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ब्रिक्स: भारत ने सहयोगी देशों को दिया डिजिटल इकॉनमी का नजरिया, पुतिन-मोदी का कार डिप्लोमेसी से दुनिया को संदेश

Fri, 11 Sep 2026 07:54 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Fri, 11 Sep 2026 07:54 PM IST
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BRICS: India Shares Its Digital Economy Vision, Modi-Putin Send Global Message Through Car Diplomacy
पीएम मोदी की कार डिप्लोमेसी। - फोटो : एएनआई

चीन के राष्ट्रपति के भारतीय धरती पर उतरने से पहले रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत मंडमप में ‘इनोप्रॉम’ में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक गाड़ी में गए। राष्ट्रपित पुतिन ने इससे पहले 2005 में चीन और भारत में और इसी साल बिश्केक एससीओ की बैठक के दौरान भी पीएम मोदी के साथ कार डिप्लोमेसी करते हुए नजर आए थे। जब दो शिखर नेता मिलते हैं, उनके मिलने का अंदाज, आपसी केमिस्ट्री और तरीका दुनिया को बड़ा संदेश देता है। रूस-भारत ने 11 सितंबर को फिर यही संदेश दिया कि दोनों एक दूसरे से गहरा रिश्ता रखते हैं। रूस के राष्ट्रपति की कार में यह 4 बार की यात्रा महत्वपूर्ण है। 

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अमेरिका की यह कौन सी कूटनीतिक?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अमेरिका, भारत, जापान, आस्ट्रेलिया के फोरम (क्वॉड) की परिकल्पना में थोड़ा जान फूकना शुरू किया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुर्सी पर बैठते ही इसे ठंडे बस्ते में पहुंचा दिया। अभी तक इसका एक भी शिखर सम्मेलन नहीं हो पाया। इसके विदेश मंत्रियों की बैठक मई 2026 में हुई थी। लेकिन भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 शुरू होने के ठीक पहले अमेरिका के विशेष प्रयास में 3-4 सितंबर को क्वॉड के शेरपा की बैठक हो गई। भारत की तरफ से विदेश सचिव विक्रम मिस्री, अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर, जापान के वरिष्ठ उप विदेश मंत्री हिरोयुकी नमाजु, आस्ट्रेलिया के उप विदेश सचिव एली लॉसन ने इसमें प्रतिनिधित्व किया। यह भी घोषणा हो गई कि क्वॉड का शिखर सम्मेलन भी होगा। यह शिखर सम्मेलन भारत की बजाय अमेरिका में होगा। 
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डिजिटल इकोनॉमी का नजरिया
रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन डॉलर के मुकाबले ब्रिक्स की मुद्रा में कारोबार की वकालत कर रहे हैं। चीन को कोई विशेष आपत्ति नहीं है। अभी डॉलर के महत्व को कम करने वाली इस पहल को ब्रिक्स के देशों की संद्धांतिक मंजूरी नहीं मिली है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इस पर चर्चा सबसे महत्वपूर्ण है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले ‘इन्नोप्राम’ में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बड़ा प्रस्ताव रख है। उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों से यूपीआई पेमेंट लिंक जोड़ने, इसमें कारोबार करने की पहल की है। गोयल का प्रस्ताव ब्रिक्स की मुद्रा में कारोबार का ‘बैक डोर’ है। भारत यूपीआई (डिजिटल पेमेंट) को सफलता पूर्वक अपना रहा है। करीब 250 अरब डॉलर (25000 करोड़ रुपये) का कारोबार करता है। इसकी स्वीकार्यता यूएई, सिंगापुर समेत 11 देशों में है। माना जा रहा है कि यह बड़ा प्रस्ताव है। चीन, रूस, भारत और सदस्य देशों द्वारा इस विधा के अपनाने से जहां डॉलर पर निर्भरता कम होगी, वही स्थानीय मुद्रा को मजबूती मिलेगी।
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भारत का एजेंडा क्या?
भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 की अध्यक्षता कर रहा है। रूस और चीन के साथ इसका संस्थापक देश है। तीनों देशों के संगठन (आरआईसी) और इसके उद्दशेय का विस्तार ही ब्रिक्स है और इसमें ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, यूएई, ईरान समेत कुल 11 सदस्य हो गए हैं। भारत का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में  मुख्य उद्देश्य रणनीतिक स्वायत्तता और ग्लोबल साऊथ (विकासशील देशों की आवाज मजबूत करना) पर है। भारत का मकसद ब्रिक्स देशों में- 1.आपसी व्यापार घाटा को कम करना और संतुलित व्यापार तंत्र विकसित करना, छोटे व्यापार तंत्र को आगे बढ़ाना 2. सप्लाई चेन को स्थायित्व और मजबूती देना तथा आपसी सहयोग से ऊर्जा सुरक्षा की चिंताओं को कम करना 3. सीमा संबंधी विवाद को संवाद के माध्यम से मजबूत आधार देकर आपसी विश्वास को मजबूत करना (खासकर, भारत-चीन मामले में द्विपक्षीय स्तर पर) 4. डिजिटल भुगतान के लिंक को आपस में जोड़कर ब्रिक्स डिजिटल भुगतान के तंत्र को विकसित करना 5. अंतरराष्ट्रीय मंच पर बहुपक्ष वाद या बहुध्रुवीय दुनिया आदि।
 

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