सीएए विरोधी प्रदर्शन: नुकसान की भरपाई के नोटिस रद्द करने संबंधी याचिका पर यूपी सरकार को नोटिस
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में एंटी-सीएए विरोध प्रदर्शनों के कारण सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान की वसूली के लिए जारी की गई रिकवरी नोटिस को रद्द करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते के भीतर अपना जवाब दायर करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया है कि यूपी सरकार ने यह नोटिस एक व्यक्ति के खिलाफ मनमाने तरीके से भेजा है, जिसकी 94 साल की उम्र में छह साल पहले मौत हो चुकी है और साथ ही दो अन्य को भी नोटिस भेजे गए जिनकी उम्र 90 साल से अधिक है।
मामले में याचिकाकर्ता एवं वकील परवेज आरिफ टीटू ने यह दावा करते हुए इन नोटिस पर रोक लगाने का अनुरोध किया है कि ये उन व्यक्तियों को भेजे गए हैं जिनके खिलाफ किसी दंडात्मक प्रावधान के तहत मामला दर्ज नहीं हुआ और न ही उनके खिलाफ किसी प्राथमिकी या अपराध का ब्योरा उपलब्ध कराया गया है। याचिका में प्रदर्शन के दौरान हिंसक घटनाओं की न्यायिक जांच कराने की भी मांग की गई है।
SC issues notice to Uttar Pradesh Govt on a plea seeking quashing of the recovery notices issued by Uttar Pradesh administration to recover the damage caused to public properties, in connection with anti-CAA protests in the state. SC asks UP govt to file its reply within 4 weeks. pic.twitter.com/lAvZJ8tHRm
— ANI UP (@ANINewsUP) January 31, 2020
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर योगी सरकार के आदेश को चुनौती दी गई है। यूपी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की पहचान कर उनसे वसूली करने का आदेश दिया है। परवेज आरिफ द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि यूपी सरकार का यह निर्णय सही नहीं है। इसे निरस्त किया जाना चाहिए।
बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में गत 19 दिसंबर को लखनऊ में हिंसा व आगजनी से करीब 4.55 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। चार एडीएम की एकल कमेटी ने सार्वजनिक व निजी संपत्तियों के नुकसान का आंकलन कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। नुकसान की भरपाई को उपद्रव, आगजनी व हंगामे में चिह्नित 150 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। इसके साथ ही नुकसान की भरपाई के लिए वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
वहीं, 20 दिसंबर को मुजफ्फरनगर में हुई हिंसा के मामले में पांच लोगों द्वारा किसी तरह का जवाब एडीएम प्रशासन के समक्ष नहीं दाखिल किया गया। इसके चलते उक्त लोगों के खिलाफ अब जुर्माना निर्धारण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
सीएए के विरोध में 20 दिसंबर को शहर क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन के दौरान जमकर हिंसा हुई थी। हिंसा में कुल 56.8 लाख रुपये की निजी व सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हुआ था। मामले में एडीएम प्रशासन अमित सिंह द्वारा शहर के 46 लोगों को चिह्नित करते हुए उन्हें नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से 35 लोगों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर एडीएम प्रशासन के समक्ष अपना स्पष्टीकरण दाखिल कर दिया था। शेष 11 लोगों को फिर से नुकसान क्षतिपूर्ति के लिए नोटिस जारी कर 20 जनवरी तक अपना स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए थे।