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Supreme Court: वर्चुअल सुनवाई के दौरान पिछली गवाही इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजा जाए, जानिए अदालत के इस आदेश का असर
Mon, 17 Nov 2025 11:47 PM IST
लव गौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: लव गौर
Updated Mon, 17 Nov 2025 11:47 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम आदेश जारी करते हुए कहा कि जिन मामलों में गवाहों के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज किए जाते हैं, उन सभी में ट्रायल कोर्ट यह सुनिश्चित करें कि गवाहों को उनके पूर्व बयान या संबंधित दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पहले ही भेज दिए जाएं।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वे उन सभी कार्यवाहियों में गवाहों के पिछले बयानों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रसारित करने की सुविधा प्रदान करें जहां उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूछताछ की जाती है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने एक आपराधिक मामले में उत्पन्न हुई प्रक्रियात्मक अनियमितता को देखते हुए यह निर्देश पारित किया।
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गवाह के अदालत में उपस्थित नहीं होने पर नुकसान नहीं होना चाहिए
पीठ ने कहा कि प्रौद्योगिकी के इस उन्नत युग में, ऐसे कई उदाहरण हैं जहां गवाहों के साक्ष्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज किए जा रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में, किसी भी पक्ष को सिर्फ इसलिए नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए क्योंकि गवाह अदालत में उपस्थित नहीं है और जिस दस्तावेज या लिखित बयान से ऐसे गवाह का सामना कराना है, उसे दिखाया या दिया नहीं जा सकता।
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वीडियो लिंक के माध्यम से कनाडा से गवाही, प्रभावी जिरह करने में चुनौती
शीर्ष अदालत का यह निर्देश उस मामले में आया है, जिसमें बचाव पक्ष एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी, जो वीडियो लिंक के माध्यम से कनाडा से गवाही दे रहा था, से प्रभावी ढंग से जिरह करने में असमर्थ रहा, क्योंकि ट्रायल कोर्ट उसे उसके पूर्व असंगत बयान वाले दस्तावेज नहीं दिखा सका।