहले रिहाई के फैसले को चुनौती दी है। 

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SC Justice Bela M Trivedi recuses herself from hearing Bilkis Bano plea against release of gangrape convicts
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की जज न्यायामूर्ति बेला एम त्रिवेदी ने दुष्कर्म और हत्या मामले के 11 दोषियों की समय से पहले रिहाई के फैसले को चुनौती देने वाली गुजरात दंगों की पीड़िता बिलकिस बानो की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। मंगलवार को जैसे ही न्यायामूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायामूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ में मामले की सुनवाई शुरू हुई, न्यायामूर्ति रस्तोगी ने कहा कि उनकी बहन न्यायामूर्ति त्रिवेदी इस मामले की सुनवाई नहीं करना चाहती हैं।

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इसके साथ ही, न्यायमूर्ति रस्तोगी की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को एक ऐसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश दिया, जिसमें दोनों में से कोई जज न हो। हालांकि, पीठ ने न्यायमूर्ति त्रिवेदी के मामले से अलग होने का कोई कारण नहीं बताया।
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बता दें, बिलकिस बानो ने सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की हैं। पहली याचिका में उन्होंने एक दोषी की अर्जी पर शीर्ष अदालत के 13 मई, 2022 के आदेश की समीक्षा की मांग की है। अदालत ने अपने आदेश में गुजरात सरकार से 9 जुलाई, 1992 की एक नीति के तहत दोषियों की समय से पहले रिहाई की याचिका पर विचार करने को कहा था।
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दूसरी याचिका में उन्होंने गुजरात सरकार के दोषियों को रिहा करने के फैसले को चुनौती दी है। जिस पर आज न्यायामूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायामूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ में सुनवाई होनी थी, लेकिन न्यायामूर्ति त्रिवेदी ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित कानून की अनदेखी!
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गुजरात सरकार ने इसी साल 15 अगस्त को सभी 11 दोषियों को सजा में छूट देते हुए रिहा कर दिया था। बिलकिस बानो ने अपनी याचिका में कहा है कि गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के रिहाई के संबंध में निर्धारित कानून की अनदेखी करते हुए आदेश पारित किया।


इससे पहले, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह बिलकिस बानो मामले में उसके आदेश की समीक्षा की मांग करने वाली याचिका को सूचीबद्ध करने पर जल्द विचार करेगा। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने सोमवार को बिलकिस बानो की वकील शोभा गुप्ता की दलीलों पर गौर किया। सीजेआई ने कहा कि वह जल्द ही याचिका को सूचीबद्ध करेंगे और एक तारीख तय करेंगे। वह इसकी जांच करेंगे।

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