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अतिक्रमण: रेलवे की जमीन पर कब्जे से प्रोजेक्ट में विलंब, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- करदाताओं का पैसा हो रहा बर्बाद
Tue, 07 Dec 2021 07:44 PM IST
सुरेंद्र जोशी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 07 Dec 2021 07:44 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने दो अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई करते हुए यह बात कही। इन याचिकाओं में गुजरात व हरियाणा में रेलवे की जमीनों पर से अतिक्रमण हटाने की मांग की गई है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की जमीनों पर अतिक्रमण व कब्जे को लेकर मंगलवार को नाराजगी जताई है। इसके कारण सार्वजनिक परियोजनाओं पर अमल में देरी हो रही है और वो अटक रही हैं। शीर्ष कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि उनकी राजनीतिक विवशता हो सकती है, लेकिन यह करदाताओं का पैसा है, जो बर्बाद हो रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने दो अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई करते हुए यह बात कही। इन याचिकाओं में गुजरात व हरियाणा में रेलवे की जमीनों पर से अतिक्रमण हटाने की मांग की गई है। शीर्ष कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि वे इस समस्या का हल निकालें।
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जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि नगर निगम, राज्य सरकार और रेलवे का इन मामलों में समान रुख नहीं है। चूंकि ये जनहित के मामले हैं, इसलिए परियोजनाओं पर काम को तुरंत आगे बढ़ाना चाहिए।
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पीठ ने कहा, 'आप इस समस्या से कैसे उबरेंगे? हम चाहते हैं कि आप हमें यह बताएं। बिना किसी राजनीतिक बयान के हम कह रहे हैं कि तीनों स्तरों पर सरकार एक ट्रिपल इंजन की तरह है। रेलवे का इंजन इसमें काम नहीं कर सकता है।' पीठ ने यह बात केंद्र, राज्य सरकारें व नगर निगमों के संर्दभ में कही। पीठ में जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और सी टी रविकुमार भी शामिल हैं। इस पर मेहता ने पीठ से कहा कि वह सभी स्तरों पर बात करेंगे और रेल मंत्री से भी चर्चा करेंगे, क्योंकि सार्वजनिक परियोजनाओं का काम रोका नहीं जा सकता।
बहानेबाजी नहीं चलेगी, 15 दिन में काम शुरू करें
सुप्रीम कोर्ट ने मेहता से कहा कि इस मामले को आपको जल्द से जल्द और 15 दिन में निपटाना चाहिए और प्रोजेक्ट का काम शुरू हो, यह सुनिश्चित करें। जो भी प्रबंध हो, उन्हें युद्ध स्तर पर किया जाए। हम केंद्र सरकार, राज्य सरकार या नगर निगम की ओर से कोई बहानेबाजी नहीं चाहते है।