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कोरोना: बिना वैध लाइसेंस के दवाओं की बिक्री और निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस

Thu, 29 Oct 2020 01:10 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 29 Oct 2020 01:10 PM IST
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sc issue notice to centre on plea seeking registration of FIR by CBI against selling medicines without license
नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

कोरोना महामारी के इलाज में रेमडेसिविर और फैविपिराविर दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में जवाब मांगा है। याचिका में बिना वैध लाइसेंस के रेमडेसिविर और फेविपिराविर दवाओं का निर्माण और बिक्री करने के लिए दस भारतीय दवा कंपनियों के खिलाफ सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।

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मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यन की पीठ ने कहा, चूंकि इस बारे में केंद्र सरकार बेहतर जानती है, इसलिए उसे हम नोटिस जारी कर रहे हैं। पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता एमएल शर्मा ने कहा, विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट कहती है कि इन दोनों दवाओं का कोविड के मरीजों पर कोई असर नहीं है। शर्मा ने शीर्ष अदालत में जनहित याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन से वैध लाइसेंस प्राप्त किए बिना कोविड-19 रोगियों के इलाज के लिए दवाओं का उत्पादन किया जा रहा है और इन्हें बेचा जा रहा है।
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इसमें आरोप लगाया गया है कि भारतीय दवा निर्माता कंपनियाें ने विदेशी कंपनियों के साथ रेमडेसिविर और फैविपिराविर के उत्पादन और बिक्री के लिए साझेदारी का करार किया है। शर्मा ने पीठ से यह आग्रह किया कि वह सीबीआई को इन भारतीय कंपनियों पर दवा कानून, 1940 के प्रावधानों के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले दर्ज करने के निर्देश दे। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि इन दवाओं के कारगर होने पर सवाल उठाने वाली विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट कब आई थी? तब शर्मा ने कहा कि रिपोर्ट 15 अक्तूबर को आई थी, लेकिन कंपनियां अब भी इस दवा को कोविड का इलाज बताकर बना और बेच रही हैं।
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