{"_id":"6437bc47448c4d8b63036099","slug":"sc-agrees-to-hear-plea-against-scrapping-of-4-per-cent-muslim-quota-in-karnataka-2023-04-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: मुस्लिमों का 4% आरक्षण खत्म करने का फैसला त्रुटिपूर्ण, कर्नाटक सरकार के फैसले पर अदालत की सख्त टिप्पणी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: मुस्लिमों का 4% आरक्षण खत्म करने का फैसला त्रुटिपूर्ण, कर्नाटक सरकार के फैसले पर अदालत की सख्त टिप्पणी
Thu, 13 Apr 2023 05:31 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 13 Apr 2023 05:31 PM IST
सार
कर्नाटक मंत्रिमंडल ने हाल ही में अल्पसंख्यकों के लिए चार फीसदी आरक्षण खत्म करने का फैसला किया था। अब उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत लाया जाएगा। इसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई थी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कर्नाटक में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुस्लिम आरक्षण खत्म किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि राज्य में मुसलमानों के लिए चार फीसदी ओबीसी आरक्षण खत्म करने का कर्नाटक सरकार का फैसला प्रथम दृष्टया ‘भ्रामक, अस्थिर और त्रुटिपूर्ण’ है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के चलते राज्य सरकार को यह आश्वासन देने के लिए मजबूर होना पड़ा कि अगली सुनवाई तक नई नीति के आधार पर कोई भी दाखिला या नौकरी में भर्ती नहीं की जाएगी। जस्टिस केएम जोसफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने बृहस्पतिवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए राज्य समेत अन्य प्रतिवादियों को 17 अप्रैल तक इस मामले में अपना हलफनामा दायर करने के लिए कहा है। अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।
विज्ञापन
यह है मामला
कर्नाटक सरकार ने हाल ही में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के मुसलमानों के लिए चार फीसदी कोटा समाप्त करते हुए सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की दो नई श्रेणी की घोषणा की थी। ओबीसी मुसलमानों के चार फीसदी कोटे को वोक्कलिगा और लिंगायत समुदायों के बीच बांट दिया गया है। यही नहीं, आरक्षण के लिए पात्र मुसलमानों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के तहत वर्गीकृत कर दिया गया है। राज्य सरकार के फैसले के बाद अब यहां आरक्षण की सीमा करीब 57 फीसदी हो गई है। कर्नाटक सरकार के इस फैसले को ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
विज्ञापन
फैसले से पहले अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए था : जस्टिस जोसफ
पीठ ने शुरुआत में कर्नाटक सरकार के आदेश पर रोक लगाने की इच्छा जाहिर की थी। जस्टिस जोसफ ने मौखिक तौर पर कहा कि यह जाहिर तौर पर पिछड़ा वर्ग के लिए कर्नाटक राज्य आयोग की एक अंतरिम रिपोर्ट पर आधारित है। फैसले से पहले राज्य को अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए था।
आरक्षण कोई उदारता नहीं, अधिकार है : मुस्लिम पक्ष
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं (मुस्लिम पक्ष) की ओर से वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे और कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव की घोषणा के दो दिन पहले यह सरकारी आदेश जारी किया गया। दवे ने कहा कि मुस्लिम कर्नाटक में एक पिछड़ा समुदाय है और वे आरक्षण के हकदार हैं। अल्पसंख्यक समुदाय को अदालत के संरक्षण की जरूरत है। आरक्षण कोई उदारता नहीं है, यह एक अधिकार है।
सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए मांगी मोहलत
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। वोक्कालिगा और लिंगायत समुदायों की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि मामला केवल आरक्षण को रद्द करने से संबंधित नहीं है, बल्कि एक अलग समुदाय के लिए आरक्षण के आवंटन से भी संबंधित है।
चुनाव के मद्देनजर लिया गया फैसला?
कर्नाटक में इसी साल चुनाव होने हैं। ऐसे में इस फैसले को सरकार का चुनावी दांव कहा जा रहा है। इस फैसले के बाद अब कर्नाटक में लिंगायत आरक्षण को 5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया जाएगा। इसके साथ ही वोक्कालिगा समुदाय के लिए आरक्षण को चार फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी कर दिया जाएगा।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में लंबित रिक्ति भरने का सुप्रीम निर्देश
वहीं, एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में लंबित रिक्ति को भरने का निर्देश दिया। दरअसल शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर कर वर्ष 2017 में आयोग में रिक्तियों को भरने की मांग की गई थी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने नोट किया कि पहले के आयोग में मौजूद रिक्तियों को पहले ही भर दिया गया था। हालांकि छठे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में अभी भी रिक्तियां मौजूद हैं। केंद्र सरकार ने पीठ को सूचित किया कि आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और दो सदस्यों के रिक्त पद पहले ही भरे जा चुके हैं और केवल एक पद बचा है। जिसके बाद पीठ ने केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि यह रिक्ति जल्द भरी जाए।